Jivitputrika Vrat (Jitiya Vrat): जीवित्‍पुत्रिका (Jivitputrika) व्रत कहिए या जितिया (Jitiya) व्रत, हिंदू धर्म का सबसे कठिन व्रत कल नहाय खाय के बाद से शुरू हो गया है। अब तकरीबन 40 घंटे तक मांएं अपने बेटों के लिए निर्जला व्रत पर रहेंगी। कल यानी 22 सितंबर को दोपहर 3 बजे के बाद ही पारण का मुहूर्त है। हालांकि अभी भी (jitiya vrat 2019 kab hai) दो अलग अलग पंचांगों के अनुसार तारीख और मुहूर्त को लेकर मत अलग अलग है। बिहार में जहां ज्यादातर महिलाओं का व्रत शुरू हो चुका है वहीं उत्तर भारत के अन्य जगहों पर कुछ लोग 22 सितंबर को व्रत रखकर 23 सितंबर को पारण करेंगे। इस व्रत को कठिन इसलिए माना जाता है क्योंकि इसमें मां इस व्रत के पूरा होने तक एक भी बूंद पानी भी नहीं पी सकती।

जिउतिया व्रत:जानिए क्या कहता है मिथिला पंचांग

बनारस पंचांग के अनुसार 22 सितंबर को जिउतिया व्रत रखा जायेगा और 23 सितंबर की सुबह इस व्रत का पारण होगा। वहीं मिथिला और विश्वविद्यालय पंचांग दरभंगा से चलनेवाले श्रद्धालु 21 सितंबर को व्रत रखेंगे और 22 सितंबर की दोपहर तीन बजे इसका पारण करेंगे। जितिया व्रत को लेकर एक मत चन्द्रोदयव्यापिनी अष्टमी का पक्षधर है तो दूसरा सूर्योदयव्यापिनी अष्टमी का। इस बार 21 सितम्बर दिन शनिवार को अष्टमी अपराह्न 3.43 से प्रारम्भ हो जाएगी और 22 सितम्बर, रविवार को अपराह्न 2.49 तक रहेगी।

हिंदू पंचांग में तिथि को मानें तो जितिया (Jitiya) व्रत अश्विन माह कृष्‍ण पक्ष की सप्‍तमी से नवमी तक होता है। मुख्य व्रत अष्टमी को ही रखा जाता है। सप्तमी को नहाय खाय करने के बाद ही ये व्रत शुरू हो जाता है। जबकि नवमी के दिन पारण के मुहूर्त के अनुसार ही व्रत खत्म होता है।

जितिया व्रत (jitiya vrat 2019 kab hai) रखने वाले जान लें अष्टमी तिथ‍ि और शुभ मुहूर्त
प्रारंभ: 21 सितंबर को रात 08.21 बजे से
समाप्‍त: 22 सितंबर को रात 07.50 बजे तक

जितिया व्रत तीन दिन का कठिन व्रत है, जानिए पूजा विधि (Jitiya Vrat Vidhi)

पहला दिन: जितिया व्रत रखने वाली महिलाएं पहले दिन नहाय-खाय करती हैं। यानी महिलाएं नहाने के बाद सिर्फ एक बार शुद्ध कच्ची मिट्टी के चूल्हे पर बना भोजन ही करती हैं और फिर पूरे दिन कुछ नहीं खातीं।
दूसरा दिन: व्रत में दूसरे दिन यानी खुर जितिया ही क​ठिन व्रत शुरू होता है। यानी अष्टमी तिथि शुरू होते ही मांओं का निर्जला व्रत शुरू हो जाता है। वह अब अगले दिन ही पारण के बाद एक बूंद पानी भी ले सकती हैं।
तीसरा दिन: जितिया व्रत के तीसरे दिन मुहूर्त के अनुसार ही पारण होता है। इस दिन व्रत का पारण करने के बाद ही मांओं को सबसे पहले जल ग्रहण कराया जाता है उसके बाद वह खाना खाती हैं।

जितिया व्रत (Jitiya Vrat Katha in Hindi) के पीछे ऐतिहासिक महत्व क्या है

जितिया व्रत का सीधा जुड़ाव इतिहास के महाभारत काल से है। महाभारत युद्ध में पिता की मौत के बाद बेहद नाराज अश्वत्थामा बदले की भावना से पांडवों के शिविर में घुस गया। वहां पांच लोग सो रहे थे। अश्वत्थामा ने उन्‍हें पांडव समझकर मार डाला, जबकि वे सभी द्रोपदी की पांच संतानें थीं। फिर अुर्जन ने अश्वत्थामा को बंदी बनाकर उसकी दिव्‍य मणि छीन ली। अश्वत्थामा ने फिर से बदला लेने के लिए इस बार अभिमन्‍यु की पत्‍नी उत्तरा के गर्भ में पल रहे बच्‍चे को मारने का प्रयास किया। उसने ब्रह्मास्‍त्र का प्रयोग कर उत्तरा के गर्भ को नष्‍ट कर दिया। तब भगवान श्रीकृष्‍ण ने अपने सभी पुण्‍यों का फल उत्तरा की अजन्‍मी संतान को देकर गर्भ में ही उसे जीवित कर दिया। गर्भ में मरकर जीवित होने के कारण उस बच्‍चे का नाम जीवित्‍पुत्रिका पड़ा। तब से ही संतान की लंबी आयु के लिए महिलाएं जितिया का व्रत रखने लगीं।