संसद का घेराव करने के दिल्ली नगर निगम के सफाई कर्मचारियों के एलान से सोमवार को पूरा शहर जाम रहा। पूर्वी निगम के मेयर की ओर से मांगें मान लेने की घोषणा करने और एक सफाई संगठन की ओर से हड़ताल तोड़ने का एलान किए जाने के बाद भी सोमवार को निगम स्वच्छता कर्मचारी यूनियन के नेता संजय गहलोत की अगुआई में हजारों सफाई कर्मचारियों ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया जिससे कनॉट प्लेस और उसके आसपास भारी जाम लग गया। वहीं लगातार चेतावनी के बाद भी हड़ताल में शामिल होने वाले सफाई कर्मचारियों पर निगम प्रशासन ने सख्त रवैया अपनाना शुरू कर दिया है। पूर्वी नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त के निर्देश पर शाहदरा दक्षिणी जोन के 11 अस्थाई कर्मचारियों को काम से हटा दिया गया है और 10 स्थाई कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है। वहीं शाहदरा उत्तरी जोन के 15 अस्थाई कर्मचारियों को हटा दिया गया है और 7 स्थाई कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है। इसके अलावा पूर्वी निगम ने छह अस्थाई कर्मचारियों को पक्का करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
सफाई कर्मचारी संसद का घेराव करने की कोशिश में थे, जिन्हें रोकने के दौरान पुलिस को हल्का बल भी प्रयोग करना पड़ा। पुलिस की ओर से किए गए लाठीचार्ज में करीब 500 सफाईकर्मियों को मामूली चोटें आर्इं जबकि दिल्ली पुलिस के छह जवान भी मामूली रूप से घायल हो गए। बाद में सफाईकर्मियों को संसद मार्ग थाने ले जाया गया और कुछ देर बाद छोड़ दिया गया। जंतर-मंतर पर पहुंचे हड़ताली सफाई कर्मचारियों को रोकने के लिए पुलिस ने कनॉट प्लेस जाने के सभी रास्ते बंद कर दिए थे। इसके बावजूद कर्मचारियों की भीड़ से जंतर-मंतर और उसके आसपास के इलाके जाम में तब्दील हो गए। प्रदर्शन के दौरान महिला और पुरुष सफाई कर्मचारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों को संबोधित करने के लिए दिल्ली के अलावा मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, हरियाणा व उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों और कस्बों से नेता और कार्यकर्ता पहुंचे थे। प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए संजय गहलोत ने कहा कि हमारे निहत्थे भाई-बहनों को पुलिस ने बल प्रयोग कर घायल किया।
केंद्र, राज्य और निगम में सत्तारूढ़ भाजपा के नेता तमाम कोशिशों के बावजूद उनके प्रदर्शन को रोक नहीं पाए। उन्होंने कहा कि संसद के घेराव का मुख्य मकसद केंद्र सरकार को कड़ा संदेश देना था कि ‘अबकी बार-अंतिम बार’ की लड़ाई रुकने वाली नहीं है। संजय गहलोत ने कहा कि हड़ताल का नोटिस हमने दिया है और मेयर किसी और नेता से बात कर हड़ताल तोड़ने की घोषणा कर हमें गुमराह करना चाह रहे हैं। गहलोत के मुताबिक, हड़ताल जारी रहेगी और अब वे पूर्वी दिल्ली के दोनों जोनों के उपायुक्तों का घेराव करेंगे। उन्होंने कहा कि पिछले तीन साल में सफाई कर्मचारियों की यह आठवीं हड़ताल है। पक्की नौकरी, नियमित पेंशन, मेडिकल कार्ड और स्थाई आमदनी जैसी मांगों को लेकर 27 दिन से हड़ताल कर रहे गहलोत का कहना था कि उन्होंने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास के बाहर भी प्रदर्शन किया। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी का भी आश्वासन सुना। इसी तरह के कई आश्वासन देकर सफाई कर्र्मचारियों को छला गया, लेकिन इस बार अंतिम बार का नारा है और जब तक उनकी मांगों को लिखित में नहीं माना जाएगा तब तक हड़ताल जारी रहेगी।
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस ने पूर्वी दिल्ली नगर निगम के सफाई कर्मचारियों पर सोमवार को दिल्ली पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज की कड़ी निंदा की है। कांग्रेसी नेता अजय माकन ने कहा कि यह दुखद है। जो सफाई कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर संसद मार्ग पर शांतिपूर्ण तरीके से धरने पर बैठने के लिए जा रहे थे, उन पर भाजपा के इशारे पर लाठीचार्ज किया गया। अजय माकन ने कहा कि सफाईकर्मियों पर लाठीचार्ज न केवल अलोकतांत्रिक कदम है बल्कि उनके मानवाधिकारों का भी सीधा-सीधा हनन है। उन्होंने कहा कि भाजपा शासित नगर निगम और केंद्र सरकार ने सफाई कर्मचारियों की मांगों को मानने की जगह उनकी आवाज को दबाने के लिए हिंसा का सहारा लिया है। उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत अभियान का ढिढोरा हर स्तर पर पीटा जा रहा है परंतु दिल्ली के सफाई कर्मचारियों की मांगों को न मानना और उल्टे उन पर लाठीचार्ज करना उनके अभियान के खोखलेपन को उजागर करता है। माकन ने दिल्ली सरकार पर भी हमला बोलते हुए कहा कि यह बड़े दुर्भाग्य की बात है कि केजरीवाल सरकार ने निगमों के लिए 500 करोड़ रुपए तब दिए जब सर्वोच्च न्यायालय ने उनको आदेश दिया, इससे यह साफ जाहिर होता है कि ‘आप’ पार्टी सिर्फ दिखावे व वोट के लिए गरीब, मजदूर व सफाई कर्मचारियों का सहारा लेती है।
विपक्ष के नेता ने दिल्ली सरकार पर झूठ बोलने का आरोप लगाया
दिल्ली विधानसभा में नेता विपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने पूर्वी दिल्ली नगर निगम (ईडीएमसी) को फंड जारी किए जाने को लेकर दिल्ली सरकार पर झूठ बोलने का आरोप लगाया। कहा कि सरकार ने 950 करोड़ नहीं बल्कि 604 करोड़ ही जारी किया है, शेष 331 करोड़ की राशि ऋण है जिसपर सरकार द्वारा 10.50 फीसद ब्याज वसूला जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार तथ्यों को छिपा रही है और अपने मतलब से व्याख्या कर रही है। बकौल गुप्ता ‘दिल्ली सरकार ने साल 2017-18 में शहरी विकास और यातायात के लिए योजना मद में किए गए 1228.42 करोड़ रूपर के आबंटन को इस साल काटकर शून्य कर दिया है।’ नेता विपक्ष ने कहा कि केजरीवाल सरकार नगर निगमों का वित्तीय रूप से गला घोंट देना चाहती है ताकि ये निगमें कुछ विकास काम न कर सकें और उनकी बदनामी हो।
