शास्त्रों में माघ मास के शुक्लपक्ष की एकादशी को अजा एकादशी कहा गया है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा और रात में जगकर श्रीहरि का ध्यान करने से सारे कष्टों से मुक्ति मिलती है। शास्त्रों के अनुसार अजा एकादशी के दिन ही राजा हरिश्चंद्र को यह व्रत करने उनका खोया हुआ परिवार और साम्राज्य वापस मिला था। साथ ही पुराणों में बताया गया है कि जो व्यक्ति श्रृद्धा पूर्वक अजा एकादशी का व्रत रखता है उसके पूर्व जन्म के पाप कट जाते हैं और इस जन्म में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। इसके अलावा यह भी माना जाता है कि अजा एकादशी के व्रत करने से घर में माता लक्ष्मी का वास होता है। आगे जानते हैं कि यह ऐसा क्यों है?
शास्त्रों की मानें तो अजा एकादशी के व्रत से अश्वमेघ यज्ञ करने के समान पुण्य की प्राप्ति होती है। साथ ही इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति मृत्यु के बाद उत्तम लोक में स्थान प्राप्त करता है। वहीं ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन कुछ विशेष उपाय करने से भगवान विष्णु के साथ ही देवी लक्ष्मी की भी कृपा प्राप्त होती है। एक पौराणिक कथा के मुताबिक उस समय मुर नामक एक असुर हुआ करता था, जिससे युद्घ करते हुए भगवान विष्णु काफी थक गए थे और मौका पाकर बद्रीकाश्रम में गुफा में जाकर विश्राम करने लगे। परंतु मुर असुर ने उनका पीछा किया और उनके पीछे-पीछे चलता हुआ बद्रीकाश्रम पहुंच गया।
जब वह पहुंचा तो उसने देखा कि श्रीहरि विश्राम कर रहे हैं, उन्हें निद्रा में लीन देख उसने उनको मारना चाहा तभी विष्णु भगवान के शरीर से एक देवी का जन्म हुआ और इस देवी ने मुर का वध कर दिया। देवी के कार्य से प्रसन्न होकर विष्णु भगवान ने कहा कि देवी तुम्हारा जन्म मार्गशीर्ष मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को हुआ है इसलिए तुम्हारा नाम एकादशी होगा। भगवान विष्णु ने उन्हें वरदान दिया और कहा कि आज से प्रत्येक एकादशी को मेरे साथ तुम्हारी भी पूजा होगी। जो भी भक्त एकादशी के दिन मेरे साथ तुम्हारा भी पूजन करेगा और व्रत करेगा, उसकी हर मनोकामना पूरी होगी।


