मकान या भवन बनवाते समय उसकी शुरुआत विधि-विधान से की जाती है। इसमें वास्तु सलाह को भी ध्यान में रखा जाता है। हिन्दू धार्मिक परंपरा के अनुसार कोई भी मकान बनवाने से पहले शुभ मुहूर्त देखा जाता है और उसके अनुरूप ही आगे का कार्य किया जाता है। साथ ही जब किसी भवन की नींव राखी जाती है तो तो पूजा-पाठ के बाद इसमें सर्प और कलश डाला जाता है। इसके पीछे पौराणिक और धार्मिक महत्व भी बताया गया है। परंतु आज भी इस बात से बहुत कम लोग परिचित हैं कि आखिर इसे मकान की नींव में क्यों रखा जाता है? आगे हम इसे जानते हैं।

भवन निर्माण के समय विशेष रूप से चांदी या सोने से बना सर्प और कलश रखा जाता है। जिसके बारे में पुराणों में कहा गया है कि पृथ्वी के नीचे पाताल लोक स्थित है। जिसके स्वामी शेषनाग हैं। साथ ही पौराणिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है यह समूची पृथ्वी शेषनाग के फण पर टिकी है। कहते हैं कि परमदेव ने विश्वरूप अनंत नामक देवस्वरूप शेषनाग को पैदा किया। यह शेषनाग पर्वत, तालाब और नदियों सहित पृथ्वी को धारण किए हुए हैं। इसके अलावा गीता में भी श्रीकृष्ण ने कहा है कि- ‘अनन्तश्चास्मि नागानां’ यानी ‘मैं नागों में शेषनाग हूं’। साथ ही शेषनाग को हिन्दू धर्म में देवता मानकर पूजा की जाती है। यही कारण है कि मकान की नींव में सर्प रखा जाता है।

वहीं नए भवन-निर्माण के समय इसकी नींव में कलश भी गाड़ा जाता है। कलश को भगवान विष्णु का रूप माना जाता है। इसी कारण विष्णु रूपी कलश में लक्ष्मी स्वरूप सिक्का डालकर फूल और दूध पूजा में चढ़ाया जाता है। जो नागों को सबसे ज्यादा प्रिय होता है। नाग भगवान शिव के गले का आभूषण भी है। इसी विश्वास से यह प्रथा आज भी चल रही है। इसके अलावा मकान की नींव का पूजन इसी मनोवैज्ञानिक विश्वास के आधार किया जाता है कि जैसे शेषनाग अपने फण पर पूरी पृथ्वी को धारण किए हुए हैं, ठीक उसी तरह घर की नींव भी प्रतिष्ठित किए हुए चांदी के नाग के फण पर पूरी मजबूती के साथ स्थापित रहे।