तों में होने वाले छोटे सूराख, जो दंतक्षय या दांतों की सड़न के कारण होते हैं, उन्हें कैविटी कहते हैं। यह भोजन में आवश्यक खनिजों की कमी, दांतों की स्वच्छता में कमी और दांतों की सतह पर बैक्टीरिया और प्लाक बनने के परिणामस्वरूप होती है। बच्चों में कैविटी की समस्या अधिक देखी जाती हैं, क्योंकि वे प्राय: दांतों की सफाई पर उचित ध्यान नहीं देते, खान-पान में असावधानी बरतते हैं, मीठा बहुत खाते हैं। अक्सर लोग समझते हैं कि बच्चों के दूध के दांत में सड़न पैदा हो भी जाए, तो चिंता की बात नहीं, क्योंकि वे गिर जाएंगे और नए दांत निकलेंगे तो वे स्वस्थ होंगे। मगर यह भ्रम है। दांतों में एक बार सड़न पैदा हो गई, तो वह बाद में आने वाले दांतों को भी प्रभावित कर सकती है। इसलिए कम उम्र से ही बच्चों के दांतों की देखभाल जरूरी होती है।
ध्यान दें
बच्चों के दांतों को लेकर कुछ सामान्य सावधानियां बरतें, कैविटी और पायरिया जैसी समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है।
कैविटी के चिह्न और लक्षणों को समझें : यह बहुत जरूरी है कि जितना जल्दी हो सके कैविटी के चिह्न और लक्षणों को पहचान लिया जाए। इस प्रकार आप इनका उपचार शुरू करने के लिए तैयार हो सकते हैं और इन्हें समय के साथ और बढ़ने और पीड़ादायक बनने से सुरक्षित कर सकते हैं। अगर बच्चे को निम्नलिखित में से एक या उससे ज्यादा लक्षण अनुभव हो तो वह कैविटी हो सकती है:
’ दांत दर्द होना। जब बच्चा ठंडा, मीठा या गरम खाद्य पदार्थ खाता है तो उसे हल्का या तेज दर्द होता है।
’ जब वह दांतों से काटता है तो दर्द होता है।
’ उसके दांतों पर गहरे रंग का छेद नजर आता है।
डेंटिस्ट के पास जाएं: आमतौर पर लोग बच्चों को तभी दांतों के डॉक्टर के पास ले जाते हैं, जब उनकी तकलीफ बढ़ जाती है। इस प्रवृत्ति की वजह से भी बच्चों के दांतों में होने वाली समस्याओं का समय रहते निराकरण नहीं हो पाता। बच्चों के मुख की जांच के लिए साल में एक या दो बार डेंटिस्ट के पास जरूर ले जाना चाहिए। अगर लगता है कि बच्चे को कैविटी है, तो जल्दी से जल्दी डेंटिस्ट के पास ले जाएं।
घरेलू नुस्खे
च्चों के दांतों में अगर समस्या है तो उनसे कुछ घरेलू उपायों के जरिए भी पार पाया जा सकता है।
’ अगर बच्चे के दांतों में तकलीफ है, तो उसे शक्कर युक्त पेय न पीने दें।
’ उसे किशमिश और चीज खाने को दें, उससे कैविटी रोकने में मदद मिलती है।
’ लौंग कैविटी के साथ-साथ किसी भी प्रकार की दांतों से जुड़ी समस्याओं के लिए रामबाण होता है। एंटी-इन्फ्लेमेंटरी, एनाल्जेसिक और एंटी-बैक्टीरियल गुणों के कारण लौंग दर्द को कम करने और कैविटी को फैलने से रोकता है। समस्या होने पर चौथाई चम्मच तिल के तेल में दो से तीन बूंदें लौंग का तेल मिला लें। इस मिश्रण को रात को सोने से पहले रूई के फाहे में लेकर प्रभावित दांत में लगाएं। आराम मिलेगा।
’ नमक में मौजूद एंटीसेप्टिक और एंटीबायोटिक गुणों के कारण यह कैविटी के इलाज में कारगर होता है। यह दर्द और सूजन को कम करने, किसी भी प्रकार के संक्रमण और मुंह में बैक्टीरिया की वृद्धि को रोकने में मदद करता है। इसके लिए एक चम्मच नमक को गरम पानी में मिला लें और उससे बच्चे को कुल्ला कराएं। समस्या के दूर होने तक इस उपाय को दिन में तीन बार करें।
’ आॅयल पुलिंग बहुत पुराना नुस्खा है, जो कैविटी को कम करने के साथ-साथ मसूढ़ों से खून बहना और सांस की बदबू को भी दूर करता है।
साथ ही यह दांत संबंधी समस्याओं के विभिन्न प्रकारों के लिए जिम्मेदार हानिकारक बैक्टीरिया को मुंह से साफ करने में मदद करता है। इसके लिए एक चम्मच तिल का तेल बच्चे के मुंह में रखें। बीस मिनट तक मुंह में रखने के बाद थुकवा दें। इसे निगलने से बचें। फिर मुंह को गुनगुने पानी से धुलाएं। अधिक लाभ पाने के लिए नमक के पानी का प्रयोग करें। फिर ब्रश कराएं। इस उपाय को रोजाना सुबह खाली पेट कराएं। यह उपाय सूरजमुखी या नारियल के तेल के साथ भी किया जा सकता है।
’ आयुर्वेद में हल्दी को कैविटी दर्द से राहत प्रदान करने के लिए प्रयोग किया जाता है। इसमें मौजूद एंटी-बैक्टीरियल गुणों के साथ एंटी-इंफ्लेमेंटरी गुण मसूढ़ों को स्वस्थ रखने के साथ बैक्टीरियल संक्रमण के कारण दांतों के गिरने की समस्या को भी रोकता है। बच्चे के प्रभावित दांत पर थोड़ा-सा हल्दी पाउडर लगा कर इसे कुछ मिनटों के लिए छोड़ दें। फिर गुनगुने पानी से अच्छे से कुल्ला कराएं। १

