कांग्रेस पार्टी बिहार की तरह यूपी में भी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर महागठबंधन की कोशिश कर रही है। पार्टी अगले साल की शुरुआत में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले सपा के साथ गठजोड़ करना चाह रही है। हालांकि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने समाजवादी पार्टी को यह साफ कर दिया कि वह चाहते हैं कि सपा की कमान पूरी तरह से अखिलेश यादव को दी जाए। माना जा रहा है कि राहुल गांधी ने सपा के प्रमुख नेताओं तक अपना यह संदेश पहुंचाया है कि यदि अखिलेश यादव को आम सहमति से सपा का चेहरा घोषित किया जाए तो कांग्रेस महागठबंधन के लिए तैयार है। राहुल गांधी का यह संदेश कांग्रेस के चुनाव प्रबंधक प्रशांत किशोर ने मुलायम सिंह के साथ मंगलवार को हुई एक गुप्त मीटिंग में दिया। सूत्रों के मुताबिक, मीटिंग में समाजवादी पार्टी सांसद अमर सिंह भी मौजूद थे। बतां दें कि सीएम अखिलेश यादव हमेशा से अमर सिंह के खिलाफ में रहे हैं। मीटिंग की डीटेल तो उजागर नहीं कई गई, लेकिन चर्चा है कि कांग्रेस और सपा में गठबंधन हो सकता है।
कांग्रेस ने यूपी विधानसभा चुनाव के लिए शीला दीक्षित को अपना मुख्यमंत्री चेहरा घोषित किया था, लेकिन माना जा रहा है कि धीरे-धीरे पार्टी को अपना यह कार्ड ना चलता हुआ दिखाई पड़ा। ऐसे में पार्टी अकेले चुनाव लड़ने की जगह सपा, कांग्रेस, रालोद और जेडीयू को एक साथ लाने की कोशिश कर रही है। बता दें कि सपा भी राज्य में गठबंधन की तलाश रही है। पार्टी जदयू और अजीत सिंह की पार्टी राष्ट्रीय लोकदल को साथ लेने के लिए काम कर रही है। पिछले हफ्ते मुलायम के छोटे भाई और प्रदेश सपा प्रमुख शिवपाल सिंह ने जेडीयू के केसी त्यागी और रालोद प्रमुख अजीत सिंह से मुलाकात की थी, ताकि उन्हें सपा की 25वीं वर्षगांठ के मौके पर 5 नवंबर को लखनऊ आने का न्योता दिया जा सके।
वीडियो: जब पार्टी मीटिंग के दौरान एक दूसरे से माइक छीनने लगे अखिलेश और शिवपाल; हुई धक्कामुक्की
सपा बिहार चुनाव में महागठबंधन के साथ थी, लेकिन बाद में सीटों के मुद्दे पर अलग हो गई थी। मुलायम परिवार में ताजा घटनाक्रम में रामगोपाल कमजोर हो गए हैं। मुलायम ने उन्हें पार्टी से भी निकाल दिया है इसके चलते गठबंधन की संभावनाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, पार्टी में चल रहे कलह के बावजूद चुनाव में सपा का मुख्य लक्ष्य मुस्लिम वोट को बंटने से रोकना है, जिसके लिए यह धर्मनिरपेक्ष पार्टियों से गठजोड़ करने पर गौर कर रही है। अगर सपा और कांग्रेस साथ आते हैं तो इससे मायावती की पार्टी बसपा और भाजपा दोनों के लिए मुश्किल हो सकती है।
Delhi: Political strategist Prashant Kishor leaves after meeting Mulayam Singh Yadav and Amar Singh pic.twitter.com/pnCYAxA3Hy
— ANI (@ANI) November 1, 2016
