सुरेश पंत
यह कल्पना ही असंभव है कि हमें किसी न किसी रूप में कभी किसी आज्ञा या आदेश का पालन न करना पड़ा हो। कभी तो इनमें अंतर करना कठिन हो जाता है कि यह जो कहा गया है, वह आदेश है या आज्ञा। और इस नासमझी का बड़ा अंतर पड़ सकता है। इन दोनों शब्दों में अंतर थोड़ा नाजुक अवश्य है, पर है बड़ा रोचक। आप आज्ञाकारी हैं या नहीं, यह तो आपको आज्ञा देने वाले जानें, पर आदेश देने वाले जानते हैं कि उनके आदेशों का अनुपालन न करना सहज नहीं है। आज्ञा की अनदेखी कोई कर सकता है, पर आदेश की अनदेखी के लिए उसे सौ बार सोचना पड़ सकता है। आज्ञा-पालन विवशता नहीं है, यह श्रद्धा और कर्तव्य की परिधि में आता है। हमारा-आपका कर्तव्य है बड़ों की आज्ञा मानना, पर न मानें तो यह बड़ों पर है कि वे उस अवहेलना को नैतिक मुद्दा बनाते हैं या नहीं। मगर आदेश के साथ यह विकल्प उपलब्ध नहीं है। किसी भी आदेश के पीछे आदेश देने वाले का पद, रुतबा या अधिकार होता है और होता है उसमें निहित भय, जो आपको आदेश का अनुपालन करने के लिए विवश करता है, आप आदेश से असहमत हों तो भी। इस प्रकार आदेश में औपचारिकता भी है और बाध्यता भी। सक्षम अधिकारी का आदेश आप न मानें तो आपको कारण बताओ नोटिस दिया जा सकता है, आपकी पेशी हो सकती है, आप दंड के अधिकारी हो सकते हैं और संभवत: आपके रोजगार पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
आज्ञा पालन में मानसिक संतोष हो सकता है, उसमें आपकी विनम्रता भी झलकती है, पर आदेश पालन में भी यह सब होता हो, आवश्यक नहीं। पैर पटकते, गर्दन झटकते, बुदबुदाते-भुनभुनाते हुए भी आप आदेश का पालन करते हैं। बॉस, अधिकारी, मंत्री आदेश देते हैं। राष्ट्रपति का आदेश तो ‘अध्यादेश’ हो जाता है, जिसे राजा-प्रजा, कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका- सभी मानते हैं। लोकतंत्र के नाम पर नेता लोग ‘जनादेश’ पाने गली-गली घूमते हैं। यह बात और है कि उस आदेश को पा जाने के बाद उसका पालन करना वे जरूरी नहीं समझते। कहते हैं एक जमाने में पति की बात भी ‘आदेश’ ही मानी जाती थी (!) ज्योतिष शास्त्र में ‘आदेश’ धरती छोड़ कर आकाश की बात करने लगता है। वहां इसका अर्थ किसी आकाशीय पिंड ग्रह, नक्षत्र, राशि या इनकी परस्पर स्थिति का फल या भविष्य कथन हो जाता है। व्याकरण में ‘आदेश’ किसी एक ध्वनि या अक्षर के स्थान पर दूसरी ध्वनि या अक्षर के आ जाने की व्यवस्था है। जोगियों के कुछ संप्रदायों में ‘आदेश’ अभिवादन सूचक के रूप में प्रयुक्त होता है। अधिकतर शाबर मंत्रों में भी यह ‘आदेश’ पिरोया हुआ मिलता है।
यह ‘आज्ञा’ शब्द विनम्र भाव से अनुमति चाहने के अर्थ में भी प्रयुक्त होता है। जैसे:
‘मुझे आज्ञा दीजिए, मैं अब घर जाना चाहता हूं।’
‘आज्ञा हो तो निवेदन करना चाहूंगा।’
आज्ञा के लिए अरबी मूल का ‘हुक्म’ शब्द भी हिंदी में प्रचलित है। यह हुक्म आज्ञा, आदेश के अतिरिक्त शासन, प्रशासन, राजकाज आदि के अर्थ में भी चलता है। जैसे :
सेनापति ने हमला करने का हुक्म दिया। (आदेश)
राजा देवजू का हुक्म चलता है यहां। (शासन)
मुझ पर हुक्म चलाने की कोशिश मत करो। (रोब गांठना)
‘आप कर पाएंगे?’ ‘जी, हुकम कीजिए।’ (मानने की आतुरता)
‘बात सुनो।’ ‘जी हुकम।’ (सम्मानभरी स्वीकृति, हुंकारा)
‘हुकम / हुकुम’ का यह आदर भरा प्रयोग राजस्थान में अधिक देखा जाता है। हुक्म से बने कुछ मुहावरे बहुत चलते हैं : कोई हुक्म बजा लाता है, कोई हुक्म की तामील करता है। कुछ लोग बैठे-बैठे हुक्म चलाते रहते हैं और कुछ किसी का हुक्म न मानते हैं, न चलने देते हैं!
निर्देश-निदेश
निर्देश में आज्ञा या आदेश जैसी बाध्यता तो नहीं, व्यापकता अवश्य है। व्यापक रूप से और सामान्यत: ये हितैषी ही होते हैं। जैसे डॉक्टर रोगी को निर्देश देता है या शिक्षक छात्रों को प्रश्नपत्र हल करने के बारे में निर्देश देते हैं।
दरअसल, ‘निर्देश संदेशवाहन की एक प्रक्रिया है, जिसमें प्रेषित संदेश को विश्वास के साथ ग्रहण कर लिया जाता है।’ आदेश में यह विशेषता होना जरूरी नहीं। निर्देश का प्रयोग प्राय: सूचना देना, बताना, मार्ग दिखाना आदि है। जैसे :
सभी प्रश्न हल करने हैं। (सूचना)
आप नहीं होंगे तो हमारा निर्देशन कौन करेगा? (मार्ग दर्शन)
निर्दिष्ट (निर्देश किए हुए) अनुच्छेद में स्पष्ट लिखा है। (बताए हुए)
प्रबंधन में भी आदेश और निर्देश को भिन्न माना गया है और दोनों की एकात्मता पर बल दिया जाता है। प्रबंधन की भाषा में कुशलतापूर्वक कार्य संपादन के लिए सक्षम अधिकारी और अधीनस्थ के बीच सीधा संवाद आदेश है, जबकि सामान उद्देश्य के लिए काम कर रहे समूह के लिए संप्रेषित संवाद निर्देश है।
निर्देश और निर्देशन में भी सूक्ष्म अंतर है। किसी महत्त्वपूर्ण काम, योजना, नवीन सृजन आदि के लिए विशेष संकेत देने का कार्य है निर्देशन। यानी किसी शोध कार्य, योजना, संगीत रचना, फिल्म निर्माण, नाट्य प्रस्तुति आदि में शोधार्थियों, कार्मिकों, कलाकारों आदि का विशष मार्गदर्शन। जैसे : ‘पद्मावती’ का निर्देशन संजय लीला भंसाली द्वारा किया गया है। (नाटक, फिल्म, संगीत-कार्यक्रम आदि में डायरेक्शन)
तुलनात्मक व्याकरण पर मेरे शोधकार्य का निर्देशन प्रो. दिलीप कर रहे हैं। (मार्गदर्शन)
बांध का निर्माण कार्य एक कुशल अभियंता के निर्देशन में हो रहा है। (देखरेख)
इसी निर्देशन से बना शब्द है ‘निर्देशक’, यानी जो निर्देशन का काम संपादित करे।
अच्छे निर्देशकों में श्याम बेनेगल का नाम सर्वोपरि है।
‘सूरज का सातवां घोड़ा’ का निर्देशक कौन था?
ध्यान में रखने की बात यह है कि यह ‘निर्देशक’ शब्द ‘निदेशक’ से भिन्न है। विशिष्ट प्रशासनिक कार्य के संदर्भ में इसका प्रयोग होता है। यद्यपि ‘निर्देशक’ और ‘निदेशक’ दोनों को अंग्रेजी के ‘डायरेक्टर’ के लिए प्रयुक्त किया जाता है, फिर भी निदेशक एक पूरे महकमे ‘निदेशालय’ का प्रमुख होता है, जो संयुक्त निदेशक, उपनिदेशक, सहायक निदेशक आदि कर्मियों से सज्जित होता है।
यह हम देख ही चुके हैं कि निर्देशक ‘गाइड’ भी होता है, जिसका प्रयोग प्राय: पुल्लिंग में होता है। इससे जब निर्देशिकाएं ‘गाइडें’ बनती हैं तो इसका अर्थ ‘कुंजिकाओं’ से होता है, जो परीक्षा में पास कराने का आश्वासन देती हैं। यानी बाजारू नोट्स जो परीक्षों के मौसम में गरम केकों की तरह बिकते हैं। ०
