Shri Hit Premanand Govind Sharan Ji Maharaj: प्रेमानंद गोविंद शरण महाराज का एक वीडियो सोशल मीडिया में काफी वायरल हो रहा है। जिसमें एकांतिक वार्तालाप में आए कुछ संत प्रेमानंद महाराज जी से कहते हैं कि आज के समय में कुछ धार्मिक स्थलों में चर्बी मिला या फिर अशुद्ध प्रसाद मिलता है जिसके कारण वास्तव में क्या हमारा धर्म भ्रष्ट हो गया है। इस बात पर प्रेमानंद महाराज जी कहते हैं कि आजकल जब हम यज्ञ करते हैं, तो अक्सर सनातन परंपराओं से जुड़ी कई बातें लुप्त होती नजर आती हैं। कई स्थानों पर जाति-भेद भी देखा जाता है, जबकि वेदों की परंपरा समावेश और शुद्ध बुद्धि की बात करती है।
वेदों को धारण करने के लिए आहार और विचार की शुद्धि आवश्यक है, लेकिन आज अधिकांश वस्तुएं रसायनों और मिलावट के कारण अपवित्र मानी जाती हैं। चाहे अनाज हो, घी हो या दूध। यही कारण है कि कई लोग यज्ञ सामग्री की शुद्धता को लेकर चिंतित रहते हैं। लेकिन वास्तव में भाव ही सबसे बड़ा आधार है। यदि हमारे इष्ट के लिए जो भी अर्पित किया गया है। वह प्रसाद बनकर वापस आता है, तो वह प्रसाद ही माना जाता है न कि मात्र लड्डू या कोई अन्य पदार्थ। प्रसाद का सम्मान उसके भाव में है, न कि उसकी सामग्री में। जैसे गोपियों और दुर्वासा मुनि की कथा बताती है कि महापुरुष भाव से ग्रस्त नहीं होते। वे इच्छा रहित होते हैं और उनका आचरण लोक के नियमों से ऊपर होता है।
प्रेमानंद महाराज आगे कहते हैं कि ठाकुरजी को भोग लग चुका है, इसलिए जो हमें मिलता है, वह केवल प्रसाद है। उसमें क्या था, कैसे बना। इस पर शंका करना प्रसाद-तत्व का अपमान है। यदि कोई कह दे कि उसमें अशुद्धि थी, तब भी प्रसाद का ही आनंद रहना चाहिए, क्योंकि वह हमारे इष्ट की कृपा का अंश है। प्रसाद में ‘शुद्धिकरण’ की बात करना उसके दिव्य स्वरूप को कम करना है।
500 साल बाद शनि और बुध हुए मार्गी, इन राशियों का हो सकता है भाग्योदय, नौकरी-बिजनेस में तरक्की के योग
महाराज जी आगे कहते हैं कि सावधानी रखना आवश्यक है कि किसी भी प्रकार की मिलावट या धोखे से बचा जाए, क्योंकि यह आस्था और धर्म के प्रति अपराध है। लेकिन जहां प्रसाद का भाव है, वहां भ्रष्ट होने का प्रश्न ही नहीं उठता। प्रसाद में हमारा ध्यान केवल श्रद्धा और भाव पर होना चाहिए। उसी में उसकी संपूर्ण महिमा निहित है।
नए साल में मिथुन, कर्क के साथ सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। ऐसे में वह साल के आरंभ में ही चंद्रमा के साथ युति करके गजकेसरी राजयोग का निर्माण करेंगे। ऐसे में 12 राशियों के जीवन में किसी न किसी तरह से प्रभाव देखने को मिलने वाला है। लेकिन इन तीन राशि के जातकों को किस्मत का पूरा साथ मिल सकता है। जानें इन लकी राशियों के बारे में
डिसक्लेमर- इस लेख को विभिन्न माध्यमों जैसे ज्योतिषियों, पंचांग, मान्यताओं या फिर धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है। इसके सही और सिद्ध होने की प्रामाणिकता नहीं दे सकते हैं। इसके किसी भी तरह के उपयोग करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।
