Manik Ratna Identification: रत्न शास्त्र में माणिक रत्न का विशेष महत्व है। ये ग्रहों के राजा सूर्य का रत्न माना जाता है। इसे माणिक्य और इंग्लिश में Ruby Gemstone कहा जाता है। इसे रत्नों का राजा कहा जाता है। इस रत्न को धारण करने से जातकों की कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है। इसके साथ ही आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता में तेजी से बढ़ोतरी होने के साथ-साथ मानसिक शांति मिलती है। इसके अलावा कई रोगों से भी बचाव हो सकता है। आज के समय में माणिक्य बाजार में कई तरह से मिलते हैं। असली-नकली की पहचान न कर पाने के कारण इसका नकारात्मक प्रभाव या फिर बिल्कुल भी प्रभाव नहीं होता है। आइए इस लेख में जानते हैं माणिक्य रत्न कब, किसे और कैसे धारण करना चाहिए। इसके अलावा असली और नकली माणिक्य की पहचान…
माणिक्य (Ruby) क्या है?
माणिक्य मणिकरण प्रजाति का रत्न है और इसका रंग लाल होता है। इसे रत्नों का राजा कहा जाता है, क्योंकि ये पुखराज, हीरे, नीलम आदि से भी काफी महंगा होता है। सूर्य अग्नि प्रधान ग्रह है और माणिक्य उसका प्रमुख रत्न माना जाता है। रासायनिक दृष्टि से माणिक्य एल्युमिनियम ऑक्साइड से बना होता है, जो इसे अत्यधिक शक्तिशाली बनाता है।
माणिक्य रत्न पहनने के लाभ (Benefits of Ruby Gemstone)
- माणिक्य पहनने से जीवन में कई सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलते हैं।
- अगर माणिक्य आपके लिए अनुकूल होता है, तो चेहरे में अलग ही चमक आ जाती है।
- आत्मविश्वास तेजी से बढ़ता है।
- नेतृत्व क्षमता भी विकसित होती है
- सरकारी कामों, प्रशासन या फिर राजनीति से जुड़े क्षेत्रों में खूब सफलता हासिल होती है।
- पिता और परिवार के साथ आपके संबंध अच्छे बने रहते हैं।
- मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है। माणिक्य रत्न धारण करने से चिंता, डिप्रेशन और नकारात्मक विचारों से मुक्ति मिल सकती है।
- समाज में मान-सम्मान की तेजी से वृद्धि होती है।
- शरीर में रक्त संचार बेहतर होता है। ऐसे में दिल सेहतमंद रहता है।
- अध्यात्म की ओर आपका झुकाव अधिक होता है।
- लव लाइफ और दांप्तय जीवन में खुशियां आती है।
माणिक्य किसे पहनना चाहिए? (Who Should Wear Ruby)
- रत्न ज्योतिष के अनुसार, मेष, सिंह और धनु लग्न वालों के लिए माणिक्य धारण करना सबसे अच्छा माना जाता है।
- कर्क लग्न, वृश्चिक लग्न और मीन लग्न में माणिक्य धारण करने से नार्मल फल मिलता है।
- कुछ विशेष दशाओं में वृषभ लग्न के जातक भी माणिक्य धारण कर सकते हैं, लेकिन ये केवल विशेष परिस्थितियों में ही लाभ दे सकता है।
- अगर आपकी कुंडली में सूर्य ग्रह की स्थिति कमजोर है या सूर्य की स्थिति कुंडली में सही नहीं है।
- आत्मविश्वास, स्वास्थ्य और नाम-यश में लाभ पाने के लिए ये पहन सकते हैं।
- सिंह राशि और धनु राशि के लोग माणिक्य धारण कर सकते हैं।
माणिक्य किसे नहीं पहनना चाहिए? (Who Should Not Wear Ruby)
- रत्न शास्त्र के अनुसार, कुछ जातकों को माणिक्य रत्न बिल्कुल भी नहीं पहनना चाहिए। कन्या लग्न, मिथुन लग्न, तुला लग्न, मकर लग्न और कुंभ लग्न को नहीं पहना चाहिए
- जिन लोगों को उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर), हृदय से संबंधित रोग या फिर कार्डियो से संबंधित समस्याएं हैं।
- जिन जातकों के पिता के साथ संबंध पहले से खराब हैं और सुधरने की संभावना बिल्कुल भी नहीं है, तो उन्हें रत्न नहीं पहनना चाहिए।
- जो जातक शनि से संबंधित क्षेत्रों जैसे धातु, निर्माण, कंस्ट्रक्शन या फिर भारी उद्योग में काम करते है, तो बिना ज्योतिषी से पूछे माणिक्य धारण नहीं करें।
असली और नकली माणिक्य की पहचान (Real vs Fake Ruby Gemstone)
मार्केट में माणिक्य के नाम पर कई लाल, गुलाबी रंग के पत्थर बेचे जाते हैं। लेकिन जरूरी नहीं हैं कि वह असली हो। माणिक्य एक कीमती रत्न है, जिसका मुख्य खनिज स्रोत बर्मा (म्यांमार), थाईलैंड, मेडागास्कर, मोजाम्बिक और भारत हैं। भारत में पाए जाने वाले माणिक्य की गुणवत्ता थोड़ी कम होती है, लेकिन यह प्राकृतिक होता है। बर्मा के माणिक्य सबसे उच्च गुणवत्ता वाले माने जाते हैं और बहुत प्रसिद्ध हैं।
कैसे करें असली माणिक्य की पहचान
- असली और नकली माणिक्य में अंतर पहचानने के लिए रत्न के भीतर की संरचना देखना सबसे महत्वपूर्ण होता है।
- असली माणिक्य में सिल्क नामक संरचना मौजूद होती है, जो रत्न की सतह या अंदर कहीं भी दिखाई दे सकती है।
- माणिक्य में पाइराइट, ऐपेटाइट और स्पाइनल जैसी क्रिस्टल इंक्लूजन भी मौजूद हो सकती हैं।
- स्पाइनल भी महंगा और उपयोगी रत्न है, जो माणिक्य के विकल्प के रूप में पहना जा सकता है।
- नकली माणिक्य (सिंथेटिक या लैब में बनाए गए) में अलग प्रकार के इंक्लूजन होते हैं, जिन्हें फ्लक्स इंक्लूजन कहा जाता है। यह असली इंक्लूजन से अलग दिखाई देते हैं।
- पुराने समय में माणिक्य के विकल्प के रूप में क्यूबिक जीरकोनिया या अन्य इमिटेशन भी इस्तेमाल किए जाते थे, लेकिन ये असली माणिक्य जैसा प्रभाव या चमक नहीं देते।
माणिक्य हमेशा प्रमाणित लैब सर्टिफिकेट और जीएसटी बिल के साथ ही खरीदें। सर्टिफिकेट में रत्न की प्राकृतिकता, रंग, क्लैरिटी, आकार और हीटिंग/अनहीटिंग जैसी जानकारी दी जाती है। प्रमाणित माणिक्य ऑनलाइन भी खरीदा जा सकता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि रत्न वास्तविक और मूल्य के अनुसार सही है।
माणिक्य का सबसे अच्छा ओरिजिन कौन सा है?
बर्मा के माणिक्य में हीटेड (ट्रीटेड) और अनहीटेड (प्राकृतिक) स्टोन मिलते हैं। ट्रीटेड माणिक्य को “न्यू बर्मा” कहा जाता है, जबकि प्राकृतिक और बिना हीटिंग वाले माणिक्य को “ओल्ड बर्मा” या नेचुरल रूबी कहा जाता है। ओल्ड बर्मा बहुत मूल्यवान होता है। मेडागास्कर के माणिक्य हल्के गुलाबी-लाल रंग के सुंदर स्टोन होते हैं, जो भी प्राकृतिक होते हैं और वजन के अनुसार महंगे होते हैं।
माणिक्य पहनने के नुकसान
- माणिक्य पहनने के बाद 1-2 दिन में ही सकारात्मक या फिर नकारात्मक प्रभाव दिखने आरंभ हो जाते हैं, जिसे समय में पहचानना बेहद जरूरी है।
- अगर आपको माणिक्य अनुकूल नहीं है, तो सिर में लगातार भारीपन, दर्द, आंखों से पानी आना।
- हड्डियों में पीड़ा, नींद में बाधा आती है।
- फिर बिना किसी कारण बदनामी का सामना करना पड़ सकता है।
- परिवार और दोस्तों के साथ रिश्ता में खटास आ जातना।
- पित्त का तेजी से बढ़ जाता, जिससे मुंह का टेस्ट कड़वा हो जाना।
- तेजी से ब्लड प्रेशर में कंट्रोल न रहना।
- कार्यस्थल पर विवाद या काम की गुणवत्ता में बुरा असर पड़ना।
- निर्णय लेने की क्षमता काफी कमजोर हो जाती है।
माणिक्य किस धातु में पहनें? (Metal for Ruby)
माणिक्य रत्न धारण करना चाहते हैं, तो इसे सोने या तांबे की अंगूठी में पहनना लाभकारी हो सकता है।
माणिक्य कितने कैरेट का पहनें?
रत्न ज्योतिष के अनुसार, 3 से 6 कैरेट या फिर 3 रत्ती से अधिक का माणिक्य पहनना लाभकारी हो सकता है। इसके अलावा शरीर के भार के हिसाब से भी इस रत्न को धारण कर सकते हैं। अपने शरीर के वजन का कम से कम 1/10वां हिस्सा या फिर 1/12वां) कैरेट में पहनना चाहिए। अगर आपका वजन 60 किलो है, तो आपको 5-6 कैरेट का माणिक्य पहनना चाहिए।
माणिक्य पहनने की विधि (How to Wear Ruby)
रत्न शास्त्र के अनुसार, माणिक्य को रविवार के दिन पहनना सबसे अच्छा माना जाता है। इस दिन अंगूठी को लेकर सबसे पहले शुद्धिकरण करेंगे। इसके लिए गंगाजल, कच्चे दूध और शहद के मिश्रण में कुछ देर इसे डुबोकर रख देंदे। इसके साथ ही सूर्यदेव की पूजा करने के साथ ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः मंत्र का 108 बार जाप करें। इसके बाद इसे अनामिका उंगली (Ring Finger) पर धारण कर लेंगे। माणिक्य को धारण करने के बाद गेहूं, गुड़, लाल कपड़ा या फिर तांबा का दान करना चाहिए।
धारण करने की सही विधि
| विवरण | सही तरीका |
| शुभ दिन | रविवार (सूर्योदय के समय) |
| उंगली | अनामिका (Ring Finger) |
| धातु | सोना या तांबा |
| कैरेट | शरीर के वजन का 1/10वां हिस्सा (उदा: 60kg वजन = 6 कैरेट) |
| मंत्र | ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः (108 बार) |
शनि का रत्न नीलम पहनना काफी लाभकारी माना जाता है। लेकिन कब कैसे और क्यों पहनना चाहिए। इससे बारे में जानना बेहद जरूरी है। इसके अलावा असली और नकली नीलम की पहचान करना भी बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं कहीं आप नकली नीलम तो नहीं पहन रहे? इन 4 आसान तरीकों से करें पहचान, जानें शनि के इस रत्न को धारण करने की सही विधि
डिसक्लेमर- इस लेख को विभिन्न माध्यमों जैसे ज्योतिषियों, पंचांग, मान्यताओं या फिर धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है। इसके सही और सिद्ध होने की प्रामाणिकता नहीं दे सकते हैं। इसके किसी भी तरह के उपयोग करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।
