बिहार की राजधानी पटना के फतुहा प्रखंड के किसान जब सरकारी मदद का इंतजार करते-करते थक गए तो उन्होंने खुद ही अपनी समस्या सुलझाने का बीड़ा उठाया। सरकार की अनदेखी से परेशान गांव वाले खुद ही बांध बना रहे हैं। यहां के गौरीपुंदा पंचायत के किसानों ने बाढ़ से अपनी फसल बचाने के लिए आपस में चंदा इकट्ठा कर तकरीबन चार किलोमीटर लंबे बांध का निर्माण करने का फैसला किया है और उस पर काम भी शुरू कर दिया है।

इन किसानों ने अपनी मेहनत और किराए पर लिए गए जेसीबी की मदद से अब तक एक किलोमीटर तक बांध बनाने का काम पूरा भी कर लिया है। सभी किसानों ने तय किया है कि इस चार किलोमीटर लंबे बांध को अगले 10 दिनों में पूरा कर लेंगे। इस बांध के बन जाने का यह फायदा होगा कि हर साल बरसाती नदी में आने वाली बाढ़ की तबाही से किसानों की फसल बच जाएगी।

अपने खर्च पर बना रहे हैं बांध: किसानों ने बताया कि अपने खर्च पर चंदा इकट्ठा कर और अपनी मेहनत से वो ये बांध बना रहे हैं ताकि अपनी फसल को बचाया जा सके। किसानों ने बताया कि हम में से कई लोग पट्टे या किराए पर जमीन लेकर खेती करते हैं ऐसे में बाढ़ का पानी आ जाने से उनकी फसल खराब हो जाती है और वो पैसा नहीं चुका पाते।

नदियों में बाढ़ आने से होता है नुकसान: इलाके के किसानों ने बताया कि हर साल मानसून के दिनों में आसपास की कई बरसाती नदियों में बाढ़ का पानी आ जाने से हर साल खेत में लगी हजारों एकड़ की धान की फसल डूब कर बरबाद हो जाती थी। किसानों की शिकायत यह भी है कि बाढ़ आने के बाद आपदा प्रबंधन विभाग फसल क्षतिपूर्ति मुआवजे को लेकर सिर्फ कागजी कार्रवाई करता था, जिसका कोई फायदा किसानों को नहीं मिल पाता था।

इस बांध के बनने के बाद गौरीपुंदा पंचायत के शिवचक, नारायण टोला और कई गांव बाढ़ की तबाही से पूरी तरह सुरक्षित हो जाएंगे। गौरतलब है कि फतुहा में सबसे ज्यादा फसलों की खेती की जाती है और पूरे पटना को यहां से सब्जियां सप्लाई की जाती हैं।