राजधानी दिल्ली के बाजारों में मिल रहीं सब्जियों में लैड की भारी मात्रा पायी गई है। दरअसल जिन सब्जियों में लैड की मात्रा ज्यादा पायी गई हैं, वो दिल्ली में यमुना किनारे उगायी गई हैं। ऐसी सब्जियों को लंबे समय तक खाने से कैंसर जैसी बीमारियों होने का खतरा है। नेशनल एनवायरमेंट इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (NEERI) की एक स्टडी में इस बात का खुलासा हुआ है। बता दें कि यह ‘जहरीली’ सब्जियां दिल्ली की अधिकतर सब्जी मंडियों में पहुंचती है, जिनमें आजादपुर मंडी, गाजीपुर और ओखला सब्जी मंडी प्रमुख हैं। इन सब्जी मंडियों से यह सब्जियां दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में पहुंचती हैं और लोगों की सेहत बिगाड़ रही हैं।
द हिंदुस्तान टाइम्स ने NEERI की रिपोर्ट के हवाले से अपनी एक खबर में लिखा है कि पूर्वी दिल्ली के गीता कालोनी इलाके में बिकने वाले धनिए में सबसे ज्यादा लैड की मात्रा पायी गई है। खबर के अनुसार, सिर्फ पत्तागोभी को छोड़कर बाकी सभी सब्जियों में लैड की मात्रा तय मानक से ज्यादा पायी गई है। दिल्ली के विभिन्न इलाकों से सब्जियों के जो नमूने लिए गए हैं, उनमें पालक में सबसे ज्यादा लैड की मात्रा पायी गई है।
बता दें कि फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया के अनुसार, सब्जियों में लैड की तय मात्रा 2.5 mg/kg है, लेकिन यमुना किनारे उगायी गई सब्जियों में लैड की मात्रा 2.8 mg/kg से लेकर 13.8 mg/kg तक पायी गई है। NEERI द्वारा फरवरी, 2019 में दिल्ली की सब्जियों पर स्टडी की गई थी। यह रिसर्च काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (CSIR) की देखरेख में की गई। इस साल मई में इस रिसर्च की रिपोर्ट नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के सामने पेश की गई है।
लैड की ज्यादा मात्रा वाली सब्जियों को खाने से होने वाले नुकसान की बात करें तो इन्हें खाने से शरीर में ऊर्जा की कमी हो सकती है। साथ ही इन सब्जियों को खाने से मस्तिष्क, फेफड़ों, किडनी और लीवर की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती हैं। यहां तक कि लंबे समय तक खाने से इससे शरीर के महत्वपूर्ण अंग काम करना बंद भी कर सकते हैं।
एनजीटी ने साल 2015 में यमुना किनारे सब्जियों और फसलों को उगाने पर रोक लगा दी थी, क्योंकि इन सब्जियों में प्रदूषण की मात्रा ज्यादा थी। हालांकि एनजीटी के आदेश के बावजूद यमुना किनारे सब्जियों का उत्पादन बदस्तूर जारी है।

