गरमी के मौसम में मसालेदार चीजें खाने का मन नहीं होता, पर रोज-रोज फीकी और तरल चीजें खाना भी पसंद नहीं आता। इन दिनों बच्चों की छुट्टियां चल रही हैं और वे रोज कुछ न कुछ अलग खाने की मांग करते हैं। इसलिए रोजमर्रा बनने वाली चीजों को थोड़ा अलग ढंग से बनाएं तो उनका स्वाद बढ़ जाता है। बच्चे और बड़े दोनों इन्हें चाव से खाते हैं। ऐसी ही कुछ चीजें इस बार बनाते हैं।
कुरकुरी भिंडी
गरमी के मौसम में भिंडी सबकी पसंदीदा सब्जी है। आमतौर पर इसे सूखी सब्जी के तौर पर बनाया और खाया जाता है। कुछ लोग भिंडी को पतला-पतला काट कर तेल में पकौड़ों की तरह तलते और कुरकुरी भिंडी बनाते हैं। यह खाने में बहुत स्वादिष्ट होती है। पर इस तरह इसमें तेल का अधिक उपयोग होता है। अगर आप कुरकुरी भिंडी बनाना चाहते हैं, तो बिना तले, सामान्य रूप से पकाते हुए भी उसे कुरकुरी बना सकते हैं। भिंडी की यह सब्जी बच्चों को बहुत पसंद आती है।
भिंडी को ठीक से धो और उसका पानी सुखा कर मनचाहे आकार में काट लें। लंबी या छोटी-छोटी, जैसा चाहें। चूंकि इस मौसम में भिंडी की सब्जी अक्सर बनती है, इसलिए हर बार आप आकार बदल-बदल कर काटें और अलग-अलग तरीके से बनाएं।
अब एक कड़ाही में सरसों या खाने का जो तेल आप उपयोग करते हैं, दो-तीन चम्मच डाल कर गरम करें। उसमें मेथी दाना, जीरा, थोड़ी-सी सौंफ, अजवाइन का तड़का दें। साथ ही हींग पाउडर और हल्दी भी तड़के में डालें और भिंडी छौंक दें। कड़ाही को बिना ढंके धीमी आंच पर भिंडी को पकने दें। थोड़ी-थोड़ी देर पर चलाते रहें।
जब उसका लसलसापन खत्म हो जाए तो ऊपर से एक चम्मच बेसन डाल कर भिंडियों पर लिपटा दें। इसके साथ ही धनिया पाउडर और सब्जी मसाला डाल लें। आंच तेज कर दें और हाथ में हल्का पानी लेकर ऊपर से छींटा लगाते हुए चलाएं, ताकि बेसन और मसाले पूरी तरह भिंडियों पर लिपट जाएं। आंच बंद कर दें और ऊपर से नमक डाल कर मिला लें। कुरकुरी भिंडी तैयार है। इसे सादे परांठे, रोटी या फिर चावल-दाल के साथ खाएं अलग स्वाद आएगा।
प्याज-हरी मिर्च की सब्जी
रमी के मौसम में प्याज और हरी मिर्च खाने से लू लगने की संभावना कम हो जाती है। पुराने समय में लोग लू के वक्त जेब में प्याज रख कर चलते थे, ताकि लू न लगे। इसलिए गरमी में इन दोनों चीजों की सब्जी जरूर खाएं, पेट के लिए लाभकर है। यह सब्जी बनाना बहुत आसान है। इसके लिए प्याज को छील कर मोटे-मोटे आकार में काट लें। थोड़े मोटे आकार की हरी मिर्चें लें और उन्हें बीच में से फाड़ कर उनके बीच निकाल लें। बीज निकालने से दो फायदे होते हैं। एक तो मिर्च की कड़वाहट कम हो जाती है और बच्चे भी उसे आसानी से खा लेते हैं। दूसरे, मिर्च के बीजों के आपके पाचन तंत्र में फंस कर कब्ज, मल वगैरह पैदा करने का खतरा टल जाता है। अब मिर्चों को चाहें तो लंबे आकार में रहने दें, नहीं तो बीच से काट कर दो टुकड़े कर लें।
अब इसके लिए मसाला तैयार करें। एक-एक चम्मच साबुत धनिया, जीरा, मेथी दाना, अजवाइन और सौंफ लेकर खरल में दरदरा कूट लें। फिर एक कड़ाही में एक से दो चम्मच देसी घी गरम करें। उसमें कुटे हुए मसालों को डालें और साथ ही प्याज और हरी मिर्च के कटे हुए टुकड़े भी डाल दें। इन सबको चलाते रहें। ध्यान रहे कि प्याज और हरी मिर्च को गलाना नहीं है। जब ये आधा पक जाएं तो आंच बंद कर दें। प्याज और मिर्च में थोड़ा कचकचापन यानी क्रंचीनेस बनी रहनी चाहिए। अब नमक और चाहें तो थोड़ा-सा अमचूर पाउडर डाल कर मिला लें और सब्जी को ढक्कन वाले बरतन में निकाल कर रख लें। यह सब्जी तीन-चार दिन तक खराब नहीं होती। इसे सब्जी की तरह परांठे या चावल-दाल के साथ भी खा सकते हैं और अचार की तरह भी।
बच्चों के लिए
इन दिनों बच्चों की छुट्टियां हैं और वे दिन भर कुछ न कुछ खाते-पीते रहते हैं। इसलिए उनके लिए कुछ चीजें ऐसी बना कर रखनी चाहिए, जिसे वे बिना आपकी मदद के भी खुद बना कर खा या पी सकें। नहीं तो वे नूडल्स वगैरह खाते रहेंगे। आम का पना, बेल का शर्बत, मैंगो शेक आदि बना कर फ्रिज में रख दें, बच्चे जब मन होगा, उसे खुद पी लिया करेंगे। आलू या राजमे की टिक्कियां बना कर ब्रेड क्रम्स लगा कर फ्रिज में रख दें। जब भी हल्की भूख लगेगी वे खुद तवे पर आसानी से सेंक कर खा लिया करेंगे। मुरमुरे, भुनी मूंगफली, सेव-दालमोठ वगैरह मिला कर मिश्रण को एक डिब्बे में भर कर रख दें, यह बच्चों को बहुत पसंद आता है।
