मानस मनोहर
पूरनपोली देश के विभिन्न हिस्सों में पसंद की जाती है और इसे अलग-अलग ढंग से बनाया जाता है। इसे मुख्य रूप से दो तरह से बनाया जाता है- नमकीन और मीठा। महाराष्ट्र में पूरनपोली मीठी बनती है, जबकि उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्यप्रदेश में नमकीन। दोनों के अपने स्वाद हैं, बनाने का ढंग थोड़ा भिन्न जरूर है। नमकीन पूरनपोली को दाल परांठा भी कहते हैं। बिहार और उत्तर प्रदेश में इसे पूड़ी की तरह तल कर भी बनाया जाता है, इसलिए वहां इसे पूरन पूड़ी भी कहते हैं।
पूरन
पूरनपोली, पूरन पूड़ी या दाल परांठा में जो भरावन डाला जाता है, उसे पूरन कहते हैं। यह पूरन चने की दाल से बनाया जाता है। पूरन तैयार करने के लिए चने की दाल को पहले दो-तीन घंटे के लिए पानी में भिगो कर रख दिया जाता है। फिर उसे नरम होने तक कुकर या किसी बर्तन में उबाल लिया जाता है। इसमें ध्यान रखना होता है कि दाल गलने न पाए। बस नरम हो जाए। फिर उसे छान कर ठंडा करते हैं और मिक्सी में या सिलबट्टे पर पीस लिया जाता है। इसे रोटी बनाने वाली चौकी पर रख कर बेलन से दबा कर भी पीसा जा सकता है।
पूरनपोली
मीठी पूरनपोली बनाने के लिए गुड़ की जरूरत होती है। ढाई सौ ग्राम दाल में करीब डेढ़ सौ ग्राम गुड़ लेना चाहिए। चाहें तो आधा गुड़ और आधा चीनी की मात्रा रख सकते हैं। गुड़ को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ लेना चाहिए। फिर चना दाल से तैयार पूरन और गुड़ को कड़ाही या नॉनस्टिक पैन में डाल कर हल्की आंच पर मिलाते हुए तब तक पकाते हैं, जब तक कि पूरन और गुड़ आपस में मिल न जाएं। ध्यान रखें कि पकाते समय पूरन कड़ाही में न चिपके। इस भरावन को अलग बर्तन में निकाल कर ठंडा होने दें।
अब आटा तैयार करें। जितना आपने चना लिया है, करीब उतना ही मैदा लें। उसमें दो-तीन चम्मच घी डालें और थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए अच्छी तरह गूंथ लें। ध्यान रहे, आटा कड़ा न हो, नरम रहे। गूंथे हुए आटे को आधे घंटे तक ढंक कर रख दें, ताकि वह ठीक से सेट हो जाए। यह सब तैयार हो जाए तो आटे की छोटी-छोटी लोइयां बनाएं। आटे के आकार के बराबर ही पूरन की लोइयां भी बनाएं। आटे में पूरन भर लें, जैसे परांठे के लिए आलू या दूसरी चीजें भरते हैं। फिर इसे हल्के हाथों से पतला-पतला बेल लें। बेलते समय ज्यादा दबाव न डालें, नहीं तो पूरनपोली फट जाएगी। अब इसे मध्यम आंच पर घी लगाते हुए पलट-पलट कर सुनहरा होने तक सेंक लें। पूरनपोली तैयार है। इसे दो दिन तक खाया जा सकता है। खासकर बच्चों को पूरनपोली बहुत पसंद आती है।
नमकीन पूरनपूड़ी
पूरन को नमकीन बनाने के लिए इसमें गुड़ के बजाय नमक और कुछ मसालों का उपयोग किया जाता है। परांठे में भरावन के लिए एक मध्यम आकार का प्याज, लहसुन की तीन-चार कलियां, कुछ हरी मिर्चें, हरा धनिया पत्ता और अदरक बारीक काट लें। इसे पूरन में डालें और ऊपर से जरूरत भर का नमक, आधा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर और आधा चम्मच अजवाइन तथा उतनी ही मात्रा में सौंफ के दाने डाल कर पूरन में ठीक से मिला लें। अगर पूड़ी बनानी है तो पूरन में प्याज, लहसुन, धनिया, अदरक न मिलाएं। सिर्फ सूखे मसाले डालें। इसे मीठी पूरनपोली के भरावन की तरह पकाने की जरूरत नहीं। पूरन पूड़ी या परांठा बनाने के लिए मैदे के बजाय गेहूं के सामान्य आटे का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
मीठी पूरनपोली की तरह ही आटे में पूरन भरें और हल्के हाथों से बेल लें। ध्यान रहे, बेलते समय आटा फटे नहीं। इसे मीठी पूरनपोली की तरह पतला बेलने की जरूरत नहीं होती, थोड़ी मोटी भी रहे, तो हर्ज नहीं। अगर परांठा बनाना है तो तवे पर घी लगाते हुए पलट-पलट कर सुनहरा होने तक पका लें। इसे दही, अचार और चटनी के साथ गरमागरम खाना अच्छा लगता है। अगर इसे पूड़ी की तरह पकाना है, तो लोइयों को इस तरह बेलें कि आटा कहीं से भी फटने न पाए, नहीं तो उसमें तेल अंदर जाएगा और पूड़ी का सारा मजा किरकिरा हो जाएगा। कड़ाही में तेल गरम करें और पूड़ियों को तल लें। पूरन पूड़ी तैयार है। उत्तर प्रदेश और बिहार में शादी-विवाह जैसे शुभ अवसरों पर पूरन पूड़ी पकाना रस्म की तरह है। जब बहू घर आती है, तो उसे पूरन-पूड़ी खाने को दी जाती है। इसे भी बासी खाया जा सकता है।
टमाटर-लहसुन की चटनी
चटनी तो कई तरह की बनती हैं, पर पूरन पूड़ी या दाल परांठे के साथ टमाटर-लहसुन की चटनी का स्वाद अलग ही होता है।टमाटर लहसुन की चटनी बनाने में ज्यादा मशक्कत भी नहीं करनी पड़ती। दो-तीन मध्यम आकार के टमाटर, दस-बारह लहसुन की कलियां और तीन-चार हरी मिर्चें लें। इन सबको मिक्सर में डालें। ऊपर से नमक, थोड़ा साबुत जीरा, थोड़ा सौंफ डालें और पीस लें। झटपट चटनी तैयार है। इसे गरमागरम दाल परांठे या पूरन पूड़ी के साथ खाएं, इसका स्वाद भूल नहीं पाएंगे। १
