सूर्यदेव एक मात्र ऐसे ग्रह हैं जो पूरे ब्रह्मांड को रोशनी और ऊष्मा देते हैं। यह प्रायः सभी जानते हैं कि सूर्य की ऊष्मा के बिना मनुष्य जीवन संभव नहीं है। साथ ही सूर्य में ऐसे बहुत से गुण होते हैं जिससे इन्हें भगवान का दर्जा भी दिया गया है। कहते हैं कि यदि किसी व्यक्ति पर शनि की दशा चल रही है, किसी वजह से कर्ज बहुत अधिक बढ़ गया है और जीवन में परेशानियां भी बहुत अधिक है तो ऐसे में सूर्य देवता की आराधना से सभी प्रकार के सुखों की कामना पूरी होती है। परंतु यह सब तब होता है जब भगवान सूर्य को शास्त्रोक्त विधि से जल चढ़ाया जाए। आगे जानते हैं कि सूर्यदेव को हथेली के किस हिस्से से जल चढ़ना चाहिए और इसके लाभ क्या हैं?

शास्त्रों में सूर्यदेव को जल चढ़ाने का सबसे अच्छा समय सुबह का होता है। यानि जब भगवान भास्कर उग रहे होते हैं। इसलिए हिंदू धर्म ग्रन्थों में उदीयमान (उगते हुए) सूर्य को जल अर्पण करने की बात कही गई है। जब भी सूर्य उगते हैं उस समय से लेकर 2 घंटे बाद तक का जो समय होता है वह समय सूर्यदेव को जल चढ़ाने का सबसे शुभ समय होता है। साथ ही सूर्य देवता को जल चढ़ाने के लिए हमेशा तांबे के लोटे या पात्र का उपयोग करना चाहिए।

इसके अलावा भविष्य पुराण में इस बात का जिक्र है कि सूर्यदेव को हथेली के किस हिस्से से जल चढ़ाना चाहिए। इसके अनुसार मनुष्य की दाईं हाथ की उंगलियों में सबसे आगे वाले पौरों को देवतीर्थ कहा गया है। सूर्यदेव को जल चढ़ाने के लिए हथेली के इस हिस्से का ही उपयोग करना चाहिए। माना जाता है कि इससे भगवान प्रसन्न होकर मनुष्य के दुर्भाग्य को शीघ्र ही दूर करते हैं। इसलिए शास्त्रों में ऐसा बताया गया है कि सूर्यदेव को जल हमेशा हथेली के इस हिस्से का ही उपयोग करना चाहिए।