मानस मनोहर
दिवाली पर नमक पारे, मट्ठियां और तरह-तरह के नमकीन तो सभी बनाते हैं। ये सब चीजें बाजार में भी सहजता से बनी-बनाई मिल जाती हैं, पर अपने हाथों से बना कर मेहमानों को खिलाने में जो आनंद आता है, वह बाजार के व्यंजनों से भला कहां आएगा। इसलिए इस दिवाली कुछ अलग और सेहतमंद नमकीन बनाएं और मेहमानों को खिलाएं और खुद खाएं, फिर देखें त्योहार का मजा दोगुना हो जाएगा।
गुजराती मेथी भजिया
गुजरात में दिवाली पर मेथी के भजिये यानी पकौड़े बनाना और परोसना शुभ माना जाता है। मेथी के गुणों से तो आप परिचित हैं ही। यह डाइबिटिक लोगों के लिए औषधि है। इसके अलावा भी इसमें अनेक गुण हैं। गुजरात में मेथी भजिया बनाने के आमतौर पर दो तरीके हैं। पहला तो यह कि मेथी के हरे पत्तों को बारीक काट कर बेसन में गूंथ लेते हैं और फिर नमक, मसाले, हल्दी, हींग वगैरह डाल कर सामान्य पकौड़ों की तरह तल लेते हैं।
दूसरा तरीका है, सूखी मेथी यानी मेथी दाने की भजिया बनाने का। इसके लिए करीब पचास ग्राम या इससे कुछ अधिक मेथी के दानों को मिक्सर में दरदरा पीस लें। यह इस पकौड़े की मुख्य सामग्री है। इसके अलावा इसमें पांच तरह के आटे का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें बेसन, गेहूं का आटा, बाजरा, ज्वार, मक्का और चावल, सोयाबीन या रागी का आटा बराबर-बराबर मात्रा में मिलाया जाता है। आमतौर पर शहरों में पांच तरह का आटा जुटाना खासा मशक्कत का काम होता है। ऐसे में पतंजलि का नौरत्न आटा इस्तेमाल किया जा सकता है। इसे गेहूं, चने के अलावा चौलाई समेत नौ अनाजों को पीस कर तैयार किया जाता है। अब इस आटे में पिसी हुई मेथी मिला लें। पकौड़े नरम बनें, इसलिए थोड़ा-सा बेकिंग सोडा डालें और स्वाद के मुताबिक नमक, लाल मिर्च पाउडर और चाहें तो हरी मिर्च, धनिया पत्ता और अदरक के बारीक कटे टुकड़े डाल सकते हैं। (वैसे परंपरागत मेथी भजिया में ये चीजें नहीं डाली जातीं) इन सारी चीजों को आटे की तरह गूंथ लें और करीब आधे घंटे तक सेट होने के लिए रख दें।
आधे घंटे बाद कड़ाही में तेल गरम करें और गूंथे हुए आटे की छोटी-छोटी लोइयां बनाते हुए पकौड़े तल लें। इन पकौड़ों को गरमा-गरम हरी चटनी के साथ परोसें।
जिमीकंद की तरकारी
दिवाली के दिन बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में जिमीकंद यानी सूरन की सब्जी अनिवार्य रूप से खाई जाती है। जिमीकंद इसी मौसम में पैदा होता है। यह अत्यंत गुणकारी तरकारी है। इसमें लौह तत्त्व के अलावा डाइबिटीज दूर करने, कब्ज मिटाने के भी गुण होते हैं। इसका एक ही दुर्गुण है कि अगर ठीक से न पकाया जाए तो यह अरबी की तरह गले में खुजली पैदा करता है। इसकी खुजली दूर करने का एक ही तरीका है कि इसे पकाते या उबालते समय खटाई- अमचूर या इमली- का भरपूर इस्तेमाल किया जाए। जिमीकंद को ग्रेवी के साथ भी पकाया जाता है और सूखी सब्जी की तरह भी। बिहार और उत्तर प्रदेश में बहुत सारे लोग आलू की तरह इसका चोखा भी बनाते हैं। जिमीकंद को पकाने के दो तरीके हैं। एक तो यह कि पहले ही इसका छिलका उतार लिया जाए और इसके छोटे टुकड़े काट कर रात भर के लिए खटाई वाले पानी में भिगो कर रख दें। दूसरा तरीका यह है कि जिमीकंद को साफ करके बड़े टुकड़ों में काट लें और कुकर में आलू की तरह उबाल लें। उबालते समय ही खटाई डाल दें। ध्यान रहे कि इसे इतना न उबालें कि पिलपिला हो जाए। कुकर से निकाल कर इसे मनचाहे आकार में टुकड़े काट लें। अगर ग्रेवी के साथ बनाना है तो पनीर की तरह के चौड़े और बड़े टुकड़े काटे जा सकते हैं। अगर सूखी सब्जी बनानी है तो टुकड़े छोटे रखे जा सकते हैं।
अब इसमें डालने के लिए तीन चीजें जरूरी हैं- एक, पिसी हुई राई, दूसरी, लहसुन और तीसरी, खटाई। जो लोग लहसुन-प्याज से परहेज करते हैं, वे लहसुन को छोड़ भी सकते हैं। पर राई और खटाई जरूरी है। जमीकंद के टुकड़ों को पहले थोड़ी देर के लिए तेल में भून लें। चाहें तो पकौड़ों की तरह थोड़ी देर के लिए तल भी सकते हैं। फिर इसकी ग्रेवी तैयार करें। अगर आपको लहसुन-प्याज-टमाटर की ग्रेवी पसंद है, तो वह तैयार करें। लहसुन प्याज से परहेज है तो दही या नारियल की ग्रेवी भी बना सकते हैं। कच्चे नारियल के साथ जमीकंद की तरकारी बहुत अच्छी बनती है। ग्रेवी तैयार करते समय सब्जी मसाला, लाल मिर्च पाउडर, नमक वगैरह के साथ पिसी हुई राई और खटाई- अमचूर, अनारदाना पाउडर या फिर इमली का घोल- डालना न भूलें। जब ग्रेवी गाढ़ी होने लगे तो उसमें जिमीकंद के तले हुए टुकड़े डाल कर उबाल आने तक पकाएं। फिर इसके ऊपर धनिया पत्ता, हरी मिर्च और अदरक के बारीक कटे लच्छे डाल कर परोसें।
अगर जिमीकंद की सूखी तरकारी बनानी है तो कड़ाही में थोड़ा-सा तेल गरम करें, फिर जीरा, साबुत धनिया, मेथी दाना, हींग और सौंफ का तड़का लगाएं। अपने स्वाद के मुताबिक तड़के में कुछ और मसालों का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। फिर उसमें उबले हुए या फिर रात भर खटाई में भिगोए हुए जिमीकंद के टुकड़ों को डालें और धीमी आंच पर पकने दें। चाहें तो थोड़ा-सा पानी भी डाल सकते हैं, ताकि जिमीकंद जल्दी और अच्छी तरह पक जाए। जब जिमीकंद पक कर नरम हो जाए तो उसमें सब्जी मसाला, हल्दी पाउडर, कुटा हुआ लहसुन-अदरक, एक बड़ा चम्मच अमचूर और पिसी हुई राई डाल कर मिला लें और कड़ाही को ढंक कर पांच मिनट के लिए पकने दें। अब जिमीकंद की तरकारी तैयार है। इस पर धनिया पत्ता, अदरक और हरी मिर्च के लच्छे डाल कर गरमागरम परोसें।

