वैदिक शास्त्रों के अनुसार अक्षय तृतीया, भड़ली नवमी और देव प्रबोधनी एकादशी पर कोई काम बिना पूछे मतलब मुहूर्त बिना दिखाए किया जा सकता है। अब चाहे वो विवाह हो या कोई और मांगलिक कार्यक्रम। भड़ली नवमी भी शादी-विवाह, मुंडन या अन्य कोई मांगलिक कार्य, शुभ कार्य या नए काम करने के लिए अबूझ मुहूर्त होता है। इस दिन जिनके शादी-विवाह का मुहूर्त न बन रहा हो। मतलब उनके नाम से विवाह नहीं पड़ रहा हो तो वे भड़ली नवमी के दिन बिना किसी विचार के शादी कर सकते हैं। इस तिथि पर कोई दोष लगता नहीं है। कुछ जगहों पर भड़ली नवमी को भडल्‍या नवमी के नाम से भी जाना जाता है।

जानिए कब है भड़ली नवमी:
वैदिक पंचांग के अनुसार हर साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को भड़ली नवमी मनाई जाती है। इस साल आषाढ़ माह की नवमी तिथि 7 जुलाई को शाम 7 बजकर 29 मिनट से शुरू हो रही है और अगले दिन यानी 8 जुलाई को शाम 6 बजकर 26 मिनट तक रहेगी। जो लोग उदयातिथि से मानते हैं वो लोग 8 जुलाई को भड़ली नवमी मनाएंगे।

3 विशेष योगों का हो रहा निर्माण:
ज्योतिष पंचांग के अनुसार इस साल भड़ली नवमी पर शिव, सिद्ध और रवि योग का निर्माण हो रहा है। ज्योतिष शास्त्र में इन योगों को बहुत शुभ माना जाता है। साथ ही इन योगों में कोई भी शुभ और मांगलिक कार्य किया जा सकता है। वहीं कोई भी वस्तु खरीदने के लिए भी यह मुहूर्त शुभ माना जाता है। इस दिन घर- गाड़ी या कोई अन्य वस्तु खरीद सकते हैं।

जानिए विवाह मुहूर्त का समय:
इस साल भड़ली नवमी पर कई विशेष संयोग का निर्माण हो रहा है। वैदिक पंचांग के मुताबिक, भड़ली अमावस्या को शाम साढ़े 6 बजे तक ही शुभ कार्य किए जा सकेंगे। इसके दो दिन बाद चातुर्मास शुरू हो जाएगा। जिसमें 4 महीने तक कोई भी शुभ कार्य नहीं किए जाते। क्योंकि इस दौरान भगवान विष्णु निद्रा में चले जाते हैं। इस चार माह में केवल शिव परिवार की पूजा होती है। शास्त्रों के अनुसार भगवान विष्णु की जगह भगवान शिव चार माह के लिए सृष्टि के पालनहार का कार्य संभालते हैं।