Moon Stone Benefits: रत्न शास्त्र में 9 प्रमुख और 84 उपरत्नों का वर्णन मिलता है। ये रत्न किसी न किसी ग्रह का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसलिए इन रत्नों को धारण करने से ग्रहों के अशुभ प्रभाव को कम किया जा सकता है। वहीं कभी भी मारक, बाधक, नीच या अशुभ ग्रह का रत्न धारण नहीं करना चाहिए। रत्न और उपरत्न को हमेशा शुभ ग्रह यदि अस्त है या निर्बल है तो उसका धारण करना चाहिए। ताकि उस ग्रह के प्रभाव को बढ़ाकर शुभ फलों में बढ़ोतरी की जा सके।
यहां हम बात करने जा रहे हैं मोती के उपरत्न के बारे में, जिसका नाम है मून स्टोन। मून स्टोन को चन्द्रकान्तमणि, चन्द्रमणि और गोदन्ता के नाम से भी जाना जाता है। आइए जानते हैं मून स्टोन कैसे धारण किया जाए और इसके पहनने के क्या लाभ हैं…
ऐसा होता है मून स्टोन
मून स्टोन रंगहीन, पीला उपरत्न है। साथ ही इस पर नीली अथवा दूधिया चमक दिखाई देती है जो चांदी के समान लगती है। इस उपरत्न की सतह पर कई बार नीली झांई के समान दूधिया रंग का प्रकाश दिखाई देता है।
इन राशि के लोग करते हैं मून स्टोन धारण
- ज्योतिष शास्त्र अनुसार मेष, कर्क, वृश्चिक और मीन लग्न के लिए मून स्टोन धारण करना शुभ होता है।
- सिंह, तुला और धनु लग्न वाले सलाह लेकर विशेष दशाओं और ग्रहों की स्थितियों में मून स्टोन धारण कर सकते हैं।
- अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में चंद्रमा उच्च मतलब सकारात्मक स्थित हो तो भी मून स्टोन धारण किया जा सकता है।
- मून स्टोन के साथ हीरा, नीलम और गोमेद नहीं धारण करें। अन्यथा नुकसान हो सकता है।
- जिनकी कुंडली में चंद्रमा भाग्य अथवा धन भाव का स्वामी हैं, वे मून स्टोन धारण कर सकते हैं।
मून स्टोन धारण करने के लाभ
ज्योतिष शास्त्र अनुसार अगर आपमें आत्मविश्वास की कमी है, नींद न आने की समस्या है, आप मानसिक रूप से परेशान हैं तो आप मून स्टोन धारण कर सकते हैं। जिन लोगों को डिप्रेशन रहता हो वो लोग भी मून स्टोन धारण कर सकते हैं। वहीं अगर कुंडली में चंद्रमा की वजह से कोई रोग हो तो भी मून स्टोन पहन सकते हैं। मून स्टोन डिसीजन मेकिंग को मजबूत करता है।
जानिए धारण करने की सही विधि
रत्न शास्त्र अनुसार मून स्टोन कम से कम सवा 7 से सवा 8 रत्नी का पहनना चाहिए। साथ ही मून स्टोन चांदी में सोमवार के दिन चंद्रमा निकलने के बाद पहनना चाहिए। साथ ही इसकी अंगूठी बनवाकर छोटी उंगली में धारण करना चाहिए। कई लोग इसे पूर्णिमा के दिन भी पहनने की सलाह देते हैं। इस उपरत्न को पहनने से पहले इसे गंगाजल से धो लें फिर इसे शिवजी को अर्पित करने के बाद ही धारण करें। इसे गाय के कच्चे दूध और गंगाजल से शुद्ध जरूर कर लें।
