जल्दी थक जाना, सुस्ती रहना, याद्दाश्त कमजोर होना, अवसाद में आना, बालों का झड़ना, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द होना आदि परेशानियां अगर आपको सता रही हैं तो आपको थायराइड की समस्या हो सकती है। थायराइड एक ऐसी बीमारी है, जो धीरे-धीर इंसान को खत्म करती है। आमतौर पर इस बीमारी के लक्षणों की ओर हम ध्यान ही नहीं दे पाते हैं। अगर आपको भी ऐसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो चिकित्सक से तुरंत संपर्क करें। थायराइड हमारे गले की एक ग्रंथि है। यह ग्रंथि थाइराक्सीन हार्मोन बना कर खून तक पहुंचाती है, जिससे शरीर में प्रोटीन और ऊर्जा का संतुलन बनता है। यह ग्रंथि टी-3 और टी-4 दो तरह के हार्मोन बनाती है। जब ये दोनों हार्मोन असंतुलित होते हैं तो थायराइड की समस्या उत्पन्न होती है।
दो तरह का होता थायराइड
थायराइड दो तरह का होता है। एक हाइपोथायराइड और दूसरा हायपरथायराइड। हाइपोथायराइड में जब शरीर में टी-3 और टी-4 हार्मोन नहीं पहुंच पाता है। तब वजन बढ़ने लगता है। इससे शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। पैरों में सूजन और ऐंठन की शिकायत होती है। इस रोग से अधिकतर महिलाएं पीड़ित हैं। हायपरथायराइड में टी-3 और टी-4 हार्मोन अधिक मात्रा में निकल कर रक्त में घुलनशील हो जाता है। इस स्थिति में वजन अचानक कम हो जाता है। भूख बढ़ने लगती है। पसीना ज्यादा आता है। मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं और नींद नहीं आती है।
थायराइड के कारण
तनाव : यों तनाव सेहत के लिए अच्छा नहीं होता और अगर आप ज्यादा तनाव ले रहे हैं या लगातार तनाव में रह रहे हैं तो इससे आपकी थायराइड ग्रंथि पर बुरा असर पड़ता है, जिससे थाइरॉयड रोग हो सकता है।
आयोडीन कम या ज्यादा खाने पर : अगर आपके भोजन में आयोडीन की मात्रा अधिक इस्तेमाल की जाती है या बहुत कम मात्रा प्रयोग की जाती है तो दोनों ही स्थितियों में थायराइड होने की संभावना अधिक होती है। इसलिए जरूरी है कि आयोडीन की संतुलित मात्रा का उपयोग किया जाए।
आनुवांशिक लक्षण : अगर आपके परिवार में पहले से ही किसी को थायराइड है, तब भी इसके आगे की पीढ़ी के लोगों में होने की संभावना बढ़ जाती है। यानी इस रोग का एक कारण आनुवांशिक लक्षण हैं।
गर्भावस्था : गर्भावस्था में महिलाओं के शरीर में कई तरह के परिवर्तन होते हैं। उनकी थायराइड ग्रंथि में भी परिवर्तन होते हैं। यह वह समय होता है जब महिलाएं अधिक तनाव में रहती हैं। इस वजह से भी थायराइड होता है।
दवाओं का प्रतिकूल प्रभाव : दवाओं के प्रतिकूल प्रभाव के कारण भी थायराइड की समस्या होती है।
माहवारी : माहवारी के दौरान महिलाओं में हार्मोनल परिवर्तन होते हैं। इन हार्मोनल परिवर्तन के कारण भी थायराइड होता है।
उपचार
थायराइड के कारणों को लेकर डॉक्टर अभी तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचे हैं। मगर फिर भी जो मूल कारण चिकित्सकों द्वारा देखे जा रहे हैं, उनके आधार पर थायराइड के निम्न कुछ उपचार हो सकते हैं।
थायराइड की जांच कराएं : अगर आपको थकान, कमजोरी, मोटापा, बालों का झड़ना जैसे उपरोक्त लक्षण दिखाई देते हैं या नहीं भी देते हैं तब भी हर छह महीने में थायराइड की जांच करवाएं। इससे आपके हार्मोन का स्तर संतुलित रहेगा।
सर्जरी : थायराइड होने पर सर्जरी द्वारा भी इसका इलाज संभव है।
कॉफी से बनाएं दूरी : कैफीन थायराइड से होने वाली समस्याओं को बढ़ा देता है, जैसे नींद न आना। इस वजह से थायराइड के मरीजों को कैफीन से बने उत्पादों से दूरी बनानी चाहिए।
वनस्पति घी : वनस्पति तेल को हाइड्रोजन की क्रिया द्वारा बनाया जाता है। इस तेल का इस्तेमाल खाने-पीने की दुकानों और घरों में अधिक किया जाता है। इससे अच्छे कॉलेस्ट्रॉल खत्म होते हैं और बुरे बढ़ते हैं। इससे थायराइड की समस्याएं और बढ़ जाती हैं। इसलिए बाहर की दुकानों का तले-भुने खाद्य से परहेज करें। दुकानों पर जो समोसे, पकौड़े वगैरह बनते हैं, उनमें उपयोग होने वाला वनस्पति तेल एक तो अच्छी किस्म का नहीं होता, फिर उसमें बार-बार चीजें तली जाती हैं, इसलिए वह सेहत के लिहाज से खतरनाक साबित होता है।
आयोडीन न खाएं : थायराइड ग्रंथियां हमारे शरीर से आयोडीन लेकर थायराइड हार्मोन को पैदा करते हैं। ऐसे में जो लोग बढ़े थायराइड से परेशान हैं उन्हें ज्यादा आयोडीन वाला खाना नहीं खाना चाहिए।
मादक पदार्थ : मादक पदार्थ यानी शराब, सिगरेट, गुटखा आदि शरीर में ऊर्जा के स्तर को प्रभावित करते हैं। इससे थायराइड से पीड़ित लोग नींद की समस्या से परेशान होते हैं। अधिक मादक पदार्थों का सेवन आपका मोटापा बढ़ाता है और थायराइड की बीमारी पैदा करता है।
