आमेर किले को अंबर पैलेस या अंबर किला कहा जाता है। यह किला राजस्थान के आमेर नामक स्थान पर एक पहाड़ी पर स्थित है। जयपुर शहर से 11 किलोमीटर की दूरी पर स्थित आमेर किला पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है। कहते हैं कि इस किले को राजा मनसिंह द्वारा बनवाया गया था। यह हिन्दू और मुस्लिम वास्तुकाला के लिए प्रसिद्ध है। किले में बहुत से दर्शनीय दरवाजे और छोटे-छोटे तालाब बने हुए हैं। साथ ही ये तालाब किले के अंदर पानी का मुख्य स्रोत हैं। कहते हैं कि यह प्राचीन काल में अंबवाती और अंबिकपुर के नाम से जाना जाता था। आगे जानते हैं इस किले का रहस्य।
आमेर का किला लाल बलुआ पत्थर और सफेद संगमरमर से बना है। इस किले के अंदर बहुत ही आकर्षक कमरे बने हैं। माना जाता है कि इस आमेर किले का निर्माण दो शताब्दियों में किया गया था। साथ ही यह महल लंबे समय तक राजपूत महाराजाओं के मुख्य निवास स्थान के रूप में इस्तेमाल किया गया। राजस्थान के अकर्षणों में ऐतिहासिक आमेर अपनी गौरवशाली कथाओं और नक्काशी कलात्मक शैली शीश महल के लिए प्रसिद्ध है। आमेर का किला उच्च कोटि की शिल्पकला का उत्कृष्ट नमूना माना जाता है। इस किले के अंदर बने महल अपने आप में बेमिसाल है। उन्हीं महलों में से एक है शीश महल जो अपनी आलीशान और अद्भुत नक्कासी के लिए जाना जाता है। ऐतिहासिक किले में राजा मानसिंह, राजा जयसिंह और राजा सवाई सिंह ने बनवाया था।
किला में दीवान-ए-खास, दीवान-ए-आम, शीश महल, जय मंदिर और सुख निवास भी बना हुआ है। यहां हमेशा ठंढी और हवा चलती रहती है। वहीं किले में प्रवेश द्वार गणेश गेट पर चैतन्य पंथ की देवी शीला देवी का मंदिर बना हुआ है जो राजा मनसिंह को दिया गया था। कहते हैं कि जब उन्होंने 1604 ई में बंगाल में जैसोर के राजा को हराया था। महल और जयगढ़ किले को एक ही कॉम्प्लेक्स माना जाता है क्योंकि दोनों किले एक गुप्त मार्ग से जुड़े हुए हैं। कहते हैं कि युद्ध के समय इस गुप्त रास्ते को शाही परिवार के सदस्यों को बाहर निकालने के लिए किया जाता था। बता दें कि 2013 में इस किले को यूनेस्को वर्ल्ड हेरीटेज में शामिल किया गया।

