हिन्दू कैलेंडर में ज्येष्ठ का महीना तीसरा महीना होता है। इस महीने में सूर्य की गर्मी अपने चरम पर रहती है। इसलिए गर्मी भी भयंकर होती है। वहीं सूर्य की ज्येष्ठता के कारण इस माह को ज्येष्ठ कहा जाता है। ज्येष्ठा नक्षत्र के कारण भी इस माह को ज्येष्ठ कहा जाता है। इस महीने में धर्म का संबंध जल से जोड़ा गया है। ताकि जल का संरक्षण किया जा सके। ज्येष्ठ मास में सूर्य और वरुण देव की उपासना विशेष फलदायी होती है। साल 2019 में ज्येष्ठ मास की शुरुआत 19 मई, रविवार से हो रही है जो कि 19 जून तक रहेगा। आगे जानते हैं ज्येष्ठ मास का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व।
ज्येष्ठ मास का वैज्ञानिक महत्व क्या है?
ज्येष्ठ मास में वातावरण और शरीर में जल का स्तर गिरने लगता है। इसलिए जल का सही और पर्याप्त उपयोग करना चाहिए। साथ ही इस महीने में सन स्ट्रोक और खान पान की बीमारियों से बचाव आवश्यक है। इस माह में हरी सब्जियां, सत्तू, जल वाले फलों का प्रयोग लाभदायक होता है। साथ ही साथ इस महीने में दोपहर का विश्राम करना भी लाभदायक होता है। वहीं इस महीने में जल (वरुण) देव और सूर्य की कृपा पायी जा सकती है। इसके लिए नित्य प्रातः और संभव हो तो सायं भी पौधों में जल दें। प्यासों को पानी पिलाएं, लोगों को जल पिलाने की व्यवस्था करें। जल की बर्बादी न करें, घड़े सहित जल और पंखों का दान करें। इसके अलावा रोज सुबह और शाम के समय सूर्य मंत्र का जाप करें। यदि सूर्य संबंधी समस्या है तो ज्येष्ठ के हर रविवार को उपवास रखें।
ज्येष्ठ मास के मंगलवार की क्या महिमा है?
ज्येष्ठ के मंगलवार को हनुमान जी की विशेष पूजा का विधान शास्त्रों में बताया गया है। इस दिन हनुमान जी को तुलसी दल की माला अर्पित की जाती है। साथ ही हलवा पूरी या मीठी चीजों का भोग भी लगाया जाता है। इसके बाद उनकी स्तुति की जाती है। इसके अलावा इस दिन निर्धनों में हलवा पूरी और जल का वितरण करना शुभ माना गया है। मान्यता है कि ऐसा करने से मंगल सम्बन्धी हर समस्या का निदान हो जाएगा।

