उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को कहा कि प्रदेश में 15 जुलाई से पॉलीथिन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लग जाएगा। पॉलीथिन प्रदूषण का सबसे बड़ा कारक है। इस पर रोक लगाना जरूरी हो गया था। मुख्यमंत्री ने ट्विटर हैंडल के माध्यम से कहा, “15 जुलाई के बाद प्लास्टिक के कप, ग्लास और पॉलीथिन का इस्तेमाल किसी भी स्तर पर न हो। इसमें आप सभी की सहभागिता जरूरी होगी। योगी सरकार ने 50 माइक्रन से पतली पॉलीथिन को सूबे में इस्तेमाल करने पर प्रतिबंध लगा दिया है। आदेश के मुताबिक, यदि कोई नियम का उल्लंघन करता हुआ पाया जाता है तो उस पर 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी वर्ष 2015 में पॉलीथिन के इस्तेमाल पर रोक लगाने का फैसला लिया था, लेकिन बाद में यह लागू नहीं हो पाया। गौरतलब है कि देश के कई राज्यों में प्लास्टिक पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया गया है।
मई में ही हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने स्कूली छात्रों, वॉलिंटियर्स और होम गार्ड कर्मियों को शामिल कर राज्य की राजधानी में एक सप्ताह तक चलने वाले राज्यव्यापी पॉलीथिन हटाओ अभियान शुरू किया था। प्लास्टिक के कारण होने वाले प्रदूषण को चिंता का विषय करार देते हुए उन्होंने कहा कि विकसित देशों में स्थिति अधिक खतरनाक है क्योंकि वह अधिक प्लास्टिक का उपयोग करते हैं। इसलिए प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बन चुका है।
उन्होंने कहा था कि यह अपशिष्ट मनुष्यों और जानवरों के लिए सबसे बड़ा स्वास्थ्य खतरा है, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार ने दो अक्टूबर, 2009 को राज्य में प्लास्टिक बैग के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया था लेकिन दूध, चिप्स और ब्रेड जैसे उत्पादों के पैकेजिंग में इसका उपयोग जारी रहा।
ठाकुर ने कहा कि राज्य सरकार प्लास्टिक कचरे से ऊर्जा उत्पादन के लिए परियोजनाएं शुरू कर रही है। शिमला में ऐसा एक संयंत्र स्थापित किया गया है और कुल्लू व बद्दी शहरों में दो और संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने पर्यावरण संरक्षण की भी शपथ ली। पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी निदेशक डी.सी. राणा ने कहा कि छात्र और वॉलिंटियर्स प्लास्टिक अपशिष्ट इकट्ठा करेंगे, जिसे वैज्ञानिक निपटान के लिए नागरिक निकायों द्वारा एकत्र किया जाएगा।

