अक्सर लोग नहाने पर उचित ध्यान नहीं देते। कई लोग जल्दी-जल्दी नहा कर काम निपटाते हैं, तो कई देर तक नहाते रहते हैं। खासकर सर्दियों में नहाने को लेकर बहुत सारे लोगों को लापरवाही बरतते देखा जाता है। इसी तरह गरमी में कई बार नहाने की आदत भी कई लोगों को होती है। नहाते समय किस तरह के पानी का चुनाव करें, नहाते समय क्या-क्या सावधानियां बरतें, इसे लेकर आयुर्वेद में विस्तार से बताया गया है। पानी का चुनाव सुबह ठंडे पानी से नहाना अच्छा माना गया है। इससे आलस्य मिटता और अवसाद दूर होता है। इससे शरीर में बीटा एंडोर्फिन नामक रसायन बनने में मदद मिलती है, जो अवसाद दूर करने में मदद करता है। इससे शरीर और मन में ताजगी आती है। इसके अलावा टेस्टोस्टेरोन नामक रसायन उत्सर्जन में वृद्धि होती है, जो प्रजनन क्षमता में सुधार लाता है। इससे फेफड़ों की दशा में भी सुधार होता है। ठंडे पानी से स्नान व्यक्ति के शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है, जिससे संक्रामक रोगों से लड़ने में मदद मिलती है।

आयुर्वेद के अनुसार बुजुर्ग और युवा गरम पानी से नहाएं तो बेहतर रहता है, मगर विद्यार्थियों को सदा ठंडे पानी से स्नान करना चाहिए। जिन लोगों के शरीर की प्रकृति पित्त की है या पित्त संबंधी रोगों, जैसे लीवर या अपच की समस्या से परेशान हैं उनके लिए ठंडे पानी से नहाना फायदेमंद होता है। माना जाता है कि गरम पानी कीटाणुओं को तेजी से मारता है, इसलिए इससे नहाने से शरीर जल्दी साफ होता है। यह धारणा काफी हद तक ठीक भी है। गरम पानी से नहाने से मांसपेशियों को आराम मिलता है। शरीर की थकान दूर होती है। जिन लोगों को मधुमेह यानी शुगर की परेशानी है, उन्हें गरम पानी से नहाने पर आराम महसूस होता है। गरम पानी से नहाने से शुगर के खतरे भी कम होते हैं। इससे सर्दी-जुकाम में भी आराम मिलता है। आयुर्वेद में कहा गया है कि शरीर के लिए गरम पानी लाभकारी होता है। जिन लोगों के शरीर की प्रकृति कफ और वात की है या वात और कफ संबंधी रोगों से पीड़ित हैं उन्हें गरम पानी से ही स्नान करना चाहिए। मगर आयुर्वेद में आंखों और बालों के लिए इसका उपयोग वर्जित है। बालों और आंखों के लिए ठंडे पानी का ही इस्तेमाल करना चाहिए। मगर समस्या यह कि नहाते समय ज्यादातर लोगों के लिए ऐसा कर पाना संभव नहीं हो पाता। ऐसे में गुनगुना पानी सर्वोत्तम माना गया है। जो न अधिक गरम हो और न अधिक ठंडा।

कैसे नहायें

अक्सर सुबह स्कूल या दफ्तर भागने की जल्दी में लोग फटाफट नहा कर काम पूरा समझ लेते हैं। आयुर्वेद में कहा गया है कि जल्दबाजी में नहाना भी उसी प्रकार शरीर को नुकसान पहुंचाता है, जैसे जल्दबाजी में किया गया भोजन। इस तरह शरीर को नहाने के लाभ नहीं मिल पाते। जल्दी-जल्दी नहाने से एक तो शरीर की ठीक से सफाई नहीं हो पाती, जिससे जगह-जगह मैल जमा होता जाता है और फिर वह त्वचा संबंधी परेशानियां पैदा करता है। इसलिए धीरे-धीरे नहाएं, ताकि शरीर के हर हिस्से तक पानी पहुंचे और हर हिस्से को आप मल कर साफ कर सकें।

’ हमेशा नहाने का काम भोजन से पहले करना चाहिए। भोजन के बाद स्नान नहीं करना चाहिए। स्नान के बाद भूख बढ़ती और भोजन के पचने में मदद मिलती है। मगर भोजन के बाद स्नान करने से पाचन क्रिया मंद पड़ जाती है। इससे कमर के आसपास चर्बी बननी शुरू हो जाती है।
’ अगर आप ठंडे पानी से नहा रहे हैं तो शुरुआत सिर पर पानी डालने से करनी चाहिए। फिर पैरों तक पानी डालते हुए मलना चाहिए।
’ अगर गरम पानी से नहा रहे हैं तो शुरुआत पैरों की अंगुलियों पर पानी डालने और उन्हें धोने से करनी चाहिए। फिर सिर तक आना चाहिए।
’ नहाने से पहले सरसों या तिल के तेल की मालिश करें तो इससे मांसपेशियों को आराम मिलता और त्वचा में निखार आता है।
’ अगर बुखार है, तो कटि स्नान यानी कमर पर पानी डालते हुए स्नान करने से आराम मिलता है।
’ हालांकि स्नान करने में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए, मगर इसका मतलब यह भी नहीं कि बहुत देर तक नहाते रहना चाहिए। आजकल बाथटब का चलन बढ़ने से देर तक नहाने की आदत अक्सर लोगों में पाई जाती है। बाथटब में नहाना शरीर के लिए लाभदायक है, पर उसमें देर तक पड़े रहना नुकसानदेह भी साबित हो सकता है।
’ शरीर की बेहतर सफाई और थकान, तनाव मिटाने की दृष्टि से दिन में दो बार नहाना पर्याप्त रहता है।
’ नहाने में जहां तक हो सके प्राकृतिक गुणों से भरपूर साबुन, शैंपू आदि का इस्तेमाल करना चाहिए।
’ बालों की सफाई के लिए नहाने से कम से कम दस मिनट पहले शैंपू लगाएं और अंगुलियों को हल्का फिराते हुए खोपड़ी की मालिश करें। फिर धोएं।