Sita Navami 2019: सीता नवमी वैशाख शुक्लपक्ष की नवमी को पड़ती है। मान्यता है की इसी दिन माता सीता प्रकट हुईं थी। इसलिए वैशाख शुक्लपक्ष की नवमी को समूचे भारत में सीता नवमी का त्योहार मनाया जाता है। साल 2019 में सीता नवमी 13 मई, सोमवार को मनाई जाएगी। शास्त्रों के अनुसार वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी के दिन पुष्य नक्षत्र में जब महाराजा जनक संतान प्राप्ति की कामना से यज्ञ की भूमि तैयार करने के लिए हल से भूमि जोत रहे थे, उसी समय पृथ्वी से एक बालिका का प्राकट्य हुआ। जोती हुई भूमि को और हल की नोक को भी ‘सीता’ कहा जाता है, इसलिए बालिका का नाम ‘सीता’ रखा गया। इन सब के बीच जानते हैं कि सीता नवमी की पूजा का शुभ मुहूर्त और पूजा-विधि।
शुभ-मुहूर्त
सीता नवमी व्रत तिथि – 13 मई 2019 (सोमवार)
सीता नवमी पूजा-मुहूर्त – 10:37 से 13:10 बजे तक (13 मई 2019)
नवमी तिथि आरंभ – 17:36 बजे से (12 मई 2019)
नवमी तिथि समाप्त – 15:20 बजे (13 मई 2019)
सीता नवमी पूजा-विधि
- सीता नवमी पर व्रत और पूजन के लिए अष्टमी तिथि को ही स्वच्छ होकर शुद्ध भूमि पर सुंदर मंडप बना लेना चाहिए। यह मंडप सोलह, आठ या चार स्तंभों वाला होना चाहिए। मंडप के बीच में स्वच्छ आसन बिछाकर माता सीता और भगवान श्रीराम की विधिवत स्थापना करें।
- पूजा के लिए सोने, चांदी, ताम्र, पीतल, लकड़ी और मिट्टी, इनमें से अपनी क्षमता के अनुसार किसी एक धातु से बनी हुई प्रतिमा की स्थापना करें। मूर्ति न होने पर चित्र द्वारा भी पूजन किया जा सकता है।
- नवमी के दिन स्नान आदि के बाद जानकी-राम का श्रद्धापूर्वक पूजन करें।
- ‘श्री रामाय नमः’ और ‘श्री सीतायै नमः’ मूल मंत्र से पूजा करनी चाहिए।
- ‘श्री जानकी रामाभ्यां नमः’ मंत्र द्वारा आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, पंचामृत स्नान, वस्त्र, आभूषण, गन्ध, सिन्दूर तथा धूप-दीप और नैवेद्य आदि उपचारों द्वारा श्रीराम-जानकी का पूजन और आरती करनी चाहिए।
- दशमी के दिन फिर विधिपूर्वक भगवती सीता-राम की पूजा-अर्चना के बाद मण्डप का विसर्जन कर देना चाहिए। इस प्रकार श्रद्धा और भक्ति से पूजन करने वाले पर भगवती सीता और भगवान राम की कृपा प्राप्त होती है।

