शादाब आलम
सिल-बट्टा
पत्थर की है काया, हमको
कहते हैं सिल-बट्टा।
बड़े मजे से पीसा करतीं
मम्मी रोज मसाला
बनता है फिर खाना सचमुच
खूब जायके वाला।
घर आंगन में हो जाती है
खुशबू अहा! इकट्ठा।
धनिया, मिरचा, लहसुन, अदरख
अमियां और टमाटर
तरह-तरह की चटनी देते
हैं हम तुम्हें बना कर।
इमली की चटनी का ‘फ्लेवर’
कुछ मीठा कुछ खट्टा।
दादी कहतीं- ‘हाथों-कंधों
को मजबूत बनाओ
स्वाद चाहिए भोजन में तो
‘मिक्सर’ नहीं चलाओ।
हो जो सेहत-स्वाद तभी है
हंसी-तमाशा, ठट्ठा।’
शब्द-भेद
कुछ शब्द एक जैसे लगते हैं। इस तरह उन्हें लिखने में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। इससे बचने के लिए आइए उनके अर्थ जानते हुए उनका अंतर समझते हैं।
गृह/ग्रह
घर का पर्यायवाची है गृह। इसी से गृहस्थ, गृहस्थी आदि शब्द बने हैं। गृहप्रवेश के आयोजनों में तो आप भी शामिल हुए होंगे। जबकि सूर्य की परिक्रमा करने वाले पिंडों को ग्रह कहते हैं जैसे पृथ्वी, बुध, शुक्र आदि। ग्रह अच्छे नहीं चल रहे जैसे पद भी इसी से बने हैं।
सूप/ सूफ
तिनकों से बनी एक प्रकार की घरेलू वस्तु जिससे फटक कर अनाज की गर्द निकाली जाती है, उसे सूप कहते हैं। अंग्रेजी में सूप दाल या सब्जियों आदि को उबाल कर तैयार किए गए पेय पदार्थ को कहते हैं। जबकि सूफ का अर्थ होता है ऊन। सूफी शब्द इसी से बना है- जो ऊन का झिंगोला पहन कर निकलता है।
