मानस मनोहर
बदलते मौसम में गले के संक्रमण का खतरा अधिक होता है। फिर कोरोना संक्रमण का खतरा भी लगातार बढ़ता ही जा रहा है। इसलिए विशेषज्ञों का सुझाव है कि किसी भी प्रकार गले में संक्रमण न होने दें। इसके लिए काढ़ा पीने की सलाह दी जा रही है। लिहाजा इस बार कुछ ऐसे ही व्यंजन, जो भोजन तो हैं ही, औषधि का भी काम करते हैं।

रसम
सम दक्षिण भारत का लोकप्रिय व्यंजन है। यह प्रोटीन और औषधियों से भरपूर होता है। इसे भोजन के रूप में भी खा सकते हैं, स्टार्टर के तौर पर भी ले सकते हैं और चाहें तो सूप की जगह पी भी सकते हैं। पहले भी हम रसम बनाने की विधि के बारे में बातचीत कर चुके हैं। पर इस मौसम में इसका उपयोग अगर हफ्ते में कम से कम दो बार करें, तो खांसी, जुकाम, सर्दी के प्रकोप से बच सकते हैं।
रसम बनाना बहुत आसान है। इसमें बहुत सारी सामग्री की जरूरत भी नहीं होती। इसमें मुख्य रूप से टमाटर, लहसुन और काली मिर्च की जरूरत होती है। इसके अलावा कढ़ी पत्ता इसके औषधीय गुणों को बढ़ा देता है। इसमें उपयोग के लिए चौथाई कटोरी अरहर यानी तूर दाल पहले ही उबाल कर रख लें।

इसके अलावा इमली का गूदा पहले ही गरम पानी में भिगो कर रख दें और फिर जब वह नरम हो जाए तो मसल कर एक कटोरी इमली का गूदा निकाल कर रख लें। चाहें तो पैकेट वाला इमली का आधा कटोरी गूदा ले लें।

रसम बनाने के लिए दो-तीन मध्यम आकार के टमाटर छोटे-छोटे काट लें। तीन-चार हरी मिर्च और कुछ हरे धनिए के मोटे हिस्से को बारीक काट कर रख लें। अब एक भगोने में एक से डेढ़ लीटर पानी गरम होने के लिए रखें। उसी में कटे हुए टमाटर, हरी मिर्च, हरा धनिया, दस-बारह कढ़ी पत्ते और जरूरत भर का नमक डालें। इसके साथ ही एक चम्मच धनिया पाउडर, आधा चम्मच जीरा पाउडर और आधा चम्मच लाल मिर्च पाउडर डालें और ढक्कन लगा दें। इसे दस से बारह मिनट तक उबलने दें। इस बीच इसमें डालने के लिए मसाला तैयार कर लें।

दस-बारह काली मिर्च, आधा चम्मच जीरा, एक से डेढ़ इंच अदरक और दस-बारह लहसुन की कलियां लेकर खरल में अच्छी तरह कूट कर पेस्ट बना लें। यह मसाला सबसे अंत में डाला जाएगा। भगोने का ढक्कन हटा कर एक बार चलाएं, टमाटर पक कर नरम हो चुका होगा। अब इसमें उबली हुई दाल और इमली का गूदा डालें और अच्छी तरह चला कर ढक्कन लगा दें। इसे दस से बारह मिनट तक मध्यम आंच पर पकने दें।

इस बीच, इसमें डालने के लिए तड़का तैयार कर लें। एक तड़का पैन में एक चम्मच सरसों तेल या फिर देसी घी गरम करें। उसमें आधा से पौन चम्मच राई, आठ-दस कढ़ी पत्ते और दो साबुत लाल मिर्च डाल कर तड़का लें। इस तड़के को जब रसम अच्छी तरह पक जाए तो उसमें डाल दें। ढक्कन लगा दें। एक उबाल आने के बाद उसमें कूटा हुआ लहसुन, अदरक, काली मिर्च वाला मसाला डालें और आंच बंद कर दें। थोड़ी देर ढक्कन लगा कर रखें। पांच मिनट में लहसुन, अदरक का रस सारे रसम में समा जाएगा।

अब गरमा-गरम रसम परोसने के लिए तैयार है। इसे चाहें तो पापड़ के साथ सूप के तौर पर पी सकते हैं, चाहें तो उबले चावल के साथ मिला कर भी खा सकते हैं। जिस भी रूप में खाना चाहें, इसे हफ्ते में एक-दो बार जरूर खाएं। इसे खाने से शरीर को गरमी मिलेगी, पसीना आएगा, नाकों और गले में जमा बलगम छंट कर समाप्त हो जाएगा।

उबली सब्जियां
स मौसम में भोजन में कुछ सब्जियों का उपयोग बढ़ा देना चाहिए। उनमें गाजर, चुकंदर, हरी मटर, पत्ता गोभी, ब्रोकली, फ्रेश बीन्स और गांठ गोभी ऐसी सब्जियां हैं, जिनके उपयोग से शरीर में आॅक्सीजन की मात्रा बढ़ती है। शरीर में फाइवर जाने से पाचन तंत्र दुरुस्त होता है। इस मौसम में शरीर में आॅक्सीजन की मात्रा बढ़ाए रखना जरूरी है।

यों ऊपर जिन सब्जियों का जिक्र किया है, उन्हें पानी में उबाल कर खा सकते हैं, पर कई लोगों को उबली सब्जियां खाना पसंद नहीं आता, खासकर बच्चों को। ऐसे में बीच का रास्ता निकालते हुए इन सब्जियों को कुछ इस ढंग से बनाएं कि घर के सभी लोगों को पसंद आए। इसके लिए पहले गांठ गोभी, गाजर और चुकंदर का छिलका उतार कर धो लें और इन्हें मनचाहे टुकड़ों में काटें। टुकड़े बड़े रखें, तो खाने में अच्छा लगेगा। इसी तरह ब्रोकली और पत्ता गोभी के बड़े-बड़े टुकड़े काट लें।

बीन्स को अधिकतम चार टुकड़ों में काट लें। इसमें डालने के लिए पांच-सात लहसुन की कलियां और करीब एक इंच बड़ा अदरक का टुकड़ा साफ करके कूट लें। इसमें मसालों की ज्यादा जरूरत नहीं पड़ती। इसमें काली मिर्च डालना जरूरी है, सो आठ-दस काली मिर्च कूट कर रख लें, जिसे सबसे अंत में डालना है।

अब एक कड़ाही में एक चम्मच देसी घी गरम करें। उसमें आधा चम्मच राई, आधा चम्मच जीरा और आधा चम्मच अजवाइन तड़काएं। जब तड़का तैयार हो जाए तो अदरक-लहसुन का पेस्ट डालें और पांच सेकंड भूनने के बाद उसमें चौथाई गिलास पानी डाल दें। इसी में सारी कटी हुई सब्जियों को डाल दें और ऊपर से जरूरत भर का नमक डाल कर ढक्कन लगा दें।

आंच को मध्यम रखें। दस मिनट तक सब्जियों को इसी तरह पकने दें। फिर ढक्कन उठा कर देखें। सब्जियां पक कर नरम हो चुकी होंगी। सब्जियों को गलाना नहीं है। उनमें थोड़ा कचकचापन बने रहना चाहिए। अब इसमें कूटी हुई काली मिर्च डाल कर अच्छी तरह मिला दें और कड़ाही पर ढक्कन लगा कर आंच बंद करें और पांच-सात मिनट के लिए छोड़ दें। सब्जी तैयार है।

इस सब्जी की खासियत यह है कि इसे चाहें तो सब्जी की तरह खा सकते हैं और चाहें, तो सलाद की तरह भी खा सकते हैं। हफ्ते में कम से कम दो बार अगर केवल इस तरह सब्जी बना कर नाश्ता या रात के भोजन में खाएं, तो शरीर में आॅक्सीजन की कमी दूर हो जाएगी। यह बच्चों को भी पसंद आएगी। इसमें डाला गया काली मिर्च, लहसुन और अदरक का मसाला गले और छाती में जमा बलगम को साफ करेगा।