गुडवीन मसीह
अचानक मोेहन के पापा का तबादला हो जाने के कारण उसे बीच सत्र में ही अपना स्कूल छोड़कर अपने मम्मी-पापा के साथ बरेली आना पड़ा। उसके पापा ने काफी भाग-दौड़ करके उसका नाम बरेली के एक स्कूल में लिखा दिया। नया स्कूल और नए सहपाठियों से मिल कर मोहन बहुत खुश था। पर उसकी समझ में यह नहीं आ रहा था कि राहुल कक्षा में सबसे अलग क्यों रहता है? कक्षा का कोई भी लड़का उससे बात नहीं करता? एक दिन मोेहन ने यह बात दीपक से पूछी। दीपक ने बताया कि राहुल शरारती और झगड़ालू है। बात-बेबात किसी से भी झगड़ जाता है। वह अक्सर कक्षा में शैतानी करता है और अगर कोई लड़का शिक्षक से उसकी शिकायत करता है तो वह स्कूल के बाहर अपने दोस्तों के साथ उसकी पिटाई कर देता है। बस इसीलिए उससे सब उससे डरते हैं और उससे अलग रहते हैं। यह तो गलत बात है, ‘अगर इस तरह राहुल की शैतानियों पर परदा पड़ता रहा तो उसकी शैतानियां और बढ़ जाएंगी, जिसका असर उसकी पढ़ाई पर भी पड़ेगा। इसलिए राहुल को उसकी गलती का अहसास तो कराना होगा।’ मोेहन ने सोचा। एक दिन अंग्रेजी के खाली पीरियड में राहुल अपनी गेंद से खेल रहा था कि अचानक गेंद अलमारी के शीशे पर जा लगी और वह टूट गया। राहुल ने टूटा हुआ कांच उठाकर बाहर फेंक दिया और चुपचाप अपनी सीट पर आ कर गया।
अगला पीरियड गुप्ता सर का था। उन्होंने जानना चाहा कि यह यह शीशा किसने तोड़ा?
एक-एक करके सब खड़े हो गए, पर मोेहन खड़ा नहीं हुआ।
‘मोेहन, तुम कैसे बैठे हो, खड़े क्यों नहीं होते?’ गुप्ता सर ने कहा।
‘यह क्या बात हुई सर ? गलती कोई एक करे और सजा पूरी कक्षा भुगते ?’ मोेहन ने कहा।
‘ मतलब?’
‘सर, अलमारी का शीशा राहुल से टूटा है इसलिए सजा भी राहुल को मिलनी चाहिए।’
मोहन के बताते ही गुप्ता सर ने कक्षा के सभी लड़कों को बैठा दिया मगर राहुल को खड़ा रखा, साथ ही उन्होंने अलमारी में नया शीशा लगवाने के लिए राहुल की डायरी में उसके मम्मी-पापा के लिए एक नोट भी लिखा।
उस समय तो राहुल चुपचाप खड़ा रहा, लेकिन छुट्टी होते ही उसने अपने दोस्तों के साथ मोेहन को घेर लिया और फिल्मी स्टाइल में आस्तीन ऊपर चढ़ाकर बोला, ‘बेटा, मुझे तो जो सजा मिलनी थी वह मिल गई, अब तू सोच, तेरा क्या होगा?’
‘राहुल, तुम मुझे गलत समझ रहे हो। मैंने तुम्हारी शिकायत सजा दिलवाने के उद्देश्य से नहीं की थी, बल्कि इसलिए की थी ताकि तुम सुधर जाओ।’ मोेहन ने उसे समझाते हुए कहा। राहुल के ऊपर मोेहन की बात का कोई असर नहीं हुआ। वह अपने दोस्तों के साथ मोेहन पर टूट पड़ा और उसके ऊपर लात-घूसों की बौछार कर दी। मोेहन को पिटते देख उसकी कक्षा के लड़कों ने स्कूल के प्रधानाचार्य को जाकर बताया कि राहुल, मोहन को मार रहा है।
प्रधानाचार्य को देखते ही राहुल के दोस्त वहां से भाग गए, पर राहुल नहीं भाग पाया। प्रधानाचार्य ने उसे पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया और मोहन को अस्पताल भिजवा दिया, क्योंकि मोेहन मार खाकर बेहोश हो गया था।
होश में आते ही मोेहन वॉर्ड में मौजूद अपने मम्मी-पापा, प्रधानाचार्य और पुलिस इंस्पेक्टर को देखकर समझ गया कि बात बहुत बिगड़ गई है। अब क्या होगा ? अगर राहुल को जेल हो गई तो उसका भविष्य खराब हो जाएगा? उसके मम्मी-पापा ने उसके लिए जो सपने देखें हैं, वे भी टूट जाएंगे। इसलिए, मुझे ही किसी तरह राहुल को बचाना होगा।’ मोेहन ने अपने मन में कहा।
‘मोेहन बेटा, अब कैसा महसूस कर रहे हो?’ उसे खामोश देखकर प्रधानाचार्य ने कहा।
‘सर, मैं तो अच्छा हूं, पर राहुल कैसा है? उसको ज्यादा चोट तो नहीं आई?’
राहुल, तो पुलिस थाने में है।’ प्रधानाचार्य ने कहा।
‘क्यों ?’
‘क्योंकि उसने अपने दोस्तों के साथ तुम पर जानलेवा हमला किया था।’ इंस्पेक्टर ने बताया।
‘यह आपसे किसने कहा कि राहुल ने मुझे मारा?’
‘तुम्हारे प्रधानाचार्य ने हमें फोन पर बताया था तभी हमने राहुल को पकड़ कर थाने में बंद कर दिया।’
‘सर, राहुल ने मुझे नहीं मारा, मुझे तो बाहर के कुछ लड़कों ने किसी और के धोखे में आकर पड़क लिया और मारने लगे। राहुल तो मुझे उन लड़कों से बचा रहा था।’
‘यह तुम क्या कह रहे हो मोेहन?’ मोेहन के मम्मी-पापा बोले।
‘मैं सच कह रहा हूं मम्मी। माना कि राहुल शरारती है। वह स्कूल में शैतानी करता है। पर वह मेरा बहुत अच्छा होस्त है। उसने तो मुझे उन लड़कों से बचाने की बहुत कोशिश की, पर वह उनसे अकेले मुकाबला नहीं कर पाया, क्योंकि व चार-पांच थे।’
‘ओह, फिर तो वाकई हमसे बहुत बड़ी भूल हो गई। इंस्पेक्टर साहब, हमारी वजह से आपको जो परेशानी हुई उसके लिए हम क्षमा चाहते हैं।’ प्रधानाचार्य ने कहा।
‘कोई बात नहीं सर। मैं थाने जाकर राहुल को छोड़ देता हूं।’ कहकर इंस्पेक्टर वहां से चला गया।
‘सर, अब तो आप राहुल को स्कूल से नहीं निकालेंगे?’
‘नहीं मोेहन, तुम्हारा दोस्त राहुल, तुम्हारे ही साथ पढ़ेगा।’
प्रधानाचार्य की बात समाप्त ही हुई थी कि राहुल अपने मम्मी-पापा के साथ वहां आ गया और मोेहन से बोला, ‘मुझे माफ कर दो मोेहन। मैंने तुम्हारे ऊपर जानलेवा हमला किया, फिर भी तुमने मुझे जेल जाने से बचा लिया। अब मैं आइंदा कभी किसी से नहीं लड़ंूगा और अपना सारा ध्यान पढ़ाई की तरफ लगाऊंगा।’ ०
