इंदौर प्रशासन ने लेप्रोसी से जूझ रहे एक 50 साल के भिखारी को बचाया। अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि शुरुआती तौर पर पता चला कि वह तीन मकानों, एक कार और तीन ऑटो रिक्शा समेत लाखों रुपये की प्रॉपर्टी का मालिक है। प्रशासन ने इंदौर में भीख लेने के साथ ही भीख देने और भिखारियों से कोई भी सामान खरीदने तक पर कानूनी रोक लगा रखी है।
प्रशासन यह दावा करता है कि इंदौर शहर पूरी तरह से भिखारियों से मुक्त है। महिला और बाल विकास विभाग के अधिकारी दिनेश मिश्रा ने बताया कि आम लोगों से मिली जानकारी के बाद सर्राफा क्षेत्र से कुष्ठ रोगी को भीख मांगने से मुक्त कराने के लिए बचाया गया है। मिश्रा खुद भिक्षावृत्ति उन्मूलन अभियान (Beggary Eradication Campaign) के नोडल अधिकारी हैं।
अधिकारी दिनेश मिश्रा ने बताया, ‘‘हमें पता चला है कि इस व्यक्ति के पास तीन पक्के मकान हैं। इनमें तीन मंजिलों वाला एक घर शामिल है। इसके अलावा, उसके पास तीन ऑटो रिक्शा हैं जिन्हें उसने किराये पर दे रखा है।’’ मिश्रा ने कहा कि इस व्यक्ति के पास एक कार भी है। इसी में बैठकर वह भीख मांगने जाता है और इसके लिए उसने ड्राइवर भी रखा हुआ है।
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उधार देकर ब्याज वसूलता है- दिनेश मिश्रा
मिश्रा ने बताया, ‘’लेप्रोसी से जूझ रहा यह व्यक्ति पहियों के सहारे घिसटने वाली गाड़ी पर बैठकर भीख मांगता है।’’ मिश्रा के मुताबिक, यह व्यक्ति साल 2021-22 से भीख मांग रहा है और यह भी पता चला है कि उसने सर्राफा क्षेत्र में लोगों को चार से पांच लाख रुपये उधार दिए हैं। इनसे वह रोजाना ब्याज वसूलता है।
अधिकारी ने बताया, ‘‘इस ब्याज से वह हर दिन 1000 से 2000 रुपये कमाता है। इसके अलावा, उसे रोजाना 400 रुपये से 500 रुपये भीख के तौर पर मिल जाते हैं।’’ मिश्रा ने बताया कि इस व्यक्ति को शेल्टर होम में रखा गया है। डीएम शिवम वर्मा ने कहा कि इंदौर बैगर फ्री शहर है। भीख मांगने की किसी भी तरह की जानकारी मिलने पर भिखारियों का पुनर्वास किया जाता है। डीएम ने कहा कि सर्राफा क्षेत्र में बचाए गए व्यक्ति की संपत्तियों के बारे में प्रशासन को शुरुआती जानकारी मिली है और तथ्यों की जांच के बाद कानूनी प्रावधानों के मुताबिक कदम उठाए जाएंगे।
इस मामले को मानवीय नजरिये से देखा जाना चाहिए- रूपाली जैन
एक एनजीओ प्रवेश की अध्यक्ष रूपाली जैन ने कहा कि लेप्रोसी से जूझ रहे इस व्यक्ति के मामले को मानवीय नजरिये से देखा जाना चाहिए क्योंकि उसने लाखों रुपये की कथित संपत्ति भीख मांगकर नहीं बनाई है। उन्होंने बताया कि यह व्यक्ति कुछ साल पहले मकान बनाने वाले मिस्त्री के तौर पर काम करता था, लेकिन कुष्ठ रोग के कारण उंगलियों और पैरों को गंभीर नुकसान के बाद वह यह काम जारी नहीं रख सका और सामाजिक और पारिवारिक भेद-भाव का शिकार होने के बाद उसने सर्राफा क्षेत्र की मशहूर चाट-चौपाटी के पास रात के वक्त भीख मांगनी शुरू कर दी। जैन ने बताया, ‘‘हमने पिछले चार साल के दौरान दो बार इस व्यक्ति को समझाया कि वह भीख मांगना छोड़ दे। उसने कुछ वक्त के लिए भीख मांगना छोड़ भी दिया था, लेकिन बाद में उसने फिर से भीख मांगनी शुरू कर दी।’’ बता दें कि इंदौर में भिखारियों की जानकारी देने पर 1000 रुपये इनाम की भी घोषणा की गई थी।
