राह चलते छोटी-छोटी बातों पर मारपीट व संघर्ष से जुड़ी ‘रोडरेज’ की घटनाओं में देश में हर रोज औसतन तीन लोग मारे जा रहे हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए रोडरेज की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए ठोस कानून बनाने की मांग हो रही है। गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 2015 में पूरे देश में रोडरेज के 3782 मामले दर्ज किए गए। इन घटनाओं में 4702 लोग घायल हुए व इस दौरान मारपीट और संघर्ष में 1388 लोगों की मौत हुई। इसी प्रकार 2016 में देश में रोडरेज के 1643 मामले दर्ज किए गए जिसमें 1863 लोग घायल हुए और 788 लोगों की मौत हुई। भाजपा सांसद रतन लाल कटारिया ने रोडरेज के विषय को लोकसभा में उठाया था और इस विषय की गंभीरता की ओर ध्यान आकृष्ट करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि यह गंभीर विषय है और देश में रोडरेज की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए ठोस कानून बनाने के बारे में विचार किए जाने की जरूरत है। गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 2015 में ओड़ीशा में रोडरेज के सबसे अधिक 2239 मामले दर्ज किए गए। इसमें 2357 लोग घायल हुए और 852 लोगों की मौत हुई। 2016 में ओड़ीशा में रोडरेज के 132 मामले दर्ज किए गए जिसमें 135 लोग घायल हुए और 58 लोगों की मौत हुई। 2015 में पश्चिम बंगाल में रोडरेज के 455 मामले दर्ज किए गए। इसमें 379 लोग घायल हुए और 252 लोगों की मौत हुई। 2016 में पश्चिम बंगाल में रोडरेज के 258 मामले दर्ज किए गए। इसमें 229 लोग घायल हुए और 208 लोगों की मौत हुई।

2015 में मध्य प्रदेश में रोडरेज के 106 मामले दर्ज किए गए जिसमें 556 लोग घायल हुए और 87 लोगों की मौत हुई। 2016 में मध्य प्रदेश में रोडरेज के 137 मामले दर्ज किए गए जिसमें 130 लोग घायल हुए और आठ लोगों की मौत हुई। जम्मू कश्मीर में 2015 में रोडरेज के 265 मामले दर्ज किए गए। इसमें 433 लोग घायल हुए और 43 लोगों की मौत हुई। 2016 में जम्मू कश्मीर में रोडरेज के 319 मामले दर्ज किए गए जिसमें 610 लोग घायल हुए और 70 लोगों की मौत हुई। गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली में 2015 में रोडरेज के 43 मामले दर्ज किए गए। इसमें 47 लोग घायल हुए और कोई मौत नहीं हुई। 2016 में दिल्ली में रोडरेज के 40 मामले दर्ज किए गए जिसमें 22 लोग घायल हुए और दो लोगों की मौत हुई।

इसी तरह बिहार में 2015 में रोडरेज के 47 मामले दर्ज किए गए। इसमें 41 लोग घायल हुए और सात लोगों की मौत हुई। 2016 में बिहार में रोडरेज के पांच मामले दर्ज किए गए। इसमें नौ लोग घायल हुए और एक व्यक्ति की मौत हुई। 2015 में हरियाणा में रोडरेज के 10 मामले दर्ज किए गए। जिसमें नौ लोग घायल हुए और एक व्यक्ति की मौत हुई। 2016 में हरियाणा में रोडरेज के 12 मामले दर्ज किए गए। इसमें 12 लोग घायल हुए और किसी की मौत नहीं हुई। रोडरेज के विषय पर गृह मंत्रालय का कहना है कि भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत पुलिस व लोक व्यवस्था राज्य का विषय है। इसके अलावा भारतीय दंड संहिता और दंड प्रक्रिया संहिता में रोडरेज की घटनाओं से निपटने के लिए पर्याप्त प्रावधान हैं। मोटर यान अधिनियम 1988 की धारा 166 और 140 में सड़क दुर्घटना के पीड़ितों को मुआवजा देने का भी प्रावधान है।