हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार जब भगवान शिव के नेत्रों से जब आंसू निकला तब रुद्राक्ष की उत्पत्ति हुई। साथ ही उनकी आंखों से जो पहली बार और पहली बूंद आंसू गिरी, वह एक मुखी रुद्राक्ष के रूप में उत्पन्न हुआ। कहते हैं कि रुद्राक्ष को धरण करने वाला व्यक्ति भगवान शिव को प्रिय होता है। वहीं एक मुखी रुद्राक्ष को साक्षात शिव का ही रूप माना जाता है। हिंदू धर्म में अपनी आस्था रहने वाले और शिव को मानने वाले लोग आज भी रुद्राक्ष धारण करते या किए हुए हैं। आगे हम जानते हैं एक मुखी रुद्राक्ष क्यों धारण करने से क्या लाभ होते हैं और इसे पहनने की सही विधि क्या है?
ज्योतिष के अनुसार यदि कुंडली में सूर्य ग्रह छठवें, आठवें और बारहवें स्थान का स्वामी है। इसके साथ ही यदि सातवें स्थान पर बैठकर वैवाहिक जीवन में परेशानी पैदा कर रहे हैं या फिर कुंडली में सूर्य ग्रह, शनि, राहु और केतु के साथ बैठा है तो ऐसे में एकमुखी रुद्राक्ष धारण करने की सलाह दी जाती है। कहते हैं कि इसे धारण करने के बाद व्यक्ति पवित्र और अच्छे आचरण करने वाला बनता है। इसके अलावा एक मुखी रुद्राक्ष धारण करने की सलाह उस स्थिति में भी दी जाती है जब किसी व्यक्ति की नौकरी खतरे में है। वहीं जो लोग राजनीति में सफलता पाना चाहते हैं उन्हें भी यह रत्न पहनने की सलाह दी जाती है।
विधि: सबसे पहले कांसे के शुद्ध बर्तन में पंचामृत और पंचगव्य बना लें और उसमें गुलाब फूल के पत्ते डाल दें। अब बारी-बारे से रुद्राक्ष या उसकी माला को दोनों में स्नान कराएं। फिर भगवान शिव के मंत्र का जप करें। इसके लिए शिव पंचाक्षर मंत्र हो तो अच्छा होता है। इसके बाद फिर से इसे गंगाजल में स्नान कराएं। फिर एक साफ लाल कपड़े पर रख दें। फिर चंदन, बिल्वपत्र, लाल पुष्प, धूप-दीप द्वारा रुद्राक्ष की पूजा करके अभिमंत्रित करें। इसके अलावा शिव-गायत्री मंत्र का भी जाप कर सकते हैं। मंत्र है- “ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥” इस मंत्र का 11 बार जाप करें। अब इस रुद्राक्ष को किसी शिवलिंग पर अर्पित कर दें। फिर भगवान शिव से विनती करें कि वो अपनी कृपा इसके माध्यम से हमेशा बनाए रखें।

