मानस मनोहर
चना दाल-फरा
दाल-फरा मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्से, बिहार और बंगाल के कुछ इलाकों में खाया जाता है। इसे कहीं-कहीं दाल पिट्ठी या पिट्ठा भी कहते हैं। इसे नाश्ते के रूप में भी खाया जाता है और मुख्य भोजन के तौर पर भी। उत्तर प्रदेश और बिहार में सर्दी के मौसम में पड़ने वाले त्योहार पीड़िया या पौड़िया त्योहार पर दाल-फरे और गन्ने के रस में बनी खीर प्रसाद के रूप में पकाई जाती है। चना दाल-फरा बनाना बहुत आसान है। इसके लिए चने की दाल को तीन-चार घंटे के लिए भिगो दें। फिर उसका पानी निथार कर उसे सिलबट्टे, खरल या फिर मिक्सर में मोटा-मोटा पीस लें। इसके साथ ही हरी मिर्च, लहसुन, हरा धनिया पत्ता भी पीस लें। इन सबको पीस लेने के बाद ऊपर से नमक और थोड़ी-सी हींग मिला लें। चाहें तो एक चम्मच अजवाइन भी डाल लें, इससे स्वाद अच्छा आता है। दाल-फरा बनाने के लिए चावल का आटा सबसे अच्छा रहता है। मगर चावल का आटा गूंथने में खासी सावधानी बरतनी पड़ती है। उसे गरम पानी से गूंथ कर तुरंत फैलाना और उसमें दाल का मिश्रण भर लेना होता है। इसलिए अगर चावल के आटे को गूंथना और उसमें दाल भरना मुश्किल हो, तो रोजमर्रा इस्तेमाल होने वाला गेहूं का आटा उपयोग कर सकते हैं।
हाथ पर ही गुंथे हुए आटे को फैला लें और उसमें पिसी हुई दाल का मिश्रण भर कर किनारों पर पानी लगा कर गुझिया की तरह बंद कर लें। इस तरह सारे दाल-फरे बना कर थाली में रख लें। अब इडली मेकर या स्टीमर में पानी गरम करें और जैसे भाप में इडली या मोमो पकाते हैं, उसी तरह इन फरों को पका लें। फरों को पकाने में इडली से कुछ अधिक समय लगाएं, क्योंकि इसमें भरी दाल कच्ची होती है, उसे पूरी तरह पकाना जरूरी होता है। जब फरे पक कर तैयार हो जाएं तो उन्हें बाहर निकालें और टुकड़ों में काट लें। इन्हें सीधा इसी रूप में हरी या लाल चटनी के साथ गरमा-गरम खाने के लिए परोसा जा सकता है। अगर चाहें तो एक कड़ाही में एक चम्मच घी गरम करें, उसमें राई और कढ़ी पत्ते का तड़का लगाएं और उसमें इमली का गूदा और एक चम्मच चीनी या गुड़ डाल कर एक कटोरी पानी के साथ उबाल लें। पानी उबल कर आधा रह जाए, तो सावधानी पूर्वक उसमें फरे डाल दें। इससे स्वाद बढ़ जाएगा।
दाल पिट्ठी
सेहत को लेकर सतर्क रहने वाले लोगों के लिए दाल पिट्ठी भी एक उपयुक्त आहार है। यह झटपट तैयार हो जाता है और कैलोरी वगैरह की चिंता से मुक्त होकर नाश्ते या फिर भोजन के तौर पर भर पेट खाया जा सकता है। दाल पिट्ठी बनाने के लिए चने या अरहर की दाल लें। इसे कम से कम एक घंटे के लिए भिगो दें। इस बीच आटा गूंथ लें। जैसे रोटी बनाने के लिए आटे को गूंथते हैं, वैसा ही गूंथें। अब दाल को कुकर में चढ़ा दें। उसमें हल्दी, नमक, हींग, थोड़ा-सा सब्जी मसाला और जितना खा सकते हों, उतना लाल मिर्च पाउडर डाल दें। दाल पकाने के लिए जितना पानी डालते हैं, उतना ही पानी डालें और कुकर को बंद कर दो सीटी तक पका लें। इतने में दाल आधी पक जाएगी। सीटी बंद कर दें। अब आटे की रोटियां बेल लें। रोटियों को चार तरफ से पकड़ कर कोना बनाते हुए चिपका लें। यह देखने में चार पंखुड़ियों वाले फूल की तरह बन जाएगी। इसी तरह जरूरत भर की पिट्ठियां बना कर रख लें। कुकर की भाप निकल जाए तो ढक्कन को खोल लें और उसमें सावधानी से पिट्ठियों को डाल दें। कुकर का ढक्कन लगाएं और दो-तीन सीटी तक पकाएं, जितने में दाल पूरी तरह गल जाए। चने की दाल को गलने में थोड़ा अधिक समय लगता है, इसलिए कुकर की सीटियां गिनते समय इस बात का ध्यान रखें। दाल पिट्ठी तैयार है। इसमें हरा धनिया और अदरक के लच्छे डाल कर गरमा-गरम परोसें। इसे और स्वादिष्ट बनाने के लिए ऊपर से घी में जीरा और साबुत लाल मिर्च का तड़का लगा सकते हैं। अगर घी से परहेज है तो उसके बिना भी खाएं, स्वादिष्ट, सुपाच्य और सेहतमंद दाल-पिट्ठी।
