कूर्म जयंती वैशाख मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन भगवान विष्णु कच्छप (कछुआ) अवतार लेकर प्रकट हुए थे। साथ ही समुद्र मंथन के वक्त अपनी पीठ पर मंदार पर्वत को उठाकर रखा था। साल 2019 में कूर्म जयंती 18 मई, शनिवार को मनाई जाएगी।
पौराणिक ग्रन्थों में भगवान विष्णु के कूर्म आवार के बारे में बहुत सारी कथा आती है। जिसमें सबसे अधिक महत्व विष्णु पुराण में आयी कथा के अनुसार भगवान विष्णु ने कूर्म (कछुए) का अवतार लेकर समुद्र मंथन में सहायता की थी। कूर्म अवतार को ‘कच्छप अवतार’ भी कहते हैं। कच्छप अवतार में श्री हरि ने क्षीरसागर के समुद्र मंथन में मंदार पर्वत को अपने कवच पर रखकर संभाला था। कहते हैं कि इसी समुद्र मंथन में भगवान विष्णु, मंदार पर्वत और वासुकि सांप की मदद से देवताओं और राक्षसों ने चौदह रत्न पाए थे।
इसकी कथा इस प्रकार है- एक बार महर्षि दुर्वासा ने देवताओं के राजा इंद्र को श्राप देकर श्रीहीन कर दिया। इंद्र जब भगवान विष्णु के पास गए तो उन्होंने समुद्र मंथन करने के लिए कहा। तब इंद्र भगवान विष्णु के कहे अनुसार दैत्यों व देवताओं के साथ मिलकर समुद्र मंथन करने के लिए तैयार हो गए। समुद्र मंथन करने के लिए मंदराचल पर्वत को मथानी और नागराज वासुकि को नेती बनाया गया। देवताओं और दैत्यों ने अपना मतभेद भुलाकर मंदराचल को उखाड़ा और उसे समुद्र की ओर ले चले, लेकिन वे उसे अधिक दूर तक नहीं ले जा सके।
तब भगवान विष्णु ने मंदराचल को समुद्र तट पर रख दिया। देवता और दैत्यों ने मंदराचल को समुद्र में डालकर नागराज वासुकि को नेती बनाया। परंतु मंदराचल के नीचे कोई आधार नहीं होने के कारण वह समुद्र में डूबने लगा। यह देखकर भगवान विष्णु विशाल कूर्म (कछुए) का रूप धारण कर समुद्र में मंदराचल के आधार बन गए और भगवान कूर्म की विशाल पीठ पर मंदराचल तेजी से घुमने लगा।

