Gangaur 2020 Puja Vidhi, Vrat Katha, Shubh Muhurat, Samagri: आज गणगौर पूजा है। होली के दूसरे दिन से यह पर्व शुरू होता है जिसका समापन चैत्र शुक्ल तृतीया को होता है। राजस्थान और मध्य प्रदेश के आलवा उत्तर भारत के ज्यादातर जिलों में इसे मनाया जाता है। अपने पति की लम्बी उम्र के लिए रखा जाने वाला ये पर्व और इसकी पूजा दोनों ही खास होती है। इस दिन महिलाएं 16 दिनों तक पूजी गईं गणगौरों का नदी, तालाब या सरोवर में विसर्जन करती हैं। लेकिन इस बार लॉकडाउन के कारण आपको घर पर ही पूजा करनी पड़ेगी। जानिए किस विधि से करें गणगौर पूजा और विसर्जन…

Gangaur Vrat Kahta (गणगौर व्रत कथा): गणगौर व्रत की पूरी कथा, यहां से पढ़ें

घर पर ऐसे करें पूजा: चैत्र शुक्ल पक्ष की तृतीया पर इस पूजा को किया जाता है। इस दिन महिलाएं नदी, सरोवर, तालाब या कुंड पर जाकर गणगौर को पानी पिलाती हैं। मगर इस बार आप बाहर नहीं जा पायेंगी तो इसके लिए आप घर के बगीचे या आंगन में ही छोटा सा कुंड बना लें। आप इसी से पूजा कर सकती हैं। जहां पूजा की जाती है उस स्थान को गणगौर का पीहर और जहाँ विसर्जन किया जाता है वह स्थान को ससुराल माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार माँ पार्वती ने भी अखण्ड सौभाग्य की कामना से कठोर तपस्या की थी और उसी तप के प्रताप से भगवान शिव को पाया। इस दिन भगवान शिव ने माता पार्वती को तथा पार्वती जी ने समस्त स्त्री जाति को सौभाग्य का वरदान दिया था। माना जाता है कि तभी से इस व्रत को करने की प्रथा आरम्भ हुई।

गणगौर पूजा 2020 शुभ मुहूर्त (GANGAUR POOJAN 2020 Shubh Muhurat):

सर्वार्थ सिद्धि योग – सुबह 6 बजकर 17 मिनट से सुबह 10 बजकर 09 मिनट तक

रवि योग- सुबह 10 बजकर 09 मिनट से अगले दिन सुबह 06 बजकर 15 मिनट तक

तृतीया तिथि प्रारम्भ 26 मार्च 2020 – शाम 7 बजकर 53 मिनट से

तृतीया तिथि समाप्त 27 मार्च 2020 – अगले दिन रात 10 बजकर 12 मिनट तक

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23:35 (IST)27 Mar 2020
इस दिन महिलाएं गुप्त रूप से रखती हैं उपवास...

महिलाएं पूरे गणगौर पूजा के दौरान उपवास रखती हैं। खास बात ये है कि इसे वे गुप्त तौर पर रखती हैं और किसी को इस बारे में नहीं बताया जाता है।

22:37 (IST)27 Mar 2020
इस बार घर पर ही कुंड बनाकर विधि विधान करें विसर्जन...

चैत्र शुक्ल द्वितीया के दिन किसी नदी या तालाब पर जाकर अपनी पूजी हुई गणगौरों को वे पानी पिलाती हैं और अगले दिन सांयकाल के समय उन गणगौरों का विसर्जन कर देती हैं. गणगौरों के पूजा स्थल गणगौर का पीहर और विसर्जन स्थल ससुराल माना जाता है. हालांकि, इस वर्ष 2020 को वैश्विक संक्रमण कोरोना वायरस से सर्तकता को देखते हुए पूजा पाठ से जुड़ी तमाम क्रियाकलापों को घर के अंदर रहकर ही किया जाएगा. इसलिए गणगौरों का विसर्जन भी इस वर्ष बाहर किसी नदी या तालाबों पर न जाकर घर के कैम्पस के अंदर या अपने- अपने छतों पर ही किया जाएगा .

21:25 (IST)27 Mar 2020
आइये जानते हैं घरों में गणगौरो के विसर्जन की पूजन विधि :

*अपने घर के किसी उपलब्ध हिस्से में एक कुंड बना लें* आप अपने घर के छतों पर भी एक कुंड तैयार कर सकते हैं.* तैयार किए कुंड को पर्याप्त जल से भर दें* कुंड के जल में थोड़ा सा गंगाजल डाल दें* अब विधिवत पूजा- पाठ कर गणगौर विसर्जित करें.

20:03 (IST)27 Mar 2020
गणगौर पूजन की विधी ( Gangaur festival pooja vidhi )...

मारवाड़ी स्त्रियाँ सोलह दिन की गणगौर पूजती है. जिसमे मुख्य रूप से, विवाहित कन्या शादी के बाद की पहली होली पर, अपने माता-पिता के घर या सुसराल मे, सोलह दिन की गणगौर बिठाती है. यह गणगौर अकेली नही, जोड़े के साथ पूजी जाती है. अपने साथ अन्य सोलह कुवारी कन्याओ को भी, पूजन के लिये पूजा की सुपारी देकर निमंत्रण देती है. सोलह दिन गणगौर धूम-धाम से मनाती है अंत मे, उद्यापन कर गणगौर को विसर्जित कर देती है. फाल्गुन माह की पूर्णिमा, जिस दिन होलिका का दहन होता है उसके दूसरे दिन, पड़वा अर्थात् जिस दिन होली खेली जाती है उस दिन से, गणगौर की पूजा प्रारंभ होती है. ऐसी स्त्री जिसके विवाह के बाद कि, प्रथम होली है उनके घर गणगौर का पाटा/चौकी लगा कर, पूरे सोलह दिन उन्ही के घर गणगौर का पूजन किया जाता है.

18:30 (IST)27 Mar 2020
गणगौर के गीत..

हिंगलू भर बालद लाया रे, म्हारा मान गुमानी ढोला।कौन के आंगन रालूं रे, म्हारा मान गुमानी ढोला।।ईसरजी के आंगन रालो रे, म्हारा मान गुमानी ढोला।बाई गौरा कामन गाली रे, म्हारा मान गुमानी ढोला।।जिनने मोह्या ईसरजी गौरा रा, म्हारा मान गुमानी ढोला।हिंगलू भर... कौन के आंगन... मान गुमानी ढोला।।बासकजी के आंगन रालो रे, म्हारा मान गुमानी ढोला।बाई नागन कामन गाली रे, म्हारा मान गुमानी ढोला।।जिनने मोह्या बासकजी नागन रा, म्हारा मान गुमानी ढोला।हिंगलू भर... कौन के आंगन... मान गुमानी ढोला।

17:44 (IST)27 Mar 2020
चैत्र शुक्ल तृतीया के दिन ऐसे किया जाता है गणगौर पूजन...

* चैत्र शुक्ल तृतीया को भी गौरी-शिव को स्नान कराकर, उन्हें सुंदर वस्त्राभूषण पहनाकर डोल या पालने में बिठाया जाता है।* इसी दिन शाम को गाजे-बाजे से नाचते-गाते हुए महिलाएँ गौरी व शिव को नदी या तालाब पर ले जाकर विधिपूर्वक पूजन कर विसर्जित करें.

14:51 (IST)27 Mar 2020
गणगौर का महत्व...

गणगौर राजस्थान और मध्य प्रदेश का लोकपर्व है। इन राज्यों में हिन्दू धर्म को मानने वाली महिलाओं के लिए इस पर्व का विशेष महत्व है। यह सांस्कृतिक विरासत, प्रेम और आस्था का जीवंत उदाहरण है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव ने पार्वतीजी को तथा पार्वतीजी ने समस्त स्त्री-समाज को सौभाग्य का वरदान दिया था। कहते हैं कि इस व्रत को रखने से पति की उम्र लंबी होती है और कुंवारी कन्याओं मनपसंद जीवन साथी मिलता है।

14:14 (IST)27 Mar 2020
गणगौर का गीत...

आ टीकी बहू गोराँ ने सोवै,
तो ईसरदासजी बैठ घडावै ओ टीकी,
रमाक झमाँ, टीकी, पानाँ क फूलाँ टीकी, हरयो नगीनो
एआ टीकी बाई रोयणदे ने सोवै,
तो सूरजमलजी बैठ घडावै ओ टीकी,
रमाक झमाँ, टीकी, पानाँ क फूलाँ टीकी, हरयो नगीनो
एआ टीकी बहू ने सोवै, तो बेटा बैठ घडावै ओ टीकी,
रमाक झमाँ, टीकी, पानाँ क फूलाँ टीकी, हरयो नगीनो ऐ।

13:35 (IST)27 Mar 2020
घरों में गणगौरो के विसर्जन की पूजन विधि :

अपने घर के किसी उपलब्ध हिस्से में एक कुंड बना लें
आप अपने घर के छतों पर भी एक कुंड तैयार कर सकते हैं.
तैयार किए कुंड को पर्याप्त जल से भर दें
कुंड के जल में थोड़ा सा गंगाजल डाल दें
अब विधिवत पूजा- पाठ कर गणगौर विसर्जित करें.

13:08 (IST)27 Mar 2020
गणगौर पूजा के समय गीत...

गोर ए गणगौर माता खोल किँवाडी,
बाहर ऊबी थारी पूजन वाली,
पूजो ए पुजावो सँइयो काँई-काँई माँगा,
माँगा ए म्हेँ अन-धन लाछर लिछमी जलहर जामी बाबुल माँगा,
राताँ देई माँयड, कान्ह कँवर सो बीरो माँगा, राई (रुक्मणी) सी भौजाई,
ऊँट चढ्यो बहनोई माँगा, चूनडवाली बहना,
पून पिछोकड फूफो माँगा, माँडा पोवण भूवा,
लाल दुमाल चाचो माँगा, चुडला वाली चाची,
बिणजारो सो मामो माँगा, बिणजारी सी मामी,
इतरो तो देई माता गोरजा ए, इतरो सो परिवार,
दे ई तो पीयर सासरौ ए,
सात भायाँ री जोड
परण्याँ तो देई माता पातळा (पति)
ए साराँ मेँ सिरदार
गणगौर पर्व पर कोरोना का कहर, नहीं भरेंगे पारम्परिक मेले

12:34 (IST)27 Mar 2020
होली के दिन से गणगौर पूजा की हो जाती है शुरुआत...

गणगौर पर परम्परागत गीतों के साथ ईसर (शिव) और पार्वती का पूजन किया जाता है। राजस्थान के लोग इन परम्पराओं निभाते हुए नई पीढ़ी को विशेषतौर पर पूजन में शामिल करते हैं। ऐसा भी कहा जाता है कि सुख-सौभाग्य के लिए होने वाले पूजन की शुरुआत होली से ही हो जाती है। धुलंडी के दिन होली की राख से सोलह गणगौर बनाकर सोलह दिन तक पूजा की जाती है। ये भी कहा जाता है कि  चैत्र शुक्ल तृतीया को सुबह पूजा के बाद तालाब, सरोवर में गणगौर के मंगलगीत गाते हुए गणगौर (ईसर-गौर) की प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है।

12:16 (IST)27 Mar 2020
अविवाहित कन्या करती हैं अच्छे वर की कामना...

गणगौर एक ऐसा पर्व है जिसे, हर स्त्री के द्वारा मनाया जाता है। इसमें कुवारी कन्या से लेकर, विवाहित स्त्री भगवान शिव व माता पार्वती का पूजन करती हैं। ऐसी मान्यता है कि शादी के बाद पहला गणगौर पूजन मायके में किया जाता हैं। इस पूजन का महत्व अविवाहित कन्या के लिए, अच्छे वर की कामना को लेकर रहता है जबकि, विवाहित स्त्री अपने पति की दीर्घायु के लिए होता है। इसमें अविवाहित कन्या पूरी तरह से तैयार होकर और, विवाहित स्त्री सोलह श्रृंगार करके पूरे सोलह दिन विधी-विधान से पूजन करती है।

11:41 (IST)27 Mar 2020
कोरोना के कारण इस बार घर पर इस सरल विधि से करें गणगौर पूजा संपन्न...

जवारों को ही देवी गौरी और शिव का रूप मान एकादशी से उनकी पूजा होती है. चैत्र शुक्ल द्वितीया को गौरी पूजन का महत्व है,विधिपूर्वक पूजन करनी चाहिए. सुहाग की सामग्री को विधिपूर्वक पूजन कर गौरी को अर्पण किया जाता है. इसके पश्चात गौरीजी को भोग लगाकर गौरीजी की कथा पढ़ी जाती है. गौरीजी पर चढ़ाए हुए सिंदूर से विवाहित स्त्रियों को अपनी माँग भरनी चाहिए. कुँआरी कन्याओं को गौरीजी को प्रणाम कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए। चैत्र शुक्ल द्वितीय को गौरीजी को किसी नदी या तालाब पर ले जाकर उन्हें स्नान कराएँ. चैत्र शुक्ल तृतीया को भी गौरी-शिव को स्नान कराकर, उन्हें सुंदर वस्त्राभूषण पहनाकर डोल या पालने में बिठाया. शाम को महिलाएँ अपने द्वारा बनाए गए गौरी व शिव को अपने घर के किसी उपलब्ध हिस्से में ही एक कुंड बना कर विधिपूर्वक पूजन कर गणगौर विसर्जित करें.

11:22 (IST)27 Mar 2020
गणगौर के गीत...

हिंगलू भर बालद लाया रे, म्हारा मान गुमानी ढोला।
कौन के आंगन रालूं रे, म्हारा मान गुमानी ढोला।।

ईसरजी के आंगन रालो रे, म्हारा मान गुमानी ढोला।
बाई गौरा कामन गाली रे, म्हारा मान गुमानी ढोला।।

जिनने मोह्या ईसरजी गौरा रा, म्हारा मान गुमानी ढोला।
हिंगलू भर... कौन के आंगन... मान गुमानी ढोला।।

बासकजी के आंगन रालो रे, म्हारा मान गुमानी ढोला।
बाई नागन कामन गाली रे, म्हारा मान गुमानी ढोला।।
जिनने मोह्या बासकजी नागन रा, म्हारा मान गुमानी ढोला।
हिंगलू भर... कौन के आंगन... मान गुमानी ढोला।

10:56 (IST)27 Mar 2020
आइये जानते हैं घरों में गणगौरो के विसर्जन की पूजन विधि :

*अपने घर के किसी उपलब्ध हिस्से में एक कुंड बना लें

* आप अपने घर के छतों पर भी एक कुंड तैयार कर सकते हैं.

* तैयार किए कुंड को पर्याप्त जल से भर दें

* कुंड के जल में थोड़ा सा गंगाजल डाल दें

* अब विधिवत पूजा- पाठ कर गणगौर विसर्जित करें.

10:41 (IST)27 Mar 2020
इस बार घर पर ही कुंड बनाकर विधि विधान करें विसर्जन...

चैत्र शुक्ल द्वितीया के दिन किसी नदी या तालाब पर जाकर अपनी पूजी हुई गणगौरों को वे पानी पिलाती हैं और अगले दिन सांयकाल के समय उन गणगौरों का विसर्जन कर देती हैं. गणगौरों के पूजा स्थल गणगौर का पीहर और विसर्जन स्थल ससुराल माना जाता है. हालांकि, इस वर्ष 2020 को वैश्विक संक्रमण कोरोना वायरस से सर्तकता को देखते हुए पूजा पाठ से जुड़ी तमाम क्रियाकलापों को घर के अंदर रहकर ही किया जाएगा. इसलिए गणगौरों का विसर्जन भी इस वर्ष बाहर किसी नदी या तालाबों पर न जाकर घर के कैम्पस के अंदर या अपने- अपने छतों पर ही किया जाएगा .

10:17 (IST)27 Mar 2020
रणु बाई रणुबाई रथ सिनगारियो तो...

रणुबाई रणुबाई रथ सिनगारियो तो
को तो दादाजी हम गोरा घर जांवा
जांवो वाई जावो बाई हम नहीं बरजां
लम्बी सड़क देख्या भागी मती जाजो
उँडो कुओ देख्या पाणी मती पीजो
चिकनी सिल्ला देखी न पाँव मती धरजो
पराया पुरुष देखनी हसी मती करजो

09:52 (IST)27 Mar 2020
घर पर ही करें प्रतिमाओं का विसर्जन...

धुलंडी के दिन होली की राख से सोलह गणगौर बनाकर सोलह दिन तक पूजा की जाती है। इसके बाद चैत्र मास की तृतिया तिथि को प्रतिमाओं को तालाब में विसर्जन करने की मान्यता है। अगर आप कोरोना वायरस लॉकडाउन की वजह से बाहर नहीं जा पा रहे हैं तो घर के ही किसी कोने में छोटा सा कुंड बनाकर प्रतिमाओं को विसर्जित कर सकती हैं।

09:28 (IST)27 Mar 2020
गणगौर पूजन की विधी ( Gangaur festival pooja vidhi )...

मारवाड़ी स्त्रियाँ सोलह दिन की गणगौर पूजती है. जिसमे मुख्य रूप से, विवाहित कन्या शादी के बाद की पहली होली पर, अपने माता-पिता के घर या सुसराल मे, सोलह दिन की गणगौर बिठाती है. यह गणगौर अकेली नही, जोड़े के साथ पूजी जाती है. अपने साथ अन्य सोलह कुवारी कन्याओ को भी, पूजन के लिये पूजा की सुपारी देकर निमंत्रण देती है. सोलह दिन गणगौर धूम-धाम से मनाती है अंत मे, उद्यापन कर गणगौर को विसर्जित कर देती है. फाल्गुन माह की पूर्णिमा, जिस दिन होलिका का दहन होता है उसके दूसरे दिन, पड़वा अर्थात् जिस दिन होली खेली जाती है उस दिन से, गणगौर की पूजा प्रारंभ होती है. ऐसी स्त्री जिसके विवाह के बाद कि, प्रथम होली है उनके घर गणगौर का पाटा/चौकी लगा कर, पूरे सोलह दिन उन्ही के घर गणगौर का पूजन किया जाता है.

08:54 (IST)27 Mar 2020
उद्यापन की सामग्री ( Gangaur festival Udyapan Samagri)...

सीरा (हलवा)
पूड़ी
गेहू
आटे के गुने (फल)
साड़ी
सुहाग या सोलह श्रंगार का समान आदि.

08:39 (IST)27 Mar 2020
इस दिन महिलाएं गुप्त रूप से रखती हैं उपवास...

महिलाएं पूरे गणगौर पूजा के दौरान उपवास रखती हैं। खास बात ये है कि इसे वे गुप्त तौर पर रखती हैं और किसी को इस बारे में नहीं बताया जाता है।

08:16 (IST)27 Mar 2020
गणगौर पूजना का शुभ समय...

राजस्थान में यह त्योहार 16 दिनों का होता है। इस बार यानी 2020 में गणगौर पूजा का समापन राजस्थान में आज यानि 27 मार्च को हो रहा है। वहीं, पूजा के शुभ मुहूर्त की बात करें तो स्वार्थ सिद्धि योग सुबह 6 बजकर 17 मिनट से सुबह 10 बजकर 09 मिनट तक रहेगा। रवि योग सुबह 10 बजकर 09 मिनट से अगले दिन सुबह 6 बजकर 15 मिनट तक होगा। शुक्ल की तृतीया तिथि की शुरुआत 26 मार्च को शाम 7 बजकर 53 मिनट से हो रही है। इस तिथि का समापन 27 तारीख को रात 10 बजकर 12 मिनट पर होगा।

07:57 (IST)27 Mar 2020
चैत्र शुक्ल तृतीया के दिन ऐसे किया जाता है गणगौर पूजन...


* चैत्र शुक्ल तृतीया को भी गौरी-शिव को स्नान कराकर, उन्हें सुंदर वस्त्राभूषण पहनाकर डोल या पालने में बिठाया जाता है।

* इसी दिन शाम को गाजे-बाजे से नाचते-गाते हुए महिलाएँ गौरी व शिव को नदी या तालाब पर ले जाकर विधिपूर्वक पूजन कर विसर्जित करें.

07:43 (IST)27 Mar 2020
गणगौर पूजा का महत्व...

गणगौर आस्था प्रेम और पारिवारिक सौहार्द का सबसे बड़ा उत्सव है. यह मनाया तो पूरे भारत में जाता है लेकिन राजस्थान में इसका विशेष महत्व है.गण (शिव) तथा गौर(पार्वती) के इस पर्व में कुँवारी लड़कियां मनपसंद वर पाने की कामना करती हैं वहीं विवाहित महिलायें आज इस चैत्र शुक्ल तृतीया को गणगौर पूजन तथा व्रत कर अपने पति की दीर्घायु होने की कामना करेंगी.