Gajkesari Rajyog 2026: वैदिक ज्योतिष शास्त्र में देवगुरु बृहस्पति को सुख, सौभाग्य, भाग्य और धन का कारक माना जाता है। जो एक राशि में करीब एक साल रहते हैं और पूरा राशि चक्र करने में 12 साल का वक्त लग जाता है। ज्योतिष गणना के अनुसार, नए साल 2026 की शुरुआत में गुरु मिथुन राशि में विराजमान रहेंगे। ऐसे में किसी न किसी ग्रह के साथ युति या फिर संयोग करेंगे, जिससे शुभ-अशुभ योगों का निर्माण होगा। ऐसे में गुरु बृहस्पति और चंद्रमा के मिलन से शक्तिशाली गजकेसरी राजयोग का निर्माण होने वाला है। जिसके कारण कुछ राशियों के लिए ‘कुबेर का खजाना’ खुल सकता है। ये विश्लेषण चंद्र राशि के आधार पर किया जा रहा है। आइए जानते हैं नए साल 2026 में गजकेसरी राजयोग किन राशियों के लिए लाभकारी हो सकता है…
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, चंद्रमा 2 जनवरी 2026 को सुबह 09:25 बजे वृषभ राशि से अपनी यात्रा शुरू करते हुए मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे और 4 जनवरी 2026 की सुबह 09:42 बजे तक इसी राशि में विराजमान रहेंगे। मिथुन राशि में पहले से मौजूद गुरु के साथ जब चंद्रमा का यह मिलन होगा, तब ‘गजकेसरी राजयोग’ का पूर्ण प्रभाव देखने को मिलेगा। शास्त्रों में इस राजयोग को इतना शक्तिशाली माना गया है कि इसके प्रभाव से जातक पर मां लक्ष्मी की विशेष कृपा बरसती है और वह सुख-सुविधाओं से पूर्ण ‘शाही जीवन’ व्यतीत करता है।
मिथुन राशि (Gemini): लग्न में राजयोग, बरसेंगी खुशियां और धन
इस राशि की कुंडली में गुरु और चंद्रमा की युति लग्न भाव में हो रही है, जिससे जातकों के लिए गजकेसरी राजयोग बन रहा है। यह योग आपके व्यक्तित्व में निखार लाएगा और कई क्षेत्रों में लाभ दिला सकता है। नौकरी और व्यापार के मामलों में वरिष्ठों की सलाह लेना आपके लिए लाभकारी रहेगा। शिक्षक, राजनीति या प्रशासन के क्षेत्र में सफलता के योग नजर आ रहे हैं। आपकी वाणी प्रभावशाली होगी और आप दूसरों को प्रेरित कर सकते हैं।
समाज में आपका मान-सम्मान बढ़ेगा। विवाह के लिए यह समय शुभ माना जा रहा है। आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी और आप अध्यात्म की ओर भी आकर्षित होंगे, जिससे धार्मिक यात्राओं का अवसर मिलेगा। इस अवधि में नए दोस्त और महत्वपूर्ण संपर्क बन सकते हैं, जो भविष्य में आपके लिए लाभदायक साबित होंगे। इस राशि के जातकों का सातवां, नौवां और पांचवां भाव सक्रिय रहेगा, जिन्हें लक्ष्मी और विष्णु स्थान कहा जाता है। इसका प्रभाव यह होगा कि मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की विशेष कृपा आप पर बनी रहेगी।
उपाय- मिथुन राशि वाले भगवान विष्णु को केसर का तिलक लगाएं और ‘ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरवे नम:’ मंत्र का जाप करें।
तुला राशि (Libra): भाग्य का उदय और सुनहरे अवसर
इस राशि की कुंडली के नौवें भाव में गजकेसरी राजयोग बन रहा है, जो अत्यंत शुभ माना जाता है। इस योग के प्रभाव से जातकों को किस्मत का पूरा साथ मिल सकता है। करियर के क्षेत्र में नए अवसर प्राप्त होंगे और आपके काम की सराहना होगी, वरिष्ठ अधिकारी आपका सम्मान करेंगे। साथ ही, जीवन में खुशियों की नई शुरुआत हो सकती है। मेहनत और लगन के बल पर आप कई ऊंचाइयों को छू सकते हैं। जो जातक नया काम या व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, उनके लिए यह समय विशेष रूप से अनुकूल रहेगा। इस अवधि में आरंभ किया गया कार्य अत्यधिक सफलता और लाभ दिलाने वाला होगा। गुरु की पांचवीं दृष्टि आपकी राशि के लग्न (प्रथम भाव) पर पड़ेगी, जिससे आपके आत्मविश्वास में गजब की वृद्धि होगी। साथ ही, गुरु की नौवीं दृष्टि आपके पंचम भाव पर होने से संतान पक्ष से शुभ समाचार मिल सकता है और विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा में बड़ी सफलता मिलेगी।
उपाय- शुभ फलों के लिए तुला राशि के जातक शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी को सफेद मिठाई का भोग लगाएं।
कुंभ राशि (Aquarius): इनकम के खुलेंगे नए स्रोत
इस राशि के जातकों के लिए गुरु का गजकेसरी राजयोग बनाना काफी लाभकारी हो सकता है। इस राशि के पंचम भाव में इस राजयोग का निर्माण हो रहा है। ऐसे में इस राशि के जातकों की वित्तीय स्थिति में तेजी से सुधार हो सकता है। पिछले काफी समय से हो रहे फिजूलखर्ची पर लगाम लगेगी और बचत करने में सफल रहेंगे। आय के नए और स्थायी स्रोत खुल सकते हैं। इनकम के नए स्रोत खुल सकते हैं। इस राशि के जातकों ऑनलाइन व्यापार के माध्यम से काफी लाभ मिल सकता है। छात्रों को इस अवधि में काफी लाभ मिल सकता है। उच्च शिक्षा पाने का सपना पूरा हो सकता है। अध्यात्म की ओर आपका झुकाव होगा। ऐसे में कई धार्मिक यात्राएं भी कर सकते हैं। लव लाइफ और वैवाहिक जीवन अच्छा जाने वाला है।
उपाय- कुंभ राशि के जातक शुभ फलों के लिए बजरंगबली की आराधना, हनुमान चालीसा का पाठ, माता लक्ष्मी और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें।
डिसक्लेमर- इस लेख को विभिन्न माध्यमों जैसे ज्योतिषियों, पंचांग, मान्यताओं या फिर धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है। इसके सही और सिद्ध होने की प्रामाणिकता नहीं दे सकते हैं। इसके किसी भी तरह के उपयोग करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।
