गरमी का मौसम केवल बेचैनी और झुंझलाहट लेकर नहीं आता, बल्कि यह कई बीमारियों को भी साथ लेकर आता है। इस मौसम में त्वचा संबंधी कई बीमारियां होती हैं। सबसे अधिक फोड़े-फुंसी इसी मौसम में लोगों को परेशान करते हैं। शरीर के किसी भी हिस्से में निकलने वाले फोड़-फुंसी असहनीय दर्द और त्वचा को भद्दा बना सकते हैं। गुरु तेग बहादुर अस्पताल के चर्म रोग विभाग में प्रोफेसर डॉक्टर विजय गांधी बताते हैं कि गरमी के मौसम में पसीना अधिक निकलता है, जिसकी वजह से जीवाणु जनक संक्रमण (बैक्टिरियल इंफेक्शन्स) बढ़ जाते हैं। इस मौसम में स्टैफिलोकॉकस और स्ट्रीप्टोकॉकस नामक कीटाणु अधिक सक्रिय रहते हैं। जब वे हमारे शरीर पर हमला करते हैं तो उनकी वजह से फोड़े-फुंसी होते हैं। त्वचा पर फोड़े-फुंसी निकल आएं तो बहुत तेज दर्द होता है। फोड़े-फुंसी और उनके दर्द से बचने के लिए कुछ एहतियात बरतने जरूरी हैं।

लक्षण

  • इस संक्रमण की वजह से त्वचा पर एक छोटा दाना निकलता है।
  • दाने वाली जगह पर सूजन आ जाती है।
  • फुंसी या फोड़े के पकने पर पस बनने लगता है।
  • दाना जब बड़ा हो जाता है तब उससे पस निकलने लगता है।
  • फोड़े के आसपास अधिक छोटी-छोटी फुंसियां दिखाई देने लगती हैं।
  • कुछ मामलों में बुखार या ठंड लग सकती है।
  • अधिक थकान महसूस होती है।

गलतफहमी : आम का फल है कारण

प्रोफेसर विजय गांधी के अनुसार लोगों में यह एक गलतफहमी है कि गरमी के मौसम में ज्यादा आम खाने से फोड़े-फुंसी निकलते हैं। आम की वजह से फोड़े-फुंसी नहीं निकलते हैं। संक्रमण और शरीर की साफ-सफाई का ध्यान न रखने पर फोड़े-फुंसी होते हैं।
खासकर बच्चों को इस मौसम में फोड़े-फुंसियां अधिक निकलती हैं। बच्चे प्राय: त्वचा की साफ-सफाई के मामले में लापरवाह होते हैं। वे बाहर खेल कर आते हैं और बिना नहाए, हाथ-मुंह धोए पढ़ने बैठ जाते हैं या घर का कोई काम करने लगते हैं। इस तरह उनकी त्वचा पर जमी धूल-मिट्टी में चिपके फोड़े-फुंसी पैदा करने वाले बैक्टीरिया हमला कर देते हैं। ऐसे में फोड़े-फुंसी से बचाव के लिए कुछ उपाय करने जरूरी होते हैं।
बचाव

दिन में दो बार नहाएं : गरमी के मौसम में फुंसी-फोड़े से बचने के लिए दिन में दो बार- सुबह और शाम- नहाएं। अपने शरीर की सफाई का विशेष ध्यान रखें। नहाने से शरीर पर लगी धूल-मिट्टी और पसीने की गंदगी खत्म हो जाती है।

खूब पानी पीएं : इस मौसम में पसीना अधिक बहने की वजह से शरीर में पानी की कमी हो जाती है। दिन में कम से कम दो लीटर पानी पीएं।

कसे हुए कपड़ें न पहनें : प्रोफेसर विजय गांधी के मुताबिक गरमी में कसे हुए कपड़े पहनने से पसीना बाहर नहीं निकल पाता है। वह उसी स्थान पर सूख जाता है, जिससे दाद बन सकता है। इसलिए जरूरी है कि सूती और ढीले कपड़े पहनें।

खाने-पीने में परहेज : इस मौसम में ज्यादा मसालेदार खाना न खाएं इससे पसीना अधिक आता है। ज्यादा पसीना फोड़े-फुंसी का प्रमुख कारण है। इसके अलावा ज्यादा चाय या कॉफी न पीएं। इनकी मात्रा जितनी कम हो उतना सेहत के लिए अच्छा है।

धूम्रपान : प्रोफेसर विजय गांधी बताते हैं कि धूम्रपान का फोड़े-फुंसी से सीधा संबंध नहीं है। लेकिन इसका एक नकारात्मक असर यह देखने को मिलता है कि अगर कोई व्यक्ति धूम्रपान करता है तो उसकी फोड़े-फुंसी की समस्याएं जल्दी ठीक नहीं होती हैं। उसे ज्यादा दवाओं से ठीक करना पड़ता है। सामान्य व्यक्ति के मुकाबले मादक पदार्थों का उपयोग करने वाला व्यक्ति देर से ठीक हो पाता है।

व्यायाम करें : व्यायाम करने से पसीना जल्दी भाप बन कर उड़ जाता है। इससे संक्रमण नहीं होता। ताजा हवा के संपर्क में रहें।

फल और सलाद : फल और सलाद अधिक खाएं। इससे शरीर में पानी की कमी नहीं होती है। हल्का भोजन खाने से शरीर सेहतमंद रहता है। रोग प्रतिरोधक क्षमता ठीक रहती है।

साफ कपड़े पहनें : कपड़ों को रोज साफ करें और उन पर इस्त्री करके ही पहनें। गंदे कपड़े पहनने से फोड़े-फुंसी अधिक होती है। साफ कपड़े पहनने से आप सुरक्षित रह सकते हैं।
सावधानी

घरेलू उपाय कम करें : अमूमन लोग फोड़े-फुंसी होने पर घरेलू उपायों को प्रमुखता दे ते हैं। लेकिन प्रोफेसर विजय गांधी बताते हैं एक या दो फोड़े-फुंसी होने पर तो घरेलू उपाय अपनाए जा सकते हैं, लेकिन अगर कोई छोटी फुंसी ज्यादा समय तक परेशान करती है और चौबीस से अड़तालीस घंटे में ठीक नहीं होती है, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।