फहीम अहमद
सोच रहा हंू नकली मेढक
रख दूं रवि के बस्ते में।
सबसे पहले अंकल जी के
बंद करूं सारे खर्रांटे।
अजी नाक में दम कर देते
जैसे पड़े गाल पर चांटे।
लाकर भोंपूं अभी बजाऊं
उठ जाएंगे सस्ते में।
बड़ी चटोरी लल्लो रानी
हरदम खाती चाट-पकौड़ी।
आइसक्रीम अभी खाई है
चॉकलेट लेने अब दौड़ी।
चाट-पकौड़ी जब वह खाए
मिर्च मिला दूं खस्ते में।
पिंकू जी डरपोक बड़े हैं
चूहे से थरथर कांपें।
बिल्ली जब देखें तो डर के
घर का ही रास्ता नापें।
पिंकू जी आने वाले हैं
डॉगी भेजूं रस्ते में।
दिमागी कसरत
(1)
जब भी लिखना होता तुमको
बनती हूं मैं सखी-सहेली
यही है मेरा गुण रे भाई
जब भी काटो, नई-नवेली।
(2)
गर्मी में जिससे घबराते
जाड़े में हम उसको खाते
उससे है हर चीज चमकती
दुनिया भी है खूब दमकती
(3)
न किसी से झगड़ा
न किसी से लड़ाई
फिर भी होती
सदा पिटाई।
(4)
नीचे दिया गया चित्र किसका है, पहचानिए और बताइए।
