जमशेदपुर पूर्व सीट से मुख्यमंत्री रघुवर दास को 11 हजार से ज्यादा वोटों से हराने वाले निर्दलीय प्रत्याशी और पूर्व मंत्री सरयू राय ने कहा कि उनका किसी पार्टी में शामिल होने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने कहा, ‘मैं निर्दलीय चुनाव लड़ा और निर्दलीय ही रहूंगा। मैं सरकार की नीतियों का मूल्यांकन करने के बाद उनका समर्थन या विरोध करता रहूंगा।’

सरयू राय ने कहा कि रघुवर दास के खिलाफ उन्होंने जो मोर्चा खोला था, जीत उसका पहला मुकाम है। वे उसे नतीजे तक पहुंचाएंगे। भाजपा से बागी होने के बाद से सरयू राय खुलकर कह रहे हैं कि उनके पास रघुवर दास सरकार के खिलाफ एक दर्जन से ज्यादा घोटालों के दस्तावेज मौजूद बाकी पेज 8 पर हैं। सरयू राय चुनाव प्रचार के दौरान भी लगातार दोहराते रहे, ‘तीन को जेल भिजवाया अब चौथे की बारी है।’ बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव, जगन्नाथ मिश्र और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा के खिलाफ दस्तावेज सरयू राय ने ही सार्वजनिक किए थे।

झारखंड में वर्ष 2005-06 में ही सरयू राय और रघुवर दास के बीच खटास शुरू हो गई थी। 2005 में रघुवर दास नगर विकास मंत्री थे। रांची में जल निकासी के काम के लिए सिंगापुर की कंपनी मेनहार्ट को ठेका दिया गया। मामला विधानसभा में सरयू राय की समिति के सामने आया। सरयू राय ने जांच की और कंपनी की नियुक्ति को गलत पाया।

उन्होंने अपनी रिपोर्ट अर्जुन मुंडा सरकार और विधानसभा को दी। भाजपा संगठन को भी उसकी एक प्रति भेजी थी। तब से दोनों के बीच खींचतान चलती रही। 2014 में राज्य में भाजपा सरकार में दोनों की तनातनी सड़कों पर आ गई। टिकट मिलने में आनाकानी के बाद सरयू राय ने निर्दलीय चुनाव लड़ा। उन्होंने कहा, ‘भाजपा नेतृत्व ने मेरे स्वाभिमान को चोट पहुंचाई और उसी से आहत होकर मैंने मुख्यमंत्री के खिलाफ चुनाव लड़ने का मन बनाया।’ सरयू राय ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी मुहिम जारी रहेगी और इस बात की उन्होंने मंत्री रहते हुए भी मुख्यमंत्री रघुवर दास को चेतावनी दी थी।