Yamuna Chhath 2020: साल में दो बार छठ पर्व का उत्सव मनाया जाता है। एक बार चैत्र माह में दूसरा कार्तिक माह में। चैत्र शुक्ल पक्ष की षष्ठी को हर साल यमुना छठ पूजा की जाती है। जो इस बार 30 मार्च को है। इस पर्व को यमुना जयंती के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन यमुना की विशेष पूजा और आरती की जाती है। ऐसा माना जाता है कि ये मां यमुना के जन्म का दिन है। इसलिए इस पर्व वाले दिन यमुना नदी में स्नान किया जाता है और उन्हें छप्पन भोग अर्पित किये जाते हैं।
पुराणों के अनुसार माना जाता है कि इस दिन यमुना में स्नान करने से सभी प्रकार के पापों का नाश हो जाता है। यमुना के हर घाट पर यमुना जी की पूजा और आरती की जाती है। शहरों में इस दिन झाकियां निकाली जाती हैं। यमुना जी सूर्य देव की पुत्री और शनि देव और यम देव की बहन हैं।
यमुना छठ पूजा विधि:
– इस दिन यमुना नदी में स्नान अवश्य करना चाहिए। इसके बाद साफ वस्त्र धारण करें।
– इसके बाद यमुना नदी में फूल अर्पित करें और दीपक प्रज्वल्लित करें।
– दीपक जलाने के बाद यमुना नदी के किनारे बैठकर यमुना के मंत्रों का जाप करें।
– यमुना जी की कथा सनें और आरती उतारें।
– आरती उतारने के बाद क्षमा याचना करें।
– इसके बाद गाय को भोजन कराएं और पैरों की मिट्टी को माथे से लगाएं।
– गुजराती समुदाय के लोग इस पर्व को विशेष तौर पर मनाते हैं।
– यहां यमुना नदी में स्नान कर उसके जल को बांध कर वापस अपने साथ ले जाते हैं। फिर घर, गांव या फिर अपने स्थान में वैदिक मंत्रों द्वारा उस कलश को खोला जाता है।
यमुना छठ की कथा: पौराणिक समय से ही सनातन धर्म में नदियों का विशेषकर स्थान माना गया है एवं उन्हें मातृस्वरूप मान कर पूजा गया है. सूर्य पुत्री यमुना तो वैसे भी यम की बहन हैं, शनि देव भी इनके अनुज हैं. ऐसा माना जाता है की इस दिन यमुना नदी में स्नान करने से व्यक्ति के समस्त पाप धूल जाते हैं एवं वह मोक्ष को प्राप्त होता है. यमुना नदी का वार्न श्याम है, ऐसा भी माना जाता है की राधा कृष्ण के उनके तट पर विचरण करने से, राधा रानी के अंदर लुप्त कस्तूरी धीरे धीरे यमुना नदी में गलती रही एवं इसीलिए उनका रंग भी श्यामल हो गया. यमुना को कृष्ण की पत्नी भी माना जाता है. एक किवदंति यह भी है की कृष्ण के प्रेम में विलय रहने की वजह से भी उनका रंग कृष्ण के रंग समान श्यामल हो गया. भगवान कृष्ण की पटरानी एवं सूर्य पुत्री यमुना को ब्रज में माता के रूप में पूजा जाता है. गर्ग संहिता के अनुसार, जब भगवान कृष्ण ने राधे मां को पृथ्वी पर अवतरित होने का आग्रह किया. राधा मां ने भी श्री कृष्ण से अनुग्रह किया की आप वृंदावन, यमुना, गोवर्धन को भी उस स्थान पर अवलोकित करिए तभी मैं इस पृथ्वी लोक पर वास कर पाऊंगी. उनके इसी आग्रह को पूर्ण कर श्री गोविन्द ने माता यमुना को इस स्थान पर अवतरित कराया.

