लोकसभा चुनाव की दृष्टि से सबसे अहम माने जाने वाले उत्तर प्रदेश व समाजवादी पार्टी द्वारा एकतरफा गठबंधन का एलान कर दिए जाने के बाद अकेली पड़ी कांग्रेस ने सूबे में कुछ छोटे दलों को साथ लेकर एक नया चुनावी मोर्चा खड़ा करने की कवायद तेज कर दी है। इसके तहत पीस पार्टी, अपना दल आदि अलग-अलग क्षेत्रों में प्रभाव रखने वाले दलों के साथ पार्टी रणनीतिकारों की बातचीत जारी है। पीस पार्टी के नेताओं ने शनिवार शाम कांग्रेस की पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रभारी महासचिव बनाई गई प्रियंका गांधी वाड्रा से दिल्ली में मुलाकात की। इस मुलाकात के फोटोग्राफ भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गए लेकिन चुनावी तालमेल की इस कवायद को फिलहाल सार्वजनिक नहीं करने की रणनीति के तहत दोनों दलों ने इस मुलाकात को लेकर चुप्पी साध ली। इसी प्रकार कांग्रेस और अपना दल के बीच भी चुनावी गठजोड़ की कोशिशें चल रही हैं। अपना दल की नेता अनुप्रिया पटेल की भी प्रियंका गांधी वाड्रा से मुलाकात की बात भी सामने आई है।
सूत्रों ने यूपी में छोटे दलों से कांग्रेस के तालमेल की खबरों को लेकर पूछने पर कहा कि यह सही है कि अलग-अलग दलों के नेताओं ने कांग्रेस के नेताओं से संपर्क किया है और साथ मिलकर लड़ने की पेशकश भी की है। हालांकि कांग्रेस इन दलों के साथ चुनावी गठजोड़ करेगी या नहीं इसकी घोषणा सही वक्त पर की जाएगी। उन्होंने कहा कि गठबंधन के मामले में यूपी में अभी कई बड़ा उलटफेर संभावित है। लिहाजा, कांग्रेस की अगुआई में नए मोर्चे के गठन को लेकर जारी कवायद को लेकर फिलहाल कुछ कहना उचित नहीं होगा।
पूर्वी उत्तर प्रदेश में पीस पार्टी और अपना दल से चुनावी गठजोड़ की कांग्रेस की बातचीत के अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और अजीत सिंह की अगुआई वाले राष्टÑीय लोकदल (आरएलडी) के बीच भी गठजोड़ की कोशिशें भी की गई हैं। सपा-बसपा द्वारा सभी सीटों के बंटवारे का एलान और तीन सीटें आरएलडी के लिए छोड़ दिए जाने के बाद माना जा रहा है कि अब आरएलडी और कांग्रेस के बीच किसी किस्म की चुनावी समझ नहीं कायम होने वाली। लेकिन अंदरखाने जारी इन तमाम राजनीतिक गतिविधियों को लेकर यह जरूर कहा जा रहा है कि कांग्रेस भाजपा व सपा-बसपा गठबंधन से इतर एक नया सियासी मोर्चा खड़ा करने की कोशिश जरूर कर रही है।
