क्षमा शर्मा
एशले मेडिसन एक वेबसाइट है, जिसका नारा है- जीवन छोटा है, एक अफेयर हो जाए (लाइफ इज शॉर्ट, लेट अस हैव एन अफेयर)। यह साइट खुलेआम अपने साथी से बेवफाई को प्रोत्साहित करती है। यह अपने ग्राहकों से वादा करती है कि उनकी सारी गतिविधियां गुप्त रखी जाएंगी और उन्नीस डॉलर की फीस अदा करके वे अपने बारे में हर सूचना साइट से हटा सकते हैं।
इस वेबसाइट की गुपचुप शुरुआत 2014 के मध्य में भारत में भी हो चुकी है। बताया जाता है कि भारत में इस साइट की सेवा लेने वालों की संख्या एक लाख सत्तर हजार है। इतने कम दिनों में इतने ग्राहक भारत में बन जाना यह बताता है कि ऐसे कामों की आतुरता भारत में भी कितनी ज्यादा है। जबकि यहां इस साइट का कोई ज्यादा प्रचार-प्रसार नहीं हुआ है।
वैसे इस साइट के दुनिया भर में फैले कुल सदस्य तीन करोड़ सत्तर लाख से ऊपर हैं। इनमें हर वर्ग और हर तरह के लोग मौजूद हैं। मगर ज्यादा सदस्य अमेरिका और कनाडा से हैं। इन सदस्यों में बहुत-सी औरतें भी होंगी। इनकी संख्या कितनी है, अभी ठीक से पता नहीं है।
अपने यहां कथाकार जैनेंद्र कुमार पत्नी के अलावा एक प्रेमिका होने की वकालत बहुत पहले कर चुके हैं। हालांकि इस बात को लेकर उनकी काफी आलोचना भी हुई थी। उस समय की सबसे मशहूर पत्रिका धर्मयुग ने बाकायदा इस विचार के खिलाफ अपने कई अंकों में शृंखला चलाई थी। इसे कन्हैयालाल नंदन ने आयोजित किया था। हालांकि उस समय भी बहुत से लोगों ने कहा था कि जो लोग पत्रिका के पन्ने पर बड़ी-बड़ी बातें कर रहे हैं और एकपत्नीव्रत होने की कसमें खा रहे हैं, उनकी कई प्रेमिकाएं हैं। और इसे सब जानते भी हैं।
हिंदी फिल्म उद्योग तो आज तक ‘घर वाली बाहर वाली’ और ‘जुदाई’ जैसी फिल्में बनाता है। इन्हें रिकार्डतोड़ सफलता भी मिलती है। इससे पता चलता है कि हमारे जेहन में कितने गहरे तक एक के अलावा दूसरी औरत की बात स्वीकृत है। पुराने जमाने में तो हमारे यहां अमीरों की पहचान इसी बात से की जाती थी कि एक पत्नी के अलावा उसके इर्द-गिर्द और कितनी औरतें हैं। प्रेमिकाओं के नाम पर कितनी औरतों का भरण-पोषण करने की हैसियत उस आदमी की है। आज भी लोग मजाक में ही सही, कहते हैं कि कृष्ण की तो सोलह हजार रानियां थीं।
स्फुरणा देवी ने बीसवीं सदी के प्रारंभिक वर्षों में लिखी अपनी किताब- ‘अबलाओं का इंसाफ’ में इस प्रवृत्ति का विस्तार से जिक्र किया है। कई लोग तो दूसरी और कई बार तीसरी शादी करने के लिए धर्म परिवर्तन तक करते हैं। एक जमाने में ऐसे विवाहों का महिला संगठन काफी विरोध भी कर चुके हैं।
खैर, एशले मेडिसन वेबसाइट की बात गुपचुप प्रेम संबंधों तक रुक जाती तो कोई परेशानी न होती। समाजों में चुपके-चुपके यह सब होता ही रहता है। लेकिन पिछले दिनों एशले मेडिसन वेबसाइट के तीन करोड़ सत्तर लाख ग्राहकों का डाटा इंपैक्ट समूह नामक हैकर्स ने चुरा लिया। उनका कहना था कि एशले मेडिसन की पैतृक कंपनी एएलएम अपने सदस्यों से झूठ बोलती है कि वह उपभोक्ता की बेवफाई और अपने साथी को धोखा देने की जानकारी गुप्त रखती है। एशले मेडिसन घमंड पूर्वक दावा भी करती रही है कि इंटरनेट पर यह इकलौती सुरक्षित साइट है, जो अपने ग्राहकों की पहचान छिपा कर उन्हें पूरी सुरक्षा देती है। उनकी हर बात गुप्त रखती है। लेकिन इंपैक्ट समूह ने कहा कि यह साइट अपने ग्राहकों के डाटा को खत्म नहीं करती, बल्कि उन्हें अपने पास अन्य इस्तेमाल के लिए बचाए रखती है। लोगों के बारे में निजी जानकारियां वह उनके क्रेडिट कार्ड से प्राप्त कर लेती है।
एशले मेडिसन अपने करतब से सालों से चर्चा में रही है। खुलेआम प्रेम प्रसंगों की वकालत करने और अपने साथी को धोखा देने के लिए लोगों को प्रेरित करने को पर इसकी आलोचना भी होती रही है। लोगों का कहना है कि इस साइट का पूरा कार्य-व्यापार विफल प्रेम संबंधों, खराब वैवाहिक रिश्तों और टूटे हुए परिवारों के आधार पर चल रहा है। इसीलिए इस साइट ने अपना ब्रांड बनाने के लिए अतीत में आर्थिक रूप से पिछड़े बहुत से शहरों को फिर से विकसित करने की बात की थी। मगर शर्त रखी थी कि वहां के हवाई अड््डों और स्टेडियम का नाम इस साइट के नाम पर रखा जाए, जिसे कभी किसी सरकार ने स्वीकार नहीं किया।
इस साइट का डाटा चुराने वाले इंपैक्ट समूह का कहना है कि यह साइट बंद की जाए, वरना वे पूरे तीन करोड़ सत्तर लाख लोगों का डाटा सार्वजनिक कर देंगे। अगर ऐसा हुआ तो उन लाखों परिवारों का क्या होगा, जहां पति या पत्नी अपने-अपने साथियों से छिपा कर प्रेम रचा रहे हैं। इन करोड़ों लोगों में बहुत से नामी-गिरामी लोग भी शामिल हैं।
ज्यादा हैरानी इस बात पर है कि साइट के तीन करोड़ सत्तर लाख सदस्यों में सबसे अधिक अमेरिका और कनाडा से हैं। किसी ऐसे समाज के सदस्य इसके ग्राहक ज्यादा होते, जहां प्रेम पर आज भी बंदिशें हैं, तो बात समझ में भी आती है। लेकिन अमेरिका और कनाडा तो खुले समाज हैं। वहां औरतों-आदमियों के मिलने-जुलने, रिश्ता रखने पर हमारे यहां जैसी पाबंदियां शायद नहीं हैं। तो फिर छिप-छिप कर प्रेम करने की क्या जरूरत पड़ गई। या कि प्यार वही आकर्षित करता है, जो छिप कर किया जाए। जिसके बारे में किसी को खबर न हो। यानी एशियाई देशों का मॉडल अपनाया जाए!
मगर अब क्या हो! कहां तो प्रेम को अपने साथी, दोस्तों, परिजनों से छिपाते फिर रहे थे, अब अगर इंपैक्ट समूह ने उसे सार्वजनिक कर दिया तो क्या होगा। प्रेम तो मस्ती के लिए चलाया जा रहा था, कोई जिंदगी भर निभाने का वादा था नहीं। वह जब तक रहता, न रहता, प्रेम करने वालों के लिए कोई बड़ी बात नहीं थी। एक खत्म होता, दूसरा शुरू हो जाता। साइट तो चाहती ही यह है। हर बार उसे फीस मिलती है। मगर अब डाटा के खुलासे के बाद, परिवारों में जो मतभेद पैदा होंगे, टूट की नौबत आएगी, उसका क्या होगा! कितने मुखौटे उतरेंगे, कितना विश्वास टूटेगा, कोर्ट-कचहरी होगा, बलात्कार के कितने मुकदमे, कितने तलाक होंगे। भई गति सांप-छछूंदर केरी। सबको सारी बातें पता चल जाएंगी। यह भी कि एक-एक प्रेम संबंध के लिए साइट को कितनी फीस चुकाई गई।
एशले मेडिसन साइट बंद होगी या नहीं, यह तो नहीं पता, मगर जिन लोगों ने इस डाटा को चुराया है, आखिर वे इसे किसी और को नहीं बेच देंगे, कहा नहीं जा सकता। वैसे भी इंटरनेट के बारे में यह मशहूर है कि अगर एक बार कोई डाटा, कोई चित्र, कोई जानकारी उस पर डाल दी जाए तो डिलीट करने के बाद भी वह कभी पूरी तरह से खत्म नहीं होती। वह कहीं न कहीं, किसी न किसी रूप में जिंदा रहती है।
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