अक्षय तृतीया पर्व का हिंदू धर्म में विशेष महत्व होता है। यह पर्व वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतिया को अक्षय तृतीया मनाई जाती है। ज्योतिष के अनुसार इस दिन सूर्य और चंद्रमा ग्रह उच्च राशि में होते हैं। इसलिए ये दिन बेहद ही शुभ होता है। साथ ही इस दिन कोई भी शुभ काम बिना मुहूर्त देखे किया जा सकता है। अक्षय तृतीया का पावन पर्व इस वर्ष 3 मई को है। इस खास मौके पर सोने की खरीदारी करने की परंपरा है। साथ ही शास्त्रों के अनुसार इस दिन भगवान परशुराम का जन्म हुआ था।

वहीं इस बार अक्षय तृतीया के दिन ग्रहों और योगों का भी विशेष संयोग बनने जा रहा है। वैदिक पंचांग के अनुसार, अक्षय तृतीय इस बार मंगल रोहिणी नक्षत्र के शोभन योग में मनाई जाएगी। शुभ योग में अक्षय तृतीया मनाने का ये संयोगा 30 साल बाद बना है। साथ ही 50 साल बाद ग्रहों की भी विशेष स्थिति बन रही है। आइए जानते हैं ग्रहों का महासंयोग और अक्षय तृतीया का महत्व…

ऐसे बन रहा है महासंयोग:

वैशाख शुक्ल तृतीया पर करीब 50 साल बाद दो ग्रह चंद्रमा और शुक्र उच्च राशि में स्थित रहेंगे, जबकि दो प्रमुख ग्रह शनि और गुरु स्वराशि में होंगे। शुभ संयोग और ग्रहों की विशेष स्थिति में अक्षय तृतीया पर दान करने से पुण्य की प्राप्ति होगी। साथ ही इस दिन अबूझ मुहूर्त में किसी भी प्रकार के मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं।

अक्षय तृतीया शुभ मुहूर्त:

अक्षय तृतीया तिथि आरंभ- 3 मई सुबह 5 बजकर 18 मिनट पर
अक्षय तृतीया तिथि समापन- 4 मई सुबह 7 बजकर 32 मिनट तक।

रोहिणी नक्षत्र- 3 मई सुबह 12 बजकर 34 मिनट से शुरू होकर 4 मई सुबह 3 बजकर 18 मिनट तक होगा।

जानिए अक्षय तृतीया का क्या है महत्व:
– अक्षय तृतीया के दिन अबूझ मुहूर्त रहता है। यानी इस दिन कोई भी शुभ काम बिना मुहूर्त देखे किये जा सकते हैं।
– मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है।
– धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन भगवान परशुराम का जन्म हुआ था।
– इस पवित्र दिन पर दान- पुण्य करने का भी बहुत अधिक महत्व होता है।
– अक्षय तृतीया के पर सोना खरीदने की भी परंपरा है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन सोने की खरीददारी करने से घर-परिवार में सुख- समृद्धि आती है।