कहते हैं कि अगर आप अपनी गाड़ी का खयाल रखेंगे, तो वह भी आपका खयाल रखेगी। बरसात में गाड़ी की देखभाल की जरूरत अन्य मौसमों की अपेक्षा अधिक होती है, क्योंकि इस मौसम में नमी, ऊमस, बारिश की वजह से गाड़ी के पुर्जों में खराबी आने का खतरा अधिक रहता है। इसी तरह गाड़ी चलाते समय भी इस मौसम में विशेष सावधानी की जरूरत होती है। बरसात में गाड़ी के रखरखाव और संचालन को लेकर पेश हैं रवि डे के सुझाव।
बरसात का मौसम शुरू हो चुका है। कई बार सड़कों पर जगह-जगह पानी भरा होता है और उसमें से गाड़ी लेकर निकलना पड़ता है। बारिश हो रही हो, तब भी गाड़ी चलाते हुए निकलना पड़ता है। अगर न भी कहीं आना-जाना हो, तो इस मौसम में नमी लगातार बनी रहती है, जो गाड़ी को प्रभावित करती है। अगर बरसात में गाड़ी सावधानी से न चलाएं और उसकी उचित देखभाल न की जाए, तो वह रास्ते में धोखा भी दे सकती है। इसलिए इस मौसम में गाड़ी का रखरखाव दूसरे मौसमों की अपेक्षा अधिक करना पड़ता है।
टायरों और ब्रेक का ध्यान रखें
बरसात के मौसम में सड़कें अक्सर गीली रहती हैं, जिस पर गाड़ी चलाने में थोड़ी भी असावधानी दुर्घटना का कारण बन सकती है। इसलिए अगर गाड़ी के टायर घिस गए हैं, तो उन्हें तुरंत बदलवा लें। टायरों में पकड़ सही होती है, तो बारिश में या फिर गीली सड़कों पर चलते हुए रपटने का खतरा नहीं होता। अक्सर लोग टायर बदलना टालते रहते हैं और जब तक वे पूरी तरह घिस नहीं जाते, तब तक चलाते रहते हैं। कई लोग घिसे हुए टायरों पर ठंडी रबड़ चढ़वा कर कुछ दिन और उन्हें चलाते हैं। यह ठीक नहीं है। टायर सही न हों तो उसका असर न सिर्फ गाड़ी की रफ्तार, बल्कि इंजन पर भी पड़ता है। इसलिए टायरों को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही न बरतें।
इसी तरह बरसात में बारिश का पानी लगातार पड़ते रहने से अक्सर ब्रेक की पकड़ कमजोर पड़ जाती है। ब्रेक की पकड़ कमजोर पड़ने का अर्थ है, खतरा। आजकल गाड़ियां कंप्यूटरीकृत प्रणाली वाली आने लगी हैं। जब भी संचालन संबंधी किसी पुर्जे में कोई खराबी आती है तो कंप्यूटर प्रणाली गाड़ी की गति धीमी कर देती है। फिर लंबे समय तक उसकी अनदेखी पूरी गाड़ी पर बुरा असर डालती है। इसलिए इस मौसम में ब्रेक वगैरह को ठीक-ठाक रखना बहुत जरूरी है।
वाइपर और बत्तियां
वाइपर की रबड़ तेज ठंड और गरमी की वजह से अपना लचीलापन खो देते हैं। इस तरह जब आप बारिश के वक्त गाड़ी चलाते हैं, तो कांच का पानी ठीक से हटा नहीं पाते। इससे दृश्यता बाधित होती है। कड़ी रबड़ वाला वाइपर लगातार चलाते रहने से कांच पर निशान बनना शुरू हो जाता है। इसलिए हर बरसात में वाइपर की रबड़ जरूर बदलवा लेनी चाहिए। यह बहुत खर्चीला काम भी नहीं है।
इसी तरह आगे और पीछे की बत्तियां दुरुस्त होनी चाहिए, ताकि बारिश में गाड़ी चलाएं और बत्तियां जलाएं तो आपकी गाड़ी आगे और पीछे चलने वाले वाहनों को दिखाई दे। कई बार हल्की टक्कर लगने या किसी और वजह से बत्तियों का कांच कहीं से चटक या टूट जाता है। उसे बदलवाने में लोग लापरवाही बरतते हैं, जिसका नतीजा यह होता है कि उनमें बारिश का पानी भरता जाता है और वह पूरी बत्ती को खराब कर देता है। इससे बचें।
चेसिस का पानी निकालें
बरसात के समय आप गाड़ी चलाएं या फिर खड़ी रखें, प्राय: चेसिस में पानी घुस जाता है। मिस्त्री के पास ले जाकर चेसिस का पानी जरूर निकलवा लें, नहीं तो गाड़ी कहीं भी धोखा दे सकती है। अगर आपको गाड़ी के बारे में थोड़ी भी जानकारी है, तो यह काम आप खुद भी कर सकते हैं। चेसिस का पानी निकाल कर उसे ठीक से साफ कर लें।
जंग लगने का खतरा
बरसात में हवा में नमी बनी रहती है। इसके अलावा ऊमस होती है। ऐसे में नमी की वजह से गाड़ी के पुर्जों में जंग लगने की आशंका बनी रहती है। जंग लगने का अर्थ है कि गाड़ी की जिंदगी कम होने लगती है और वह कभी भी धोखा दे सकती है। इसलिए जंग से बचने के लिए कुछ सावधानियां बरतनी जरूरी हैं-
जब भी बारिश के वक्त गाड़ी चला कर लाएं, उसे पानी से ठीक से धोएं। अगर गाड़ी पर कीचड़-मिट्टी ज्यादा चढ़ गई है, तो तेज धार वाले फव्वारे से धुलाई कराएं। आजकल गाड़ियों की धुलाई करने वाले जगह-जगह होते हैं। कई पेट्रोल पंपों पर भी गाड़ी धुलाई की सुविधा होती है।
बरसात के समय गाड़ी को ढक कर न रखें। इससे गाड़ी के भीतर ऊमस बनती है और उसके चलते उसके पुर्जों पर नमी जमती है, जो जंग का कारण बनती है।
बरसात से पहले गाड़ी के निचले हिस्से में टेफलान की परत चढ़वा लेनी चाहिए। वैसे गाड़ी खरीदते समय ही यह काम करवा लेना चाहिए। टेफलान कोटिंग एक बार करवाने के बाद करीब पांच साल तक जंग से बचाव करती है। फिर भी गड्ढों और स्पीड ब्रेकर आदि पर सावधानी से न चलाने की वजह से गाड़ी के निचले हिस्से में खरोंचें आ जाती हैं। इसलिए गाड़ी निचले हिस्से में जले हुए डीजल या फिर दूसरे चिकनाई वाले पदार्थ की परत चढ़वा लेनी चाहिए, इससे जंग लगने का खतरा खत्म हो जाता है।
बैट्री के ऊपर अगर ठीक से तार कसे और ढके न हों, तो उनमें भी जंग लगने की आशंका रहती है। ऐसे में गाड़ी चालू करने में परेशानी आती है। इसलिए उन पर ग्रीज लगाएं।
गाड़ी चलाते समय सावधानियां
बरसात में गाड़ी चलाते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होती है। अक्सर जलजमाव की वजह से जगह-जगह सड़कें टूट जाती हैं, गड्ढे बन जाते हैं। उनमें से गाड़ी लेकर गुजरने पर शॉकर और दूसरे पुर्जों पर बुरा असर पड़ता है, पहियों का संतुलन बिगड़ता है। इसलिए ऐसी स्थितियों से बचें।
कुछ लोगों को पानी से भरी सड़क पर पानी उड़ाते हुए फर्रांटा गाड़ी चलाने में बड़ा मजा आता है। ऐसा बिल्कुल नहीं करना चाहिए। पानी के नीचे सड़क कैसी है, आपको नहीं पता, इसलिए उसमें तेज गाड़ी चलाना खतरनाक हो सकता है। फिर इससे इंजन, वायरिंग आदि पर बुरा प्रभाव पड़ता है।
अगर जलजमाव वाली सड़क से गुजर रहे हों और चलते-चलते आपकी गाड़ी बंद हो जाए, तो उसे दुबारा चालू करने का प्रयास कतई न करें। गाड़ी के साइलेंसर के जरिए पानी इंजन में जाने का खतरा रहता है। इससे इंजन बैठ जाएगा और उसे ठीक कराने में भारी खर्च आ सकता है।
सड़क पर चलते हुए गाड़ी को बिल्कुल किनारे पर न चलाएं। सड़क गीली होगी तो उसके किनारे से पहियों के फिसलने और चिकनी मिट्टी पर रपट जाने का खतरा बना रहेगा।
जब भी बारिश हो रही हो, गाड़ी की रफ्तार तेज न रखें। आगे और पीछे की बत्तियां जला कर ही गाड़ी चलाएं।

