भगवान राम और लक्ष्मण का अपहरण कर अहिरावण ने जिस स्थान पर उन्हें रखा था उसे अमेरिका के वैज्ञानिकों ने खोज निकाला है। अमेरिकी वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि उन्होंने उस स्थान का पता लगा लिया है जिसका उल्लेख रामायण में पाताल लोक के रूप में किया गया है। रामायण के अनुसार हनुमान जी भगवान राम और लक्ष्मण जी को पाताल लोक के राजा अहिरावण से मुक्त कराया था। परंतु क्या आप जानते हैं कि श्रीराम और लक्ष्मण के अपहरण से पंचमुखी हनुमान का क्या कनेक्शन है? चलिए आगे हम इसी प्रसंग को जानते हैं।

हनुमान जी का एक नाम पंचमुखी हनुमान भी है। हनुमान जी के इस स्वरूप में उत्तर दिशा में वाराह मुख, दक्षिण दिशा में नरसिंह मुख, पश्चिम में गरुड़ मुख, आकाश की तरफ हयग्रीव मुख और पूरब दिशा में हनुमान मुख। पौराणिक कथाओं के अनुसार हनुमान जी द्वारा श्रीराम को मदद करने का हरसंभव मदद करने का प्रयास किया गया है। लेकिन एक पौराणिक कथा से आज भी बहुत कम लोग परिचित हैं। कथा के अनुसार जब राम और रावण के बीच भयंकर युद्ध हो रहा था और रावण अपने पराजय की ओर था। तब इस समस्या से उबरने के लिए उसने अपने मायावी भाई अहिरावण को याद किया जो मां दुर्गा का परम भक्त होने के साथ-साथ तंत्र-मंत्र का भी जानकार था।

उसने अपने माया के दम पर भगवान श्रीराम की सारी सेना को नींद में सुला दिया। फिर राम और लक्ष्मण का अपहरण कर पाताल लोक ले गया। इसके कुछ समय बाद जब माया का प्रभाव कम हुआ तब रावण के भाई विभीषण ने यह जान लिया कि यह कार्य अहिरावण का है। और उसने हनुमान जी को हनुमान और लक्ष्मण की मदद करने के लिए पाताल लोक जाने को कहा। वहां जाने पर उन्हें उनका पुत्र मकरध्वज मिला। फिर युद्ध में उसे हराने के बाद हनुमान जी पाताल लोक में पहुंचे।

इसके बाद जौसे से वे अंदर जाने लगे उन्हें अपने सामने एक मां भवानी की एक बड़ी से मूर्ति मिली। जिसके नीचे श्रीराम और लक्ष्मण जी को बंधक बना हुआ पाया। दोनों को देख हनुमान जी के चेहरे पर खुशी आ गई। परंतु वे दुविधा में पड़ गए, जिसका कारण आसपास जलते हुए दिए थे। उस महल की अलग-अलग दिशाओं में पांच दीपक जल रहे थे। साथ ही मां भवानी के सम्मुख राम और लक्ष्मण की बलि देने की पूरी तैयारी थी।

यह देख हनुमान जी समझ गए कि यदि उन्हें अहिरावण का अंत करना है तो इन पांचों दीपकों को एक साथ बुझाना होगा। लेकिन वे इसे करे तो करे कैसे क्योंकि वे अकेले थे। लेकिन तभी उन्हें अपने पंचमुखी अवतार का ज्ञान हुआ और उसी समय उन्होंने अपना पंचमुखी हनुमान रूप धारण किया। पंचमुखी रूप धारण करते ही हनुमान जी ने एक साथ पांचों दीपकों को बुझाया और अहिरावण का अंत कर श्रीराम और लक्ष्मण को मुक्त कराया। यही कारण है कि हनुमान जी को पंचमुखी हनुमान भी कहते हैं।