हरीश निगम
होली के दिन
होली के दिन
बिल्ली मौसी
मुझे नहीं दौड़ाओ।
मैं चूहा अदना सा प्राणी
कहां आप विदुषी विज्ञानी
मुझको खा के
अपना ऊंचा
रुतबा नहीं घटाओ।
रंग अबीर और पिचकारी
होली की पूरी तैयारी
मै तुमको
थोड़ा सा रंग दूं
तुम मुझको नहलाओ।
भालू नाचा, मैं भी गाऊं
तुम भी छेड़ो म्यांऊं म्याऊं
मैं तो
पूंछ नचा कर झूमूं
तुम आंखें मटकाओ।
कोयल ने आवाज लगाई
होली है कुछ चले मिठाई
नौ सौ चूहे
खा के मौसी
अब तो हज को जाओ।
शब्द-भेद
रव / रब
आवाज, शब्द, शोर-शराबे को रव कहते हैं। खासकर जब बहुत सारे पंछी बोल रहे हों और उनकी आवाजें मिल कर एक शोर का रूप ले ले तो उसे रव कहते हैं। जबकि अरबी में ईश्वर या परमेश्वर को रब कहते हैं।
पीड़ा / पीढ़ा
तकलीफ, दर्द को पीड़ा कहते हैं। जबकि पीढ़ा लकड़ी का बना एक प्रकार का बैठने आसन होता है। खासकर बहुत सारी जगहों पर शादियों में दूल्हा-दुल्हन को पीढ़े पर बिठा कर विवाह संपन्न कराया जाता है।
