इसे कहते हैं: मोदी मोदी मोदी! चार दिन में तीन अवतार! लालकिले वाला अवतार इस बार बोर करता है! शाम तक चैनल बोरियत की उबासियां लेने लगते हैं। एक भी चटपटी बात नहीं। एक भी चर्चनीय मुद्दा नहीं! एक भी ‘बिग टिकट घोषणा’ नहीं। दोपहर तक चैनल चर्चाओं में विपक्ष भाषण से निराश होकर माथा धुनता था! चैनलों में बोरियत तारी थी! क्यों न होती?

चैनलों को मसाला मिला ही नहीं! एक ओर लालकिले की उमस। सामने पर्चों के पंखे बना कर हवा झलते लोग। पचासी मिनट लंबा भाषण। तेईस बार ‘टीम इंडिया’। उतनी ही बार ‘मेरे सवा सौ करोड़ देशवासियों’ और उससे अधिक बार ‘लालकिले की प्राचीर से’ और ‘तिरंगे झंडे की साक्षी में’ के तकिया कलाम! और एक पल भी उत्तेजक नहीं!

मोदीजी पसीना पसीना। जैकेट की बगलें भीगती हुर्इं। माथे से पसीना पोंछते हुए कई बार। लेकिन न बोलना रुकता है, न हवा चलती है। पीली पगड़ी पर नन्हे लाल-नीले छींटे हैं, लेकिन पिछले साल की सुबह की तरह इस बार हवा उनकी पीठ पर पड़ी पाग को उड़ा नहीं रही है।

वही अथक मोदी दो दिन संयुक्त अरब अमीरात में! और वही मोदी दुबई में जम कर ताली पड़वाते हैं और लगता है कि यही तो है अपना रॉक स्टार, जिसके एक-एक शब्द पर सुनने वाले न केवल ताली बजाते, बल्कि सीटी मारते हंै, किलकारी भरते हैं! गरमी यहां भी है, लेकिन उत्तेजना है। जोश है। हर वाक्य पर मोदी की जयकार है। मोदी डायस्पोरा से कनेक्ट करने के उस्ताद हैं। उनके पास कई टोटके हैं, जैसे कि कहा कि जब कोई मोदी से हाथ मिलाता है तो अकेले मोदी से नहीं, सवा सौ करोड़ भारतवासियों से हाथ मिलाता है या कि क्राउन प्रिंस ने मंदिर के लिए जमीन दी, उनका खड़े होकर अभिवादन नहीं करोगे क्या? और लोग ताली बजाते हुए खड़े हो जाते हंै। वे डायस्पोरा मन को खूब समझते हैं! एक खरब डॉलर का पैकेज मिलने वाला है!

इसके ठीक बाद बिहार को जीतने के लिए चुनाव पर सवार मोदी चुनाव अभियानी अवतार! लंबा भाषण! दोनों भुजाएं उठा कर बिहार में सवा लाख करोड़ का विशेष पैकेज देकर बिहार के चुनाव की परिभाषा को बदलने वाला मोदी!
मोदी प्रभावशाली दृश्यावली देकर असर पैदा करते हंै। वे एक ही समय में दोहरे-तिहरे-चौहरे प्रसारित होकर मिश्रित प्रभाव मंडल बनाते हैं। यही छवियों और बाइटों का ‘ब्लिट्जक्रीग’ (चौतरफा हमला) है!

संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा का प्रसारण फिर से देखें: यात्रा कवर करता एनडीटीवी कहता है कि इतने बरस में पहली बार यात्रा प्रोटोकाल तोड़ कर गले मिले मोदी! फिर सीन दुहरने लगते हैं। यह जायेद मस्जिद के पास का दृश्य है: एक लाइन में हिंदुस्तानी लोग खड़े हैं। मोदी हाथ मिलाते बातें करते हैं। फिर लोगों के साथ लाइन में खड़े होकर फोटो खिंचवाते हैं, यह फ्रेम रिपीट किया जाता है बार-बार! सतत और सकल प्रभाव!

पुराना जादू प्रसारित है: मोदी मोदी मोदी और सिर्फ मोदी! लोग मस्जिद तक में पुकारने लगते हैं: ‘मोदी मोदी’! एकदम परफेक्ट, परिपूर्ण! मोदी मोदी! किसी चीज की कमी नहीं दिखती! परफेक्ट इंपैक्ट! अरब में पावर पुश और यहां चैनलों का लाइव ‘पावर पुश’! ताकतवर धक्का!

मोदी को उनके दृश्यों की शृंखला में पढ़िए! वे हर तरह से जबर्दस्त होने का अहसास देते हैं! यह शानदार, लेकिन जोखिमभरा है! एक्शन हीरो का अभिशाप उसका सतत एक्शन है।
कितने दृश्य, कितने कोण, कितने लांग शॉट, कितने क्लोज शॉट, कितनी मुस्कान! कहां है थकान? मोदी को भीड़ें पसंद हैं और भीड़ों को मोदी! मोदीजी को सेल्फी पसंद है और सेल्फी को मोदी! जायेद मस्जिद में मोदी तेज-तेज चलते, शेखों के साथ सेल्फी खींचते हुए सेल्फी सेल्फी में विहंसते!

चार दिन में मोदी के तीन अवतार हैं- एकदम बैक टू बैक! वे इतने अधिकाधिक हैं कि सामान्य आलोचना से परे निकल जाते हैं!

टाइम्स नाउ से लेकर इंडिया टुडे मोदी के पैकेज पर चर्चारत हैं। अर्णव कांग्रेस के अजय कुमार को पहली आलोचना का अवसर देते हैं। वे एक ही सवाल बार-बार करने लगते हैं कि दिखाइए बजट में व्यवस्था कहां है सवा लाख करोड़ की! प्लान एक्सपेंडीचर है? क्या है? कहां से आएगा? सवा लाख करोड़ रुपयों का जादू इस तरह के एकाउंटिंग के तकनीकी तर्कों से खारिज नहीं किए जाते अजयजी!

अर्णव सवा लाख करोड़ के ‘पैकेज पावर पुश’ की भूमिका पहले ही बना चुके हैं, भाजपा प्रवक्ताओं की पैरवी के लिए बहुत काम नहीं बचा है। पवन वर्मा दूसरा चैनल छोड़ कुछ देर से यहां पहुंचते हैं, जहां एमजे अकबर पहले से बहस कर रहे हैं। पवन की आपत्ति मोदीजी की भाषा को लेकर है कि वे बिहार को भिखारी मानते हैं। यह अपमानजनक है। तिस पर एमजे अकबर चुनौती देते हैं कि भाषण में ऐसा कहीं नहीं कहा मोदीजी ने। तो पवन कहते हैं, आप वीडियो रिकॉर्डिंग देख लीजिए, उनने कहा कि दिल्ली में आकर रिरियाते हैं। यह भिखारी कहना नहीं तो और क्या है?

पैकेज ने मुद्दे बदल दिए लगते हैं। बहस काबू में नहीं है। आलोचना पैकेज के हल्ले को पूरी तरह कीलित नहीं कर पा रही। संकर्षण ने ठीक कहा कि बिहार का चुनाव अब एक नए उत्तेजक चरण में दाखिल हो गया है!

एनडीटीवी में राहुल की बाइट आ रही है। वे ग्रामीण लोगों के साथ बैठ कर कहते दिखते हैं- दिल्ली में सूट-बूट की सरकार बैठी है, हमें चाहिए कुरता-पाजामा की सरकार! वे पाजामा नहीं जीन्स पहने हैं! कट करके मुख्तार अब्बास नकवी टीप कसते हैं कि राहुलजी अपना संवाद लेखक बदल दें, क्योंकि अब उनके ये संवाद घिस गए हैं, एक्सपायर हो गए हैं!

‘वन रैंक, वन पेंशन’ को लेकर इंडिया टुडे में रिटायर्ड बड़े फौजियों की बहसें हैं, पुकारें हैं, तर्क हैं, लेकिन चैनल इसे बड़ा मुद्दा नहीं बना पा रहे! न विपक्ष बना पा रहा है।

टाइम्स नाउ वीवीआइपी रेसिज्म को खत्म करने की जिद ठाने है और कर्नाटक के मंत्रियों को आई शाम शर्मिंदा करता रहता है!
सवा लाख करोड़ रुपए के पैकेज की घोषणा से कई दिन पहले का नीलसन सर्वे देता है, जिसमें बढ़ती महंगाई न रोक पाने पर केंद्र सरकार से सड़सठ फीसद लोग नाराज दिखते हैं। सुषमा के इस्तीफा न देने से केंद्र सरकार की साख गिरी है? इसके जवाब में तैंतालीस फीसद लोग कहते हैं कि ‘हां गिरी है’! क्या भ्रष्टाचार मुक्त देश बनाने का दावा पूरा हुआ? के जवाब में उनसठ फीसद लोग कहते हंै कि ‘नहीं’! लेकिन अगर कल लोकसभा चुनाव हो, तो आप किसे वोट देंगे? के जवाब में आता है कि बावन फीसद राजग को वोट देंगे!
देखा सर्वे का जादू?

(अजदक)

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