नरपतदान चारण
खलील जिब्रान अपनी पुस्तक में लिखते है कि जब आप आनंदित हों, तब अपने हृदय में गहराई से झांककर देखिए और तब आप पाएंगे कि वही चीज आज आपको आनंद प्रदान कर रही है, जिसने पहले कभी आपको तकलीफ और दु:ख दिया था। और जब आप दुखी हों तब अपने हृदय में पुन: झांककर देखिए, और तब आप देख पाएंगे कि वास्तव में आप उसके लिए रो रहे हैं, जो आपका आनंद रहा है।
जीवन में अक्सर हम ठीक ऐसा ही अनुभव पाते हैं। कई बार हमें जीवन में ऐसी चीजें मिलती हैं, जो एक समय बाद आंनद और सुख देने वाली होती है, लेकिन हम उसकी अहमियत और कीमत समझ नहीं पाते हैं। और जब वह चीज हमसे दूर हो जाती है, तब उसकी अहमियत का आभास होता है और अंतस में एक हूक सी उठती है।
फिर उस भूत ने समाए पलों को याद करके सहसा अश्रुधारा बह निकलती है। जैसे कोई सच्चा ईमान भरा दोस्त मिल जाता है, जो जीवन में खुशियां और आनंद देने वाला होता हो, लेकिन जब सही परख न करके उसे अनजाने में बीच राह में छोड़ देते है, और फिर एक वक्त बात उसके साथ बिताए आंनद के पल याद आते हैं और उसकी जरूरत सी लगती है, तब उसकी अहमियत को याद कर यूं ही दुखी हो जाते हैं।
ठीक ऐसे ही कोई चीज पाकर या कोई काम करके हम दुख और तकलीफ महसूस करते हैं। लेकिन कालांतर में वही चीज आनन्द देने वाली होती है। जैसे कि ईमान और सत्य के रास्ते पर चलने वाला अक्सर दुख और तकलीफ की बातें करता है, क्योंकि उसे यह नहीं पता होता है कि यही रास्ता उसे एक समय बाद अंतर्मन में आनंद देने वाला होगा, लेकिन अब अगर कोई किसी दुख तकलीफ के साथ ही जीवन पथ पर अग्रसर होता रहता है, तो एक समय बाद उसका जीवन आनंदमय ही होता है। चूंकि, हर जीवन एक दोराहे से होकर गुजरता है।
जिसमें एक रास्ता जो कठिन लगता है और दूसरा रास्ता जो सरल लगता है। कठिन रास्ता चलने में जरूर कष्टदायक होता है ,लेकिन उसका मुकाम हमेशा बड़ा आनंद और सुख देने वाला होता है ,जबकि सहज सरल रास्ता चलने में बड़ा आसान लगता है, लेकिन उसका मुकाम जब दुख और तकलीफ देने वाला होता है, तब कठिन रास्ते को याद करते है, कि काश उस रास्ते पर चला होता तो आंनद भरा जीवन होता। जैसे कि पहला, मेहनत और ज्ञान प्राप्त कर धनोपार्जन करना कठिन रास्ता लगता है, वहीं दूसरा, चोरी, लूट ,ठगी से धनोपार्जन करना सरल।
इन दोनों में से पहले रास्ते पर चलना शुरआत में दुखी लगेगा, लेकिन लेकिन अंत में वही आंनद का स्रोत होगा। ठीक ऐसे ही दूसरे रास्ते पर चलते हैं तो, मुसीबतों का सामना करना पड़ेगा, और जब बहुत दुख और पछतावा होता तो सोचते कि काश हम मेहनत ओर ज्ञानार्जन के आनंद देने वाले रास्ते पर चलते। इसलिए सबक यही कि जीवन में तकलीफों और कांटों से भरा जीवन ही अंत में आनंद और सुख का कारक बनता है।
