कैसे बचें बीमारियों से
दस्त
प्रदूषित और संक्रमित पानी पीने से दस्त जैसी बीमारी लगने लगती है। दस्त में पेट दर्द, और बुखार के साथ आंतो में सूजन जैसे लक्षण होते हैं। दस्त लगने पर छाछ में भुना हुआ जीरा डाल कर सेवन करना चाहिए। नारियल पानी पीएं। नीबू शिकंजी लें। अनार का जूस पीने से भी दस्त ठीक होती है। दस्त से कमजोरी महसूस होने लगती है, इसलिए ग्लूकोज या इलेक्ट्रॉल लेने से कमजोरी दूर होती है। बच्चों को ओआरएस घोल दें। जब तक दस्त बंद न हो, भोजन से परहेज करें। ज्यादा भूख हो तो मूंग दाल और चावल की पतली खिचड़ी और दही या पके केले खाएं।
डेंगू
बदलते मौसम में मच्छरों की वजह से डेंगू की बीमारी अक्सर लोगों को होने लगती है। यह एक तरह का बुखार होता है, जो डेंगी मच्छर के काटने से होता है। इस रोग के मुख्य लक्षण हैं- सिर दर्द, बुखार, आंखों में दर्द, बदन में दर्द और जोड़ों में दर्द।
इस रोग से बचने के लिए अपने घर के आसपास गंदा पानी जमा न होने दें। गमलों, फूलदान और पंछियों के पीने के लिए रखे जाने वाले पानी के बर्तन की नियमित सफाई करें। रात को मच्छरदानी लगा कर सोएं।
टाइफायड बुखार
बारिश के मौसम में अक्सर लोग गंदे हाथों से खाने की चीचें खा लेते हैं, जिसके चलते वे टाइफायड जैसे गंभीर बुखार के शिकार हो जाते हैं। इस रोग के मुख्य लक्षण हैं- सूखी खांसी, दस्त, सिर दर्द, भूख न लगना आदि। इस बुखार में रोगी को पूरा आराम करना चाहिए। मुनक्कों का अधिक से अधिक सेवन करना चाहिए। बीमार को पीने का पानी उबाल कर ही देना चाहिए।
फूड प्वाइजनिंग
यह संक्रमित भोजन करने से होता है। इसमें ठंड लगना, पेट में दर्द, उल्टी और बुखार आ जाता है। ऐसे में ग्लूकोज का पानी, शिकंजी, सूप, और नारियल पानी का अधिक से अधिक सेवन करना चाहिए। साफ और ताजा बना खाना ही खाएं। साफ बर्तन में ही भोजन करें।
हैजा
यह एक खतरनाक बीमारी है, जो दूषित भोजन से होती है। हैजा में उल्टी के साथ-साथ दस्त भी होने लगते हैं। जिससे रोगी के शरीर में पानी की कमी हो जाती है, जिससे रोगी की जान भी जा सकती है। इसलिए तुरंत रोगी को डाक्टर के पास ले जाएं।
आंखों के रोग
बरसात के मौसम में हवा में उड़ने वाले बैक्टीरिया आंखों में संक्रमण पैदा करते हैं। इसे आइ फ्लू यानी आंख आना कहते हैं। इसमें आंखें लाल हो जाती हैं और सूजन की वजह से उनमें दर्द होने लगता है। फ्लू से बचने के लिए साफ हाथों से ही आंखों को साफ करना चाहिए। अपने खुद के तौलिए से ही शरीर को पोछें। आंखों को दिन में तीन से चार बार पानी से धोना चाहिए। अगर तब भी आंखों को आराम न मिले, तो डाक्टर को तुरंत दिखाएं। कहते हैं, सावधानी से रोगों की आधी संभावना अपने आप दूर हो जाती है। इसलिए बरसात में अपनी जीवन-शैली पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
