Health Astrology 2020: ज्योतिष शास्त्र एक ऐसा विषय है जिसके आधार पर किसी भी व्यक्ति के वर्तमान, भूतकाल और भविष्य तक की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। और तो और इस बात का भी पता लगाया जा सकता है कि अमुक व्यक्ति कौन सी बीमारी से कब पीड़ित होने वाला है। ज्योतिष के मुताबिक रोगों का संबंध ग्रहों से होता है क्योंकि हर ग्रह शरीर के किसी न किसी हिस्से को प्रभावित करता है। जानिए रोगों को लेकर क्या कहता है ज्योतिष शास्त्र…
जन्म कुंडली का 6ठा भाव रोग का माना गया है। 6ठे भाव का अधिपति जिसे षष्ठेश कहते हैं, रोग का प्रतिनिधि होता है। यदि किसी जातक की जन्म पत्रिका में 6ठे भाव पर किसी शुभ ग्रह का प्रभाव पड़ रहा हो तो ऐसा जातक अक्सर रोग से पीड़ित रहता है। लेकिन अगर इसके विपरीत यदि 6ठे भाव पर अशुभ ग्रहों का प्रभाव हो तो ऐसा जातक अधिकांश निरोगी व स्वस्थ जीवन व्यतीत करता है।
दशा से पता चलता है कि आप कब बीमार होने वाले हैं? जन्म कुंडली में केवल रोगकारक ग्रह स्थितियां होने से ही आप बीमार या स्वस्थ नहीं हो जाते, बल्कि इसमें विंशोत्तरी व योगिनी दशा भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। जब किसी व्यक्ति पर षष्ठेश की महादशा व अंतरदशा के साथ मारकेश की दशा हो तब जातक के रोगों से परेशान होने की पूर्ण आशंका रहती है।
भावेश बताता है कि रोग कौन सा है? किसी भी व्यक्ति की जन्म पत्रिका को देखकर केवल रोग का समय ही नहीं, बल्कि कौन सा रोग है इस बात का भी पता चल जाता है। यदि कुंडली में षष्ठेश चतुर्थेश की युति है एवं चतुर्थ भाव पर अशुभ ग्रहों का प्रभाव हो तो यह ग्रह स्थिति हृदय रोग के होने का संकेत देती है।
जानिए कि किस ग्रह के षष्ठेश से प्रभावित होने पर कौन सा रोग होने का संकेत मिलता है…
1. सूर्य- आंखों व सिर से संबंधी रोग
2. चंद्रमा- सर्दी-जुकाम, अनिद्रा, फेफड़ों में संक्रमण
3. मंगल- उच्च रक्तचाप, एनीमिया, रक्त संबंधी और हृदय संबंधी रोग
4. बुध- त्वचा संबंधी रोग, वाणी संबंधी दोष
5. गुरु- पेट संबंधी रोग, गैस, बुद्धिहीनता
6. शुक्र– यौन रोग, मूत्र संबंधी रोग
7. शनि- वात संबंधी रोग, घुटनों में दर्द, पैरों में परेशानी, हड्डी का टूटना, मानसिक अवसाद (डिप्रेशन)
8. राहु- पागलपन, मानसिक अवसाद (डिप्रेशन), दुर्घटनाजनित चोट
9. केतु- गुदा संबंधी रोग, बवासीर, दांतो के रोग

