बसपा अध्यक्ष मायावती ने लोकसभा चुनाव में सपा के साथ गठबंधन से पार्टी को कोई लाभ नहीं होने पर अप्रसन्नता व्यक्त करते हुए सोमवार (3 जून, 2019) को कहा कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव अपनी पत्नी डिंपल यादव की जीत भी सुनिश्चित नहीं कर सके। दो बार की लोकसभा सांसद डिंपल यादव प्रदेश में अपनी कन्नौज सीट भाजपा से हार गईं। यह हार चौंकाने वाली भी है क्योंकि निर्वाचन क्षेत्र में लगभग 3.5 लाख यादव वोट हैं, और एक यादव को संसद में भेजने के लिए इतना वोट बहुत मायने रखता है। चुनाव परिणाम ने संकेत दिया कि यादव समुदाय ने डिंपल यादव को वोट देने की बजाय भाजपा प्रत्यीशी का समर्थन किया।

कन्नौज की हार समाजवादी पार्टी के लिए बहुत बड़ा झटका है। समाजवादी नेता राम मनोहर लोहिया ने इसे 1967 में जीता था। अखिलेश यादव के पिता मुलायम सिंह यादव ने 1999 में चुनाव लड़ा और 2000 में अखिलेश यादव को इसी सीट से चुनावी मैदान में उतारा। अखिलेश यादव ने 2012 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने तक यह सीट अपने पास रखी। उनके सीएम बनने के बाद उप चुनाव में यहां से डिंपल यादव ने जीत दर्ज की।

एनडीटीवी में छपी खबर के मुताबिक डिंपल की हार पर मायावती ने कहा, ‘हमारे (दलित) वोट डिंपल को मिले, लेकिन यादव वोट नहीं मिले। गठबंधन बेकार था। यादव वोट बसपा को नहीं मिले मगर हमारे वोट उन्हें मिले। सपा सिर्फ वहीं जीती जहां मुस्लिमों ने उनके पक्ष में भारी मतदान किया। यहां तक अखिलेश का अपना परिवार भी यादव वोट से नहीं जीता।’

उत्तर प्रदेश में विधानसभा की कुछ सीटों पर संभावित उपचुनाव अपने बलबूते चुनाव लड़ने की बात कह कर मायावती ने प्रदेश में सपा-बसपा गठबंधन के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि बसपा अब गठबंधनों पर निर्भरता खत्म कर आगामी उपचुनाव खुद लड़ेगी।

लोकसभा चुनाव के परिणाम की समीक्षा के लिए सोमवार को उत्तर प्रदेश के पार्टी पदाधिकारियों और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की बैठक में मायावती ने बसपा का संगठनात्मक ढांचा मजबूत करने की जरूरत पर बल देते हुए पार्टी पदाधिकारियों को उपचुनाव की तैयारियां तेज करने को कहा है।