कविता
मुकेश
बदला मौसम
फूलों के रंगों वाला
तितली के पंखों वाला
ठंडी-सी पुरवाई वाला
प्यारी-सी मुस्कान वाला
वापस आया मौसम प्यारा।
चले गए थे तुम बहुत दूर
या लगाया लंबा टूर?
दुनिया भर से ढेरों रंग
लेकर आया अपने संग।
गरम स्वेटर शॉल रजाई
भाग गए हैं अब सब दूर
रंग-बिरंगे पतले हल्के
कपड़ों पर छाया फिर से नूर।
स्विमिंग पूल पर होगी मस्ती
पानी भरने गई अब सुस्ती
रौनक होगी तालाबों पर
और भाग-दौड़ मैदानों पर।
फूलों के रंगों वाला
तितली के पंखों वाला
ठंडी-सी पुरवाई वाला
प्यारी-सी मुस्कान वाला
वापस आया मौसम प्यारा।
शब्द-भेद
कुछ शब्द एक जैसे लगते हैं। इस तरह उन्हें लिखने में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। इससे बचने के लिए आइए उनके अर्थ जानते हुए उनका अंतर समझते हैं।
जंग/जंग
जंग (स्त्री.) : युद्ध -पानीपत की जंग सबको याद होगी।
जंग (पुं.) : धातु का मैल – लोहे पर लगा जंग छुड़ाओ।
सिद्धिदात्री/सिद्धिदातृ
सिद्धिदातृ (पुं.)
गणेश – सिद्धि देने वाला।
सिद्धिदात्री (स्त्री.)
दुर्गा का एक नाम – सिद्धि देने वाली।
पास/प्यास
पास- मेरे पास आओ।
प्यास- पानी देखते ही प्यास लगी।
