रेनू दत्त
उदारीकरण के दौर में बाजार तेजी से फैल रहा है। सेवाओं का दायरा विस्तृत हो रहा है। नए-नए तरीके ईजाद हो रहे हैं, वस्तुओं और सेवाओं को पहुंचाने के। ऐसे में महिलाओं को एक नया आकाश मिला है। अब वे सिर्फ घर की चारदीवारी में सिमट कर नहीं रह गई हैं और न किसी नौकरी की मोहताज। वे अपनी मेहनत, लगन और नवोन्मेषी प्रतिभा के बल पर न सिर्फ आर्थिक स्वावलंबन के रास्ते तलाश रही हैं, बल्कि सामाजिक विकास में भी योगदान कर रही हैं। अब तकनीक का सबसे ज्यादा फायदा महिलाएं उठा रही हैं। उनके लिए काम करना आसान हो गया है। अब वे नौकरी के बजाय कारोबार करने के बारे में ज्यादा सोचती हैं। कारोबार में भी अब उनके सामने कई तरह के विकल्प मौजूद हैं।
इंटरनेट ने आसान की जिंदगी
इंटरनेट के जरिए अब किसी काम या उपभोक्ता सामान का आर्डर लेना और देना काफी सुविधाजनक हो गया है। कूरियर सर्विस, स्पीड पोस्ट, पार्सल के माध्यम से सही समय पर सामान भिजवाना भी आसान है। आप घर बैठे इंटरनेट के जरिए जान सकते हैं कि आपका सामान किस समय पहुंचेगा, इसके लिए आपके पास पीओडी नंबर होना चाहिए। आप अपनी सुविधा और पैसे को ध्यान में रख कर कहीं से भी कुछ मंगा सकते हैं। जो काम पहले बड़ी-बड़ी कंपनियां किया करती थीं, वह अब स्टार्टअप यानी बिल्कुल नई शुरू हुई कंपनियां भी करने लगी हैं। सोसाइटी या मुहल्ले में रहने वाले लोग आसपास से ही सामान खरीदना पसंद करते हैं, फिर चाहे वह स्टेशनरी हो सूट-साड़ी हो, आर्टिफिशियल जूलरी हो या बच्चों के लिए कोई खिलौना ही क्यों न हो। क्योंकि अगर सामान में कोई कमी है तो यहां पर उसे वापस करना आसान है। मगर यह धारणा भी अब बदल रही है।
जूलरी का व्यवसाय करने वाली तरविंदर कौर कहती हैं कि मुझे इस व्यवसाय को करने के लिए फेस बुक, वाट्सएप ग्रुप, इंस्टाग्राम, आॅनलाइन शॉपिंग ग्रुप से बहुत फायदा हुआ। मैंने आसपास के शहरों और वहां की सोसाइटियों, होटलों में भी अपनी प्रदर्शनी लगाई। मेले में कभी मुझे उम्मीद से कई गुना फायदा हुआ तो कई बार उम्मीदों पर पानी फिर गया। मगर व्यवसाय में उतार-चढ़ाव तो आते रहते हैं, इसलिए वे हिम्मत नहीं हारतीं और नए हौसले को साथ नए ग्राहकों तक पहुंचने का प्रयास करती हैं। पुराने ग्राहकों से लगातार संपर्क बनाए रखती हैं।
कंपनियों का केंद्र हैं महिलाएं
कई कंपनियां महिलाओं को केंद्र में रख कर अपना व्यवसाय फैला-बढ़ा रही हैं। उनकी नजर ऐसी पढ़ी-लिखी स्मार्ट महिलाओं पर है, जो महत्त्वाकांक्षी हैं और घर से ही अपना कारोबार करना चाहती हैं। यह कारोबार चेन प्रणाली की तरह काम करता है। दवा, सौंदर्य प्रसाधन, साबुन-सर्फ, रसोई के उपकरण, सब घर-घर पहुंचाए जा रहे हैं। इसके लिए कंपनियां, वर्कशाप, सेमिनार, मीटिंग करती हैं। ओरी फ्लेम से जुड़ी रुचि कहती हैं, हम लोग नेटवर्किंग पर काम करते हैं। जैसे-जैसे काम बढ़ता जाता है, आपका कमीशन भी बढ़ता जाता है। शुरुआत में कमीशन तीन प्रतिशत होता है। अगर आपने मेहनत की तो यह कमीशन इक्कीस प्रतिशत तक मिल सकता है। मात्र चार हजार रुपए से आप इस काम को शुरू कर सकते हैं।
कौन हैं आगे
ऐसी पढ़ी-लिखी महिलाएं, जो घर परिवार की जिम्मेदारी के चलते नौकरी नहीं कर पा रही हैं, लेकिन जिनके अंदर कुछ करने की तमन्ना है, वे ऐसी कंपनियों से जुड़ रही हैं और अपनी प्रोफाइल से हट कर काम कर रही हैं। प्रोफाइल से अलग हट कर काम करना जहां चुनौतीपूर्ण होता है, वहीं यह आपके आत्मविश्वास को भी बढ़ाता है। डाक्टर, इंजीनियर या प्रशासनिक अधिकारी बनने की चाह रखने वाली महिलाएं ट््यूशन पढ़ा कर कई इंजीनियर, डॉक्टर और प्रशासनिक अधिकारी समाज को दे चुकी हैं। कला और संगीत की दुनिया की तरफ भी महिलाओं का आकर्षण बढ़ा है और इन क्षेत्रों के प्रति वे जागरूक हुई हैं। माता-पिता इन क्षेत्रों की तरफ बच्चों को प्रोत्साहित भी कर रहे हैं। छोटी-छोटी चीजों का मोल बढ़ा है। मसलन, लिखावट सुधारने के लिए भी माता-पिता बच्चों को ट्यूशन भेज रहे हैं, ताकि वे कैलीग्राफी यानी सुलेख सीख सकें। इसका फायदा महिलाएं उठा रही हैं। खुशी की बात है कि महिलाओं ने अपना कद बड़ा किया है। वे उदासीनता और अवसाद की शिकार नहीं हुर्इं। किसी एक करियर के भरोसे भी वे अब नहीं बैठी रहतीं। उन्होंने सही अर्थों में चुनौतियों को स्वीकार किया है।
अपने बल पर अपना व्यवसाय
अनेक महिलाएं कारीगरों के साथ मिल कर अपना फैशन हाउस बना रही हैं, जहां वे ग्राहक की रुचि और बजट को ध्यान में रखते हुए चीजें तैयार करती हैं। इन चीजों में आपका पहनावा, जूलरी, फुटवियर के अलावा आपके घर की साज-सज्जा का सामान भी शामिल है। उनकी नजर स्वाद पर भी है, क्योंकि सब जानते हैं कि सबका स्वाद अलग-अलग होता है। कुछ स्वाद में प्रयोग करना पसंद करते हैं, कुछ पारंपरिक खाना पसंद करते हैं। आहार विशेषज्ञ के तौर पर महिलाएं खुद की नई जमीन तैयार कर रही हैं। आजकल आहार व्यवसाय जोरों पर है। एक तरह से बाहर जाकर काम करने वाली महिलाओं के लिए वह काफी मददगार साबित हुआ है। डे केयर चलाने वाली महिलाओं ने भी ऐसी महिलाओं को सहयोग दिया है।
संचार माध्यमों का सहारा
महिलाएं अपनी पाककला के ज्ञान से लेकर संगीत और नृत्य को यूट्यूब के जरिए पेश कर रही हैं। ब्लॉग और वेबसाइट के जरिए अपनी पहचान बना रही हैं और इन सबका उपयोग वे स्वावलंबी बनने की दिशा में कर रही हैं। सोशल मीडिया का सही उपयोग उनके रास्ते खोल रहा है। समूह बना कर वे अपनी मजबूती दिखा रही हैं। अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए अपने लिए धन का प्रबंध भी वे खुद करती हैं। इसके लिए स्वयं सहायता समूह भी उनकी मदद करते हैं। वे किटी पार्टी और कमेटी के जरिए भी धन इकट्ठा करती हैं। स्टार्ट ग्रुप का प्रस्ताव पसंद आने पर सरकार भी उनकी मदद करती है। स्टार्टअप कंपनी को सरकार कर्ज देती है।
मुनाफे का सौदा
महिलाएं अपने बनाए सामान बेचने के लिए मेले में भी हिस्सा लेती हैं। मेले आयोजित करने का काम भी अधिकतर महिलाएं ही करती हैं, जहां सभी लोग एक साथ एकत्रित होते हैं। ये मेले समय-समय पर लगाए जाते हैं। मेले का उद्देश्य सामाजिक जागरूकता के साथ एकजुटता का संदेश देना भी है।
घर पर ही रह कर इवेंट मैनेजमेंट जैसे काम महिलाएं आसानी से कर रही हैं। इसमें बर्थडे, शादी, वर्कशॉप/ सेमिनार, उत्सव, मेले, कार्निवाल शामिल हैं।
कुल मिलाकर कहें तो महिलाओं ने अपने आप को हर सांचे में ढालने की कोशिश की है। यह संस्कार देकर ही बच्चियों को बड़ा किया जाता है। महिलाएं चाहें तो खुद को प्रोत्साहित कर सकती हैं। जैसे इंजीनियर नहीं बन पाए तो क्या हुआ, इंजानियर बनाने में सहायक तो हो सकती हैं। जिस काम का कोई प्रशिक्षण नहीं लिया, उसे खुुद सीखने का साहस तो जुटाया और फिर तेजी से काम किया जा सकता है। यही है महिलाओं की सफल जिंदगी का राज। कड़ी-दर-कड़ी चलते रहो, गले मिलते रहो। आपके कदम खुद बना देंगे रास्ता। १
